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शीला दीक्षित का इस्तीफा, कल्याण, वजुभाई, सी विद्यासागर व मृदुला नए महामहिम नियुक्त PDF Print E-mail
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Wednesday, 27 August 2014 08:35



जनसत्ता ब्यूरो / एजंसियां 

नई दिल्ली। केंद्र में नई सरकार बनने के बाद राज्यपालों में फेरबदल का सिलसिला जारी है। सरकार से इशारा पाकर मंगलवार को केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित ने पद छोड़ दिया। सोमवार को वे नई दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिली थीं। लेकिन बात नहीं बनी और आज उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इससे पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल शंकरनारायण ने अपनी बदली से नाराज होकर इस्तीफा दिया था। मोदी सरकार बनने के बाद अब तक पिछली सरकार की ओर से नियुक्त आठ राज्यपाल कुर्सी छोड़ चुके हैं। इस बीच नई तैनातियों के तहत सरकार ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को राजस्थान और गुजरात के स्पीकर वाजूभाई रूदाभाई वाला को कर्नाटक, पूर्व केंद्रीय मंत्री सी विद्यासागर राव को महाराष्ट्र और भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष मृदुला सिन्हा को गोवा का राज्यपाल नामित किया है। 

बीते मार्च लोकसभा चुनावों से पहले केरल की राज्यपाल नियुक्त की गईं शीला दीक्षित पर पद छोड़ने का काफी दबाव था। वे लगातार प्रयास में थीं कि कुर्सी बच जाए। लेकिन सरकार उन्हें मोहलत या रियायत देने के पक्ष में नहीं थी। उन्होंने सोमवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और आज अपने इस्तीफे की पुष्टि कर दी । 

राज्यपालों को हटाने के पीछे सरकार का साफ तर्क है कि यह सामान्य प्रक्रिया है और यूपीए सरकार के दौरान नियुक्त राज्यपालों को केंद्र की मंशा का पालन करना होगा। शीला दीक्षित के मामले मेंं राष्ट्रपति सचिवालय ने उनका इस्तीफा जरूरी कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज दिया है। इस बीच दीक्षित ने कहा, मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैंने कल ही इस्तीफा दे दिया था और अब मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद ही वे इस मसले पर कुछ बोलेंगी । 

बहरहाल पिछली सरकार की ओर से नियुक्त राज्यपालों की बर्खास्तगी, इस्तीफे या कार्यकाल पूरा होने की वजह से खाली हो रहे पदों को भरने में जुटी मोदी सरकार ने आज 82 साल के कल्याण सिंह को राजस्थान की राज्यपाली दे दी। मारग्रेट अल्वा ने इस महीने की शुरुआत में ही राज्यपाल के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा किया था। वाजूभाई वाला को कर्नाटक का राज्यपाल नामित किया गया जहां हंसराज भारद्वाज ने हाल ही में अपना कार्यकाल पूरा किया था । 

 विद्यासागर राव महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने वाले के. शंकरनारायण की जगह लेंगे। मिजोरम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में शंकरनारायणन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से रविवार को इस्तीफा दे दिया था। इकहत्तर साल की मृदुला सिन्हा को बीवी वांचू की जगह गोवा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। केंद्र की सत्ता बदलने के बाद जिन राज्यपालों को पद छोड़ने के लिए कहा गया था, उनमें वांचू भी शामिल थे । 

मंगलवार को राष्ट्रपति भवन की एक विज्ञप्ति के मुताबिक, अल्वा का कार्यकाल पूरा होने की वजह से खाली हुए पद पर कल्याण सिंह जयपुर में कार्यभार संभालेंगे। दो दफा उत्तर प्रदेश


के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह को सर्वोच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद की संरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर देश की शीर्ष अदालत को दिया गया वचन न निभाने के जुर्म में 24 अक्तूबर 1994 को एक दिन की सजा सुनाई थी। उन्होंने दो बार भाजपा का दामन छोड़ा पर बाद में पार्टी में लौट आए । 

 76 साल के वाजूभाई वाला बंगलूर में अपना कार्यभार संभालेंगे। वे मोदी के पुराने विश्वस्त सहयोगी हैं। उन्होंने मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य के वित्त मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दी थी। उन्हें पिछले साल जनवरी में गुजरात विधानसभा का स्पीकर चुना गया था। अमदाबाद से मिली खबर के अनुसार, वाजूभाई वाला ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी अपनी पृष्ठभूमि पर जोर देते हुए मंगलवार को कहा कि उनके लिए पद कोई मायने नहीं रखता और वे देश की भलाई के लिए काम करने को प्रतिबद्ध हैं। गुजरात विधानसभा में मौजूदा अध्यक्ष वाला ने कहा, यहां मायने नहीं रखता कि मेरी नियुक्ति कहां हुई है। मेरा लक्ष्य देश की भलाई के लिए काम करना है और यह सुनिश्चित करना है कि भारत का हर नागरिक स्वस्थ और समृद्ध जीवन जी सके। यह तब भी किया जा सकता है जब आप किसी पद पर आसीन नहीं हैं।


 केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे विद्यासागर राव नवगठित तेलंगाना राज्य के रहने वाले हैं। पेशे से वकील 69 साल के राव तीन बार आंध्र प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने जा चुके हैं और वे सदन में भाजपा के नेता थे । 

हिंदी लेखिका और भाजपा महिला मोर्चे से जुड़ी रही मृदुला सिन्हा ने ‘एक थी रानी ऐसी भी’ सहित दर्जनों किताबें लिखी हैं। ‘एक थी रानी ऐसी भी’ नाम की किताब राजमाता विजयाराजे सिंधिया को समर्पित थी।  राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति के मुताबिक, नामित किए गए लोग जिस दिन पदभार संभालेंगे उस दिन से उनकी नियुक्ति प्रभावी होगी  । दीक्षित के मामले मेंं राष्ट्रपति सचिवालय ने उनका इस्तीफा जरूरी कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज दिया है। शीला पिछली  सरकार की ओर से नियुक्त आठवीं राज्यपाल हैं जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है। छह राज्यपालों  के. शंकरनारायणन (महाराष्ट्र), एमके नारायणन (पश्चिम बंगाल), अश्विनी कुमार (नगालैंड), बीएल जोशी (उत्तरप्रदेश), बीवी वांचू (गोवा) और शेखर दत्त (छत्तीसगढ़) पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं । जुलाई में मिजोरम के राज्यपाल वी पुरुषोत्तमन को नगालैंड स्थानांतरित करने के बाद उन्होंने विरोधस्वरूप इस्तीफा दे दिया था। दीक्षित 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं और लोकसभा चुनावों के लिए आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले उन्हें केरल का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार,  इस तरह के भी संकेत थे कि दीक्षित का मिजोरम तबादला किया जा सकता है जहां पहले शंकरनारायणन और कमला बेनीवाल का तबादला किया गया था।

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