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इस्तीफे की अटकलों के बीच राष्ट्रपति व गृहमंत्री से मिलीं शीला दीक्षित PDF Print E-mail
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Tuesday, 26 August 2014 09:30



जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित ने पद से इस्तीफे के संकेतों के बीच सोमवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। रविवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल के शंकरनारायणन ने इस्तीफा दे दिया था। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के संकेतों के बाद यूपीए सरकार के नियुक्त किए गए पांच राज्यपाल पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।

पांच महीने पहले ही केरल के राज्यपाल का पदभार संभालने वालीं 76 वर्षीय शीला दीक्षित के करीबी सूत्रों ने संकेत दिया कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकती हैं क्योंकि उन पर ऐसा करने का दबाव है। जब शीला दीक्षित से पूछा गया कि क्या वे इस्तीफा देंगी तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। 

सूत्रों के मुताबिक समझा जाता है कि गृहमंत्री के साथ 15 मिनट की बैठक में शीला ने तिरुवनंतपुरम राजभवन में बने रहने के बारे में चर्चा की है। जब राजग सरकार ने कथित तौर पर उन्हें इस्तीफे के लिए कहा था तो बताया जाता है कि उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।

इस तरह की भी खबरें रही हैं कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री का स्थानांतरण पूर्वोत्तर के किसी राज्य में किया जा सकता है। दीक्षित ने सिंह से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति से मुलाकात की। हालांकि उनकी मुलाकात के बारे में कोई औपचारिक जानकारी नहीं है।    

शीला ने कहा कि मैं जब भी दिल्ली में होती हूं तो राष्ट्रपति से मिलने का प्रयास करती हूं। 

इस बीच कांग्रेस ने सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए


उस पर राज्यपाल के संवैधानिक पद को अपमानित करने का आरोप लगाया। हालांकि पार्टी इन सवालों को टाल गई कि क्या केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित इस्तीफा दे सकती हैं और फिर से पार्टी के काम में वापस आ सकती हैं। 

कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने यहां संवाददाताओं से कहा कि वे (भाजपा) राज्यपाल के संवैधानिक पद से इस तरह से व्यवहार कर रहे हैं। ऐसी आशंका है कि यूपीए के दौरान नियुक्त किए गए ज्यादातर राज्यपालों को मौजूदा सरकार के समय हटा दिया जाए। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद को अपमानित करना उस पार्टी को शोभा नहीं देता है जो सरकार में है। 

उन्होंने यह पूछे जाने पर अनभिज्ञता जताई कि क्या शीला दीक्षित भी अपने पद से इस्तीफा दे सकती हैं। अहमद ने कहा- कौन जानता है कि वे कांग्रेस में शामिल होंगी या नहीं। वे कब राजनीति में लौटेंगी। यह उनको तय करना है कि वे किस दल में शामिल होंगी। अभी वे संवैधानकि पद संभाल रही हैं। वे कांग्रेस की बड़ी नेता रही हैं, लेकिन अभी वे कांग्रेस नेता नहीं हैं राज्यपाल हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता ने इस बात को भी गलत बताया कि यूपीए के दौरान नियुक्त किए गए राज्यपाल पूर्वोत्तर राज्यों में काम नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि यूपीए के दौरान नियुक्त किए गए अनेक राज्यपाल अभी भी पूर्वोत्तर में काम कर रहे हैं। 


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