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सलमान खान मामले में केस की डायरियां तक हैं गायब PDF Print E-mail
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Thursday, 21 August 2014 16:23


मुंबई। अभिनेता सलमान खान की कथित संलिप्तता वाले वर्ष 2001 के हिट-एंड-रन मामले से जुड़े असली दस्तावेजों का पता लगाने में पुलिस की विफलता पर नाखुशी जाहिर करते हुए एक सत्र अदालत ने आज उसे 12 सितंबर तक कागजातों का पता लगाने का अंतिम अवसर दिया। 

    पुलिस ने आज अदालत को पहली बार बताया कि इस मामले की केस डायरियां तक गायब हैं। इससे पहले उन्होंने यह कहा था कि गवाहों के 63 मूल बयानों में से सिर्फ 7 का पता लगाया जा सकता है, हालांकि सही प्रतिलिपियां उपलब्ध हैं।

    सलमान के वकील श्रीकांत शिवाडे ने तर्क दिया कि कानून के मुताबिक मूल दस्तावेजों को सुनवाई से पहले अदालत के समक्ष पेश किया जाना जरूरी है, जबकि पुलिस ने तर्क दिया था कि मुंबई की अदालतों की कार्यवाही के अनुसार मुकदमों की सुनवाई सही प्रतिलिपियों के साथ चल सकती है।

    न्यायाधीश डी डब्ल्यू देशपांडे ने पुलिस को उनकी कार्रवाई की स्थिति के बारे में अगले अवसर पर जानकारी देने का निर्देश दिया और कहा कि इसके बाद अदालत यह जांच करेगी कि उनके पास कौन से दस्तावेज हैं और आरोपी के पास कौन से दस्तावेज हैं। इसके आधार पर अदालत यह जांचेगी कि इस मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाना उपयुक्त होगा। 

     पुलिस के अनुसार, मूल दस्तावेज मजिस्ट्रेट की अदालत में रखे गए थे, जहां 2001 के बाद से मुकदमा चल रहा था। हालांकि गैर इरादतन हत्या का आरोप इस मामले में जुड़ जाने के बाद, जब मामले को हाल ही में मजिस्ट्रेट अदालत से सत्र अदालत में स्थानांतरित किया गया, तो मूल दस्तावेज और केस डायरियों का पता नहीं लगाया जा सका।

    न्यायाधीश ने अब सेवानिवृत्त हो चुके तत्कालीन जांच अधिकारी किशन शेंगल को भी 12 सितंबर को खुद अदालत में पेश होने और गायब दस्तावेजों पर प्रकाश डालने का निर्देश दिया है।

    शिवाडे ने कहा कि यह मामला बहुत संवेदनशील और एक गंभीर अपराध से


जुड़ा है। इसलिए वह चाहते हैं कि कानून के अनुसार, मूल दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए जाएं। सही प्रतिलिपियां काफी नहीं होंगी।

    अदालत ने 25 जुलाई को बांद्रा पुलिस को आज केस डायरियां भी पेश करने का निर्देश दिया था लेकिन पुलिस ने जानकारी दी कि केस डायरियां भी गायब हैं।

    सत्र अदालत में इस मामले की सुनवाई नए सिरे से हो रही है।

    पिछले साल 5 दिसंबर को सत्र अदालत ने इस आधार पर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया था कि गैर इरादतन हत्या के संगीन आरोपों के संदर्भ में गवाहों से पूछताछ नहीं की गई थी। अभिनेता के खिलाफ यह आरोप सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट अदालत ने लगाया था।

 गैर इरादतन हत्या का आरोप साबित होने पर 10 साल की सजा हो सकती है। अभिनेता पर इससे पहले मजिस्ट्रेट द्वारा एक कम संगीन अपराध का मामला चलाया जा रहा था। यह अपराध अनजाने में मौत की वजह बनने का था, जिसमें दो साल की कैद हो सकती है।

    एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे इस मामले में उस समय एक अहम मोड़ आ गया था, जब मजिस्ट्रेट ने 17 गवाहों से पूछताछ के बाद कहा कि सलमान के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का आरोप लगाया जाता है। तब यह मामला सत्र अदालत को भेज दिया गया क्योंकि इस अपराध के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई एक उच्चतर अदालत ही कर सकती है।

    अभिनेता की कार 28 सितंबर 2002 को कथित तौर पर एक बेकरी में जा घुसी थी। इस घटना में फुटपाथ पर सो रहे एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि चार अन्य घायल हो गए थे।

(भाषा)


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