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भारत-पाक वार्ता रद्द करने पर कांग्रेस के निशाने पर भाजपा PDF Print E-mail
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Tuesday, 19 August 2014 15:26


नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ पहले वार्ता के लिए राजी होने और बाद में उसे रद्द करने की सरकार की नीति की कांग्रेस ने आज आलोचना की जबकि सरकार और भाजपा ने इस फैसले का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि पड़ोसी देश अलगाववादियों के साथ चले और भारत सरकार से वार्ता भी करे।


    विपक्षी कांग्रेस ने सरकार के रूख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले तो वह खुद ही वार्ता के लिए राजी हुई और आलोचना होने पर घबरा कर ‘न्रिदा से जागी’।

    कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने कहा, पाकिस्तान नीति को लेकर सरकार ने स्वयं ही अपने को कोने में धकेल लिया है। ‘‘पहले तो वह पाकिस्तान से वार्ता करने पर राजी हुई, वह भी इस्लामाबाद में। सरकार गहरी न्रिदा में थी और जब इसका विरोध हुआ, तो वह उससे जागी।’’

    कांग्रेस नेता ने कहा, अब अलगाववादी सरकार को चुनौती दे रहे हैं और पाकिस्तानी उच्चायुक्त भी सरकार को चुनौती देते हुए अलगाववादियों से मुलाकात जारी रखे हुए हैं। उन्होंने सवाल किया ‘‘सरकार का ऐसे में अगला कदम क्या होगा। पाकिस्तान के प्रति सरकार की रणनीति क्या है।’’

    उधर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सरकार के रूख का समर्थन करते हुए कहा, मामला एकदम साफ है। पाकिस्तान या तो भारत सरकार से वार्ता करे या वह अलगाववादियों से बात करे। पाकिस्तान ने पहले अलगाववादियों से बात करना चुना, जबकि उसे स्पष्ट बता दिया गया था कि अगर वह ऐसा करता है तो वार्ता को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।

   प्रसाद ने कहा कि भारत की ओर से ऐसा स्पष्ट कर दिए जाने के बावजूद पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने अलगाववादियों से बात की, जो उचित नहीं है।

    उन्होंने कहा, हम हमेशा कहते आए हैं कि आप मित्र बदल सकते हैं पड़ोसी नहीं। लेकिन समस्या यह है कि पाकिस्तान में नियंत्रण किसका है। वहां अलग अलग सुर हैं।

    पाकिस्तान के उच्चायुक्त द्वारा हुर्रियत नेताओं से विचार विमर्श किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए भारत ने 25 अगस्त को इस्लामाबाद में होने वाली सचिव स्तरीय वार्ता कल रद्द करने की घोषणा की।

    सरकार के इस


निर्णय को सही बताते हुए भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद और अलगाववाद के प्रति भारत का नजरिया समान है और यह भी कि भारत में ‘‘निजाम, नेतृत्व और नीयत’’ बदल गई है।

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अलगाववाद और आतंकवाद दोनों को संरक्षण देता है और फिर शांति वार्ता भी चाहता है, मगर ये दोनों बातें एक साथ कैसे जारी रह सकती हैं।

    तिवारी ने चीन मामले में भी सरकार की घेराबंदी की। उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चीनी सेना उत्तरी लद्दाख के भारतीय क्षेत्र में 25 किलोमीटर तक घुस आई लेकिन सरकार स्पष्टीकरण दे रही है कि यह घुसपैठ नहीं है बल्कि चीनी सेना सीमा की अपनी धारणा के तहत वहां तक आई थी।

    उन्होंने कहा, अगर सरकार के इस बयान को इसी रूप में लें तो हमें यह याद रखना चाहिए कि चीन ने अपने मानचित्रों में अरूणाचल प्रदेश, अक्साई चिन और काराकोरम को भी अपने क्षेत्र की रूप में दर्शाया है।

    कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘क्या सरकार अपने उक्त तर्क के आधार पर चीन को इन क्षेत्रों में घुसने की अनुमति देगी? ’’

    उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब भाजपा विपक्ष में थी तो वह तत्कालीन संप्रग सरकार पर ‘‘देश के सम्मान को बेचने’’ का आरोप लगाती थी लेकिन सत्ता में आने पर वह चीन और पाकिस्तान दोनों ओर से होने वाली घुसपैठों पर चुप्पी साधे हुए है।

   हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने हालांकि कहा कि वार्ता रद्द करने की यह ‘‘असली वजह नहीं है, क्योंकि हम तो कांग्रेस के शासनकाल और (राजग प्रधानमंत्री) अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में भी (पाकिस्तान से) बात करते रहे हैं। यह कोई नयी बात नहीं थी।’’

   उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत सरकार ने विदेश सचिव स्तरीय निर्धारित वार्ता को रद्द कर दिया।

    गिलानी ने कहा, ‘‘भारत को ऐसा नहीं करना चाहिए था। वार्ता रद्द करने का जो कारण बताया गया है वह असली वजह नहीं है।’’

(भाषा)


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