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भारत ने रद्द की विदेश सचिवों की बैठक, अलगाववादियों के साथ बैठक से नाराज PDF Print E-mail
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Tuesday, 19 August 2014 08:39


 

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत ने सोमवार को कड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ अगले हफ्ते होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द कर दिया। इस कदम से भारत ने पड़ोसी देश को दोटूक संदेश दिया है कि वह कश्मीरी अलगाववादियों के साथ बातचीत करके भारत के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है, जो अस्वीकार्य है। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि पाकिस्तान और उस देश के अंदर की ताकतें नहीं चाहतीं कि भारत-पाक के बीच संबंध सामान्य हों। नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान जानबूझ कर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है। भाजपा ने वार्ता रद्द करने का स्वागत किया है।

भारत ने यह कड़ा कदम इस बातचीत से पहले पाकिस्तानी उच्चायुक्त के कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को आमंत्रित करने से नाराज होकर उठाया है। इससे पहले विदेश सचिव सुजाता सिंह ने पाकिस्तान से साफ तौर पर कहा था कि वह इस बात का चुनाव कर ले कि उसे भारत से बात करनी है या पृथकतावादियों से, इसके बावजूद यहां पाकिस्तान के दूत ने अलगाववादियों से बात की। भारत ने कहा कि इसलिए, मौजूदा हालात में...भारतीय विदेश सचिव के अगले हफ्ते इस्लामाबाद जाने से कोई मकसद हल नहीं होगा।

विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि भारतीय विदेश सचिव ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त (अब्दुल बासित) को साफ और बेलाग अंदाज में कह दिया था कि भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के पाकिस्तान के निरंतर प्रयास अस्वीकार्य हैं। इस बात को रेखांकित किया गया था कि पाकिस्तानी उच्चायोग की हुर्रियत के इन तथाकथित नेताओं के साथ मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मई में सत्ता संभालने के ठीक पहले दिन से ही शुरू किए गए सार्थक कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करेगी।

सिंह को 25 अगस्त को अपने पाकिस्तानी समकक्ष एजाज चौधरी के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद जाना था। नियंत्रण रेखा के आसपास की घटनाओं के चलते दोनो देशों के बीच बातचीत का सिलसिला तकरीबन दो साल पहले थम गया था। प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे समय पर जब भारत सरकार द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में गंभीर पहल कर रही थी, जिसमें नियमित वार्ता प्रक्रिया फिर बहाल करने का प्रयास भी शामिल है, पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने हुर्रियत के तथाकथित नेताओं को आमंत्रित करके पाकिस्तान की नीयत पर सवालिया निशान लगाया, और इससे उनकी नकारात्मक विचारधारा और भारत के अंदरूनी मामलात में लगातार दखल देने के प्रयासों का भी पता चलता है।

प्रवक्ता ने कहा कि


पाकिस्तान के सामने एक ही रास्ता है कि वह शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के दायरे के भीतर और इसके सिद्धांतों के अनुरूप शांतिपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता के जरिए लंबित मसले हल करे। इसीलिए मौजूदा हालात में यह सोचा गया कि अगले हफ्ते भारतीय विदेश सचिव के इस्लामाबाद जाने से कोई मकसद हल नहीं होगा। विदेश सचिव का वार्ता के लिए 25 अगस्त का इस्लामाबाद दौरा रद्द किया जाता है।

इस्लामाबाद में बातचीत से पहले बासित ने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को यहां ‘सलाह मशविरे’ के लिए आमंत्रित किया था। पाकिस्तान के दूत इससे पहले भी भारत के साथ किसी बड़ी कूटनीतिक पहल से पहले कश्मीर के पृथकतावादियों से बात करते रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान ने अपनी यह रवायत तब तोड़ी जब प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस वर्ष मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने भारत आए।

इससे पहले रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बल संघर्ष विराम के उल्लंघन की किसी भी कोशिश का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अमृतसर में सीमाई चौकियों का दौरा करने के बाद संघर्ष विराम के उल्लंघन पर रक्षा मंत्री का यह बयान सोमवार को पाकिस्तानी सैनिकों की ओर से जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे असैन्य इलाकों और सीमा पर स्थित 20 चौकियों पर भारी मोर्टार दागे जाने और स्वचालित हथियारों से गोलाबारी की पृष्ठभूमि में आया है। पाकिस्तान की ओर से पिछले 10 दिन में एलओसी पर और जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन की यह 11वीं घटना है और इस साल अगस्त में यह 12वीं ऐसी घटना है।

पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द किए जाने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा ने कहा कि भारत अपने अंदरूनी मामलों में पड़ोसी देश के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत अपने पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते चाहता है। इसीलिए प्रधानमंत्री ने अपने शपथ समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सहित दक्षेस देशों के सभी राष्ट्र प्रमुखों को आमंत्रित किया था। भाजपा ने कहा कि जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाकात करके पाकिस्तान अच्छे संकेत नहीं दे रहा है। इसी कारण सरकार को दोनों देशों के बीच होने वाली सचिव स्तरीय वार्ता को रद्द करने का साहसिक कदम उठाना पड़ा।

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