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शरीफ के साथ आखिरी मुकाबले के लिए तैयार: इमरान खान PDF Print E-mail
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Monday, 18 August 2014 09:55


इस्लामाबाद। मुसलिम धर्मगुरु ताहिर उल कादरी द्वारा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद विपक्षी नेता इमरान खान ने रविवार को कहा कि वह अपने हजारों समर्थकों के साथ नवाज शरीफ के खिलाफ आखिरी मुकाबले के लिए तैयार हैं जो ‘चुनावी मैच फिक्सिंग’ में शामिल रहे हैं। 

साल 1992 के क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान को जीत दिलाने वाले खान ने पीएमएल-एन सरकार को चेतावनी दी है कि यदि शरीफ पद छोड़ने से इनकार करते हैं तो उनके समर्थक यहां कड़ी सुरक्षा वाले ‘रेड जोन’ में घुस जाएंगे। शरीफ एक साल से अधिक समय से सत्ता में हैं। पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के अध्यक्ष खान ने कहा कि रविवार को आखिरी मुकाबला होगा जो पाकिस्तान के इतिहास में निर्णायक दिन होगा। 

क्रिकेटर से नेता बने खान ने ट्वीट किया, लोग जानते हैं कि शरीफ चुनाव अधिकारियों और अन्य लोगों के साथ 2013 के चुनावी मैच फिक्सिंग में शामिल रहे हैं। वे इसे स्वीकार नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि 2013 के आमचुनाव में शरीफ ने 342 में 190 सीट हासिल की थी। खान की पार्टी को 34 सीटें मिली थी और वह तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। लेकिन उन्होंने दावा किया था कि उनकी पार्टी को कई और सीटें मिलनी चाहिए थी। 

 खान ने कहा- नवाज शरीफ को इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि लोगों ने पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ की ‘सुनामी’ के लिए भारी संख्या में आकर चुनावी धांधली पर अपना फैसला दे दिया है। उन्होंने ट्वीट में कहा है- चुनावी धांधली के जरिए नवाज शरीफ ने पारिवारिक कारोबार बढ़ाया, राष्ट्र पर कर्ज का बोझ बढ़ा और वह करदाताओं के पैसों पर तेल के कुएं रखने वाले शेख की तरह रहें। खान ने कहा- हम वह पार्टी नहीं हैं जिसने देश को लूटा हो,उन लोगों का सहयोग करने के लिए आगे आइए जो दूर दराज के इलाकों से आए हैं। 

 खान और पाकिस्तान अवामी तहरीक प्रमुख कादरी ने लाहौर से गुरुवार को अलग -अलग रैलियां निकाली और 35 घंटे से अधिक समय बाद राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। वे अलग अलग स्थानों पर डेरा डाले हुए हैं। खान ने चेतावनी दी है कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर उनकी मांग नहीं मानी जाती है तो उनकी सुनामी रेड जोन में घुस जाएगी और संसद के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। 

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले रेड


जोन में संसद, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आवास और विदेशी दूतावास स्थित है। उन्होंने देर रात कहा था-अगर मैं इन लोगों को काबू करने में नाकाम रहा तो मुझे जिम्मेदार मत ठहराना। मैं उन्हें सिर्फ रविवार की रात तक काबू में रख सकता हूं।

 वहीं, दूसरी ओर कादरी ने 14 मांगों की एक सूची पेश की जिसमें उन्होंने मांग की कि शरीफ सरकार इस्तीफा दे और प्रांतीय विधानसभाओं को 48 घंटे के अंदर भंग किया जाए। कादरी ने देश में क्रांति लाने की घोषणा की है। यह राजनीतिक अस्थिरता ऐसे वक्त में आई है जब पाकिस्तान आतंकवादियों और खासतौर पर अफगान सीमा से लगे कबायली इलाके में आतंकवाद के खिलाफ अभियान चला रहा है।

 पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने असैन्य सरकार को हटाने के किसी असंवैधानिक कदम के खिलाफ शुक्रवार को एक आदेश जारी किया था क्योंकि सरकार को हटाने को लेकर प्रदर्शन के चलते सैन्य हस्तक्षेप का अंदेशा पैदा हो रहा था। सेना को राजधानी की सुरक्षा की बागडोर तीन महीने के लिए पहले ही दी जा चुकी है। हालांकि, लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार की सत्ता हथियाने का उसका इतिहास रहा है। अपने 67 साल के इतिहास में पाकिस्तान ने तीन तख्तापलट देखे हैं जिसमें 1999 का शरीफ के खिलाफ तख्तापलट भी शामिल है जो तत्तकालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने किया था। वहीं, सूचना मंत्री परवेज राशिद ने कहा- वे (खान और कादरी)सरकार को नहीं बल्कि देश में लोकतंत्र को समय सीमा दे रहे हैं। मुत्तिहदा कौमी मूवमेंट के लंदन आधारित प्रमुख अल्ताफ हुसैन ने दोनों नेताओं से अपनी अतिवादी मांग छोड़ने और समय सीमा वापस लेने को कहा है। 

 इस बीच, परदे के पीछे परामर्श भी जारी है और जमात ए इस्लामी प्रमुख सिराजुल हक जैसे नेता बीच का रास्ता निकालने की जद्दोजहद कर रहे हैं। दुनिया टीवी की खबर के मुताबिक शरीफ ने खान और कादरी की मांगों का निपटारा करने के तरीकों पर चर्चा के लिए रविवार को राजनीतिक दलों की एक बैठक बुलाई है। समझा जा रहा है कि इस्तीफे के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होगी लेकिन नेताओं द्वारा चुनावी और राजनीतिक प्रणाली में सुधार करने जैसी रियायत दी जा सकती है ताकि इसे अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाया जा सके।

(भाषा)


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