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फ़िल्म समीक्षा: गंजी में पुलिस 'सिंहम रिटर्न्स' PDF Print E-mail
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Sunday, 17 August 2014 13:45


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निर्देशक- रोहित शेट्टी। कलाकार- अजय देवगन, करीना कपूर खान, अमोल गुप्ते, अनुपम खेर, दयानंद शेट्टी।

कुल जमा जोड़ ये है कि ये फिल्म मुंबई पुलिस के लिए एक जनसंपर्क अभियान लगती है और ये भी लगता है कि रोहित शेट्टी एक पीआरओ (जनसंपर्क अधिकारी) हैं जो पुलिस की दागदार वर्दी को चमकाने के लिए फिल्में बना रहे हैं। माना कि मुंबई पुलिस पर देश के कई हिस्सों की पुलिस की तरह ही कई तरह के आरोप हैं। लेकिन आरोपों से क्या होता है। ऐसे पुलिस अधिकारी भी तो हैं जो कानून अपने हाथ में लेकर न्यायाधीश बन जाना चाहते हैं। अजय देवगन ने फिल्म में जिस पुलिस अधिकारी बाजीराव सिंहम का किरदार निभाया है वो ठोकू पुलिस अधिकारी है और अपराधियों को अदालत से सजा दिलाने के झंझट में नहीं पड़ता। आखिर उतना लंबा रास्ता कौन ले। इसलिए अपराधी को पकड़ों और उड़ा दो। हो गया न्याय। इसी बात को जायज  ठहराती है बाजीराव सिंहम।

ये रोहित शेट्टी की फिल्म सिंहम के सिक्वल की तरह है और ये सिक्वल इसलिए बनाई गई है कि पहली फिल्म बॉक्स आॅफिस पर सफल रही थी। अब सफलता तो एक दुधारू गाय की तरह है जिसे अधिक से अधिक दुहा जाना चाहिए। इसलिए अजय देवगन को पुलिस की वर्दी पहनाई गई और सिंहम रिटर्न्स तैयार। स्टंट से लेकर कारों की दौड़ उसी तरह की है जिस तरह सिंहम में थी। इस फिल्म में भी सिंहम की तरह पुलिस के कई ऐसे दृश्य हैं जिसमें लगता है कि वो किसी बारात पार्टी में शामिल है। हां एक फर्क जरूर है। सिंहम के आखिरी दृश्यों में पुलिसवाले अपनी वर्दी में सड़क पर बारात पार्टी की तरह चल रहे थे और सिंघम रिटर्न्स में वे सफेद गंजी में ये कारनामा करते हैं। अब ये मत पूछिएगा कि सारे पुलिस वालों की गंजी एक जैसी ही सफेद क्यों होती है। क्या सब रिन या सर्फ  से ही अपनी गंजी धोते हैं। वैसे गंजी पहने पुलिस भी  स्मार्ट लगती है। ये सिंहम रिटर्न्स ने साबित कर दिया है। कहीं ऐसा न हो कि मुंबई पुलिस इस


फिल्म से प्रभावित होकर खाकी शर्ट की जगह गंजी को ही अपनी स्थायी वर्दी का हिस्सा बना ले। ये अलग से कहने की जरूरत नहीं कि इससे पुलिस की छवि और सुधरेगी।

तो प्रसंगवश आपको बता दिया जाए कि सिंहम रिटर्न्स की कहानी ये है कि सिंहम का बाजीराव (अजय देवगन) तबादले के बाद गोवा से  मुंबई आ गया है। जब शहर छोड़ दिया तो प्रेमिका भी बदलनी होगी। आखिर फिल्म भी चलानी है। सो मुंबई में बाजीराव की प्रेमिका है अवनी (करीना कपूर) जिसकी एक खासियत ये है कि वो नाश्ते में इतना खाती है कि बाजीराव की जेब काफी ढीली हो जाती है। और हां अवनी बाजीराव के स्टाइल में एक अदना से टीवी चैनल के रिपोर्टर की ठुकाई भी कर देती हैं और लेडी सिंहम का खिताब पाती है। अब आइए खलनायक पर। ये भूमिका अमोल गुप्ते ने निभाई है जो एक धूर्त बाबा बने हैं जो प्रवचन के साथ साथ कालेधन का कारोबार भी करते हैं। ये अलग से कहने की जरूरत नहीं कि अमोल गुप्ते की भूमिका अकेली ऐसी चीज है जो इसे सिंहम से कुछ हद तक अलग करती है। अनुपम खेर ने एक ईमानदार नेता की भूमिका निभाई है। इस तरह नेता के चरित्र को इस फिल्म में कुछ उज्ज्वल किया गया है और बाबा या बाबाओं को खलनायकत्व सौंप गया है। इस फिल्म में बाजीराव हवा में उड़ता है और उड़ते उड़ते ऐसे ऐसे एक्शन करता है कि सुपरमैन से लेकर आयरनमैन तक शर्मिंदा हो जाए। मुंबई फिल्म की छवि को सेकूलर दिखाने के लिए इस तरह के दृश्य डाले गए हैं कि माहिम के दरगाह में उसकी बड़ी आस्था है। तो इस तरह सेकूलरिज्म भी इस फिल्म में है। रोहित शेट्टी को बॉक्स ऑफिस पर धन बटोरने की एक कुंजी मिल गई है तो वे इसे क्यों छोड़ेंगे। हो सकता है कि सिंहम रिटर्न्स पार्ट टू भी बन जाए।

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