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कटहल और बल्ब PDF Print E-mail
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Tuesday, 12 August 2014 11:29

जनसत्ता 12 अगस्त, 2014 : कानून-व्यवस्था से संबंधित बहसों में कुछ तथ्य बार-बार रेखांकित हुए हैं कि हमारे देश में आबादी के अनुपात में पुलिसकर्मियों की उपलब्धता जरूरत से बहुत कम है। फिर पुलिस महकमे में बहुत-से स्वीकृत पदों पर समय से नियुक्ति नहीं हो पाती, काफी सारे पद खाली रहते हैं। उपलब्ध पुलिस बल का एक खासा हिस्सा वीआइपी सुरक्षा में तैनात रहता है। जहां आम लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल का हमेशा टोटा रहता हो, वहां एक पूर्व सांसद के निवास से बल्ब-चोरी की जांच और संभावित चोर की तलाश में पुलिस का जुटना क्या बताता है! यही कि हम ऐसी व्यवस्था में जी रहे हैं जहां सियासी रसूख वाले लोगों की हर बात की फिक्र की जाती है, चाहे वह कितनी मामूली क्यों न हो। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था है या सामंती? गौरतलब है कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के कोकराझार के पूर्व सांसद सानसुमा बिस्वमुतियारी ने पिछले दिनों एफआइआर दर्ज कराई कि फिरोजशाह रोड स्थित उनके सरकारी आवास से एक बल्ब चोरी चला गया है। चंूकि दिल्ली पुलिस को निर्देश है कि वह हरेक शिकायत दर्ज करे, इसलिए यह जानते हुए कि यह बहुत मामूली घटना है, उसने एफआइआर दर्ज कर ली। फिर चोर की तलाश में भी जुट गई। बिस्वमुतियारी अब सांसद नहीं हैं, फिर भी सरकारी बंगले में जमे हुए हैं। उन्हें न इस तरह सरकारी आवास का लाभ उठाने में कोई हर्ज दिखता है, न इसमें कि एक नजरअंदाज कर देने लायक बात के लिए पुलिस को जहमत उठाने के लिए क्यों मजबूर करें! सांसद-निवास पर नौकर, माली और पहरेदार हर वक्त मौजूद रहते हैं। वे क्या कर रहे थे? अगर बल्ब निवास के भीतर से चोरी गया होता, तो एकबारगी उसे सुरक्षा का सवाल बनाया जा सकता था। पर चोरी गया बल्ब गेट पर लगा था। दिलचस्प है कि गेट पर लगा दूसरा बल्ब चोरी नहीं हुआ।

खुद के विशिष्ट व्यक्ति होने का फायदा उठा कर पुलिस से अनावश्यक काम लेने का यह अकेला मामला नहीं है। कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश का पुलिस महकमा एक मंत्री की भैंसों का पता


लगाने में हलाकान था। जून में जनता दल (एकी) के राज्यसभा सदस्य महेंद्र प्रसाद ने एफआइआर दर्ज कराई थी कि उनके तुगलक रोड स्थित सरकारी बंगले से कटहल चोरी हो गया। हर साल हजारों बच्चे गुम हो जाते हैं और इसमें दिल्ली का आंकड़ा काफी ऊपर है। बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में पुलिस की निष्क्रियता का सवाल उठने पर हर बार इस महकमे का टका सा जवाब होता है कि उसके पास इतने आदमी नहीं हैं कि हर जगह नजर रख सकें, लोग खुद अपने बच्चों पर नजर क्यों नहीं रखते! लेकिन कटहल-चोरी के इस मामले को दिल्ली पुलिस ने कितनी गंभीरता से लिया इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दो टीमें लगाई गर्इं, एक फोरेंसिक जांच विभाग की और दूसरी अपराध जांच विभाग की। इस मामले में भी चोरी घर के भीतर से नहीं हुई थी, कटहल अहाते में लगे पेड़ से चोरी हुआ था। शिकायतकर्ता सांसद ने भी इसे सुरक्षा का मामला नहीं बनाया। फिर भी पुलिस एक कटहल के पीछे पड़ी रही और अब बल्ब के पीछे पड़ी है तो शायद इसीलिए कि वह एक सांसद और एक पूर्व सांसद की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहती। सांसदों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे जन-समस्याओं और राष्ट्रीय सवालों को उठाएंगे। मगर जो लोग पुलिस को ऐसी क्षुद्र जिम्मेदारी सौंपने में कोई संकोच नहीं करते, उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है! 


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