मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
सादगी की मिसाल PDF Print E-mail
User Rating: / 1
PoorBest 
Wednesday, 06 August 2014 11:31

जनसत्ता 6 अगस्त, 2014 : फिजूलखर्ची, आडंबरपूर्ण जीवन-शैली, लालबत्ती गाड़ियों के इस्तेमाल और आम नागरिकों से खुद को अलग दिखाने की प्रवृत्ति पर अंगुलियां उठती रही हैं, मगर हमारे राजनीतिक इस आलोचना से बेपरवाह नजर आते हैं। ऐसे में उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू का हवाई अड्डे पर सामान्य यात्री की तरह कतार में खड़े होकर सुरक्षा-जांच के लिए प्रस्तुत होना और फिर बस में बैठ कर विमान तक जाना एक प्रेरक घटना है। नियम के मुताबिक मंत्री भारत के किसी भी हवाई अड््डे पर विमान तक अपनी गाड़ी ले जा सकते हैं। यहां तक कि सांसदों के लिए भी हवाई अड्डे पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। विमान में चढ़ने से पहले हवाई अड्डे का विशेष अधिकारी उनकी देखभाल के लिए तैनात रहता है और उन्हें चाय-नाश्ता मुफ्त दिया जाता है। जब तक वे सवार नहीं हो जाते, विमान उड़ान नहीं भरता। यूपीए सरकार के समय पिछली जनवरी में इन सुविधाओं को निजी विमानों में भी लागू करने का गुपचुप निर्देश जारी हो गया था। कई सांसद लगातार शिकायत करते आ रहे थे कि निजी विमान कंपनियां उनका समुचित खयाल नहीं रखती हैं। यहां तक कि उड़ान में देरी होने पर भी उनके साथ सामान्य यात्रियों की तरह व्यवहार किया जाता है। सरकार ने उनकी शिकायतों को तो तरजीह दी, मगर आम मुसाफिरों की सुविधाओं पर गौर नहीं किया गया।

सांसदों और मंत्रियों को हवाई अड्डों पर विशेष सुविधाएं क्यों मिलनी चाहिए? हवाई अड्डों पर यों ही सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम होता है, वहां प्रवेश के बाद मंत्रियों और सांसदों को वैसा खतरा नहीं रह जाता, जैसा बाहर माना जा सकता है। फिर अलग से आवभगत और विशेष वाहन में उन्हें हवाई जहाज तक ले जाने का नियम क्यों होना चाहिए? उड्डयन मंत्री गजपति राजू ने आम लोगों के साथ कतार में खड़े होकर जांच कराई और फिर बस में हवाई जहाज तक गए तो इससे भी यही जाहिर हुआ कि हवाई अड्डे पर सुरक्षा कोई बड़ा मसला नहीं


है। जरूरत है तो सिर्फ राजनीतिकों के खुद को खास समझने और दिखाने की मानसिकता से बाहर आने की। सुरक्षा के नाम पर सुविधाओं को अपने तक समेट लेने की उनकी प्रवृत्ति ने जहां अनावश्यक रूप से सरकारी खर्च बढ़ाया है, वहीं सामान्य लोगों को यह सारा तामझाम डराता है। मंत्रियों-सांसदों की सुरक्षा का खयाल रखा जाना जरूरी है, पर इस तकाजे की मर्यादाएं भी हैं। उनकी मौजूदगी अपने रौब से आतंकित करने वाली नहीं होनी चाहिए। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जब उसके मंत्रियों ने लालबत्ती की गाड़ी लेने से इनकार किया तो केंद्र और कुछ राज्यों में कई नेताओं ने भी वैसी पहल की। मगर यह सिलसिला नहीं बन पाया। तब के पेट्रोलियम मंत्री ने एक दिन मैट्रो में सफर करके तेल बचाने की मुहिम शुरू की, मगर वह एक प्रतीकात्मक कदम ही साबित हुआ। सरकारी विभागों की पेट्रोल की फिजूलखर्ची पर कोई लगाम नहीं लगी। गजपति राजू की पारिवारिक पृष्ठभूमि एक पूर्व राजघराने की है, पर उनका व्यवहार दूसरे बहुत-से राजनीतिकों से कहीं ज्यादा लोकतांत्रिक है। उन्होंने सादगी का उदाहरण पेश किया है। पर उन्हें यह भी देखना चाहिए कि सादगी और किफायतशारी उनके मंत्रालय की कार्य-संस्कृ ति का हिस्सा कैसे बन सकती है।  


फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta 


आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?