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सानिया के बहाने PDF Print E-mail
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Saturday, 26 July 2014 12:33

जनसत्ता 26 जुलाई, 2014 : तेलंगाना के एक भाजपा विधायक के सानिया मिर्जा के बारे में दिए बयान से यों तो पार्टी ने पल्ला झाड़ लिया है, पर इससे बात खत्म नहीं हो जाती। पाकिस्तान-कार्ड खेलना और इस तरह किसी मामले को सांप्रदायिक रंग देना भाजपा समेत संघ परिवार की फितरत रही है। चाहे मोदी का विरोध करने वालों को पाकिस्तान चले जाने की हिदायत देने वाला गिरिराज सिंह का बयान हो या साहित्यकार यूआर अनंतमूर्ति को कराची का टिकट पेश करना, या न्यू महाराष्ट्र सदन के वाकये पर लोकसभा में चर्चा के दौरान भाजपा के एक सांसद का अध्यक्ष के आसन के समीप आकर कहना कि यह हिंदुस्तान है, पाकिस्तान नहीं, इस तरह की घटनाएं एक खास मानसिकता से उपजती हैं। पार्टी के विधायक के लक्ष्मण ने कहा कि सानिया मिर्जा पाकिस्तान की बहू हैं, इसलिए तेलंगाना सरकार को उन्हें राज्य का ब्रांड एंबेसडर नहीं बनाना चाहिए। लक्ष्मण ने यह भी कहा कि सानिया का जन्म मुंबई में हुआ था; उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाने का फैसला चंद्रशेखर राव सरकार ने महज इसलिए किया कि वह ग्रेटर हैदराबाद के नगर निगम चुनावों के मद््देनजर अल्पसंख्यकों को रिझाना चाहती है। इस तरह के लक्ष्मण पाकिस्तान का पत्ता चलने के साथ ही मुसलिम पहलू जोड़ने से भी बाज नहीं आए। उनका बयान सिरे से आपत्तिजनक है। 

गुजरात ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने का मकसद बता कर अमिताभ बच्चन को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया हुआ है। तब भाजपा के किसी नेता ने यह सवाल नहीं उठाया कि बच्चन का जन्म गुजरात से बाहर हुआ था, या उन्होंने इससे पहले गुजरात के लिए खास क्या किया। भाजपा की मध्यप्रदेश सरकार ने हाल में माधुरी दीक्षित को अपने राज्य का ब्रांड एंबेसडर घोषित किया, जिन्होंने अमेरिका में विवाह किया, एक अनिवासी भारतीय से। सानिया मिर्जा ने पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी की। पर इससे वे राज्य की नुमाइंदगी करने का हक कैसे खो देती हैं? सानिया हैदराबाद में रहती हैं और इस शहर से उनके परिवार का तीन-चार पीढ़ियों से नाता रहा है। फिर तेलंगाना सरकार को यह अधिकार है कि वह जिसे चाहे अपना ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करे। चंद्रशेखर राव ने सानिया को चुना, तो इसमें गलत


क्या है। बल्कि यह कई तरह से उपयुक्त निर्णय है। सानिया ने टेनिस खिलाड़ी के तौर पर दुनिया भर में भारत का मान बढ़ाया है; उनकी उपलब्धियां बेमिसाल हैं। 

अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से विभूषित सानिया पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने दो बार ग्रैंड स्लैम्स खिताब जीता। वर्ष 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने दो स्वर्णपदक हासिल किए। इसके अलावा एशियाई और अफ्रीकी-एशियाई मुकाबलों में भी उन्हें कई स्वर्ण पदक मिले। फिर भी भाजपा के एक नेता को इस सब में कोई गौरव नहीं दिखता तो शायद इसीलिए कि राष्ट्र को लेकर उन्हें जो राजनीतिक दीक्षा मिली है वह एक खास संकीर्णता से ग्रसित है। इसी की झलक गोवा के सहकारिता मंत्री दीपक धावलीकर के बयान में भी दिखती है। धावलीकर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। क्या वे कहना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री, उनके मंत्रियों और भाजपा के सांसदों ने संविधान की रक्षा की जो शपथ ली है, उससे मुकर जाना चाहिए? खुद धावलीकर ने यह शपथ क्यों ली? सानिया मिर्जा की बाबत लक्ष्मण के बयान की चौतरफा निंदा हुई, भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी इस बयान को आपत्तिजनक करार दिया। लालकृष्ण आडवाणी और शाहनवाज हुसैन ने न्यू महाराष्ट्र सदन में शिवसेना सांसदों की बदसलूकी की आलोचना की। पर सवाल यह है कि भाजपा जिस संकीर्ण सोच को पालती-पोसती आई है उससे कब उबरेगी?


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