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Thursday, 24 July 2014 11:41

महेंद्र राजा जैन

जनसत्ता 24 जुलाई, 2014 : हाल ही में फीफा विश्वकप फुटबॉल मैचों के दौरान ब्राजील से साथ-साथ दुनिया भर में इसकी धूम रही। भारतीय मीडिया भी इससे अछूता नहीं रहा। चूंकि फुटबॉल ब्राजील का राष्ट्रीय खेल है और ब्राजील ने इस खेल के क्षेत्र में कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं और इस वर्ष विश्वकप प्रतियोगिता भी ब्राजील में हुई, इसलिए इस देश का नाम खूब चर्चा में रहा। लेकिन ब्राजील की प्रसिद्धि केवल फुटबॉल के कारण ही नहीं है। दुनिया का सबसे बड़ा और शायद सबसे पुराना और बड़ा कार्निवाल भी ब्राजील की ही देन है, जिसके लिए हर साल काफी पहले से ही से तैयारियां होने लगती हैं और एक-एक फ्लोट तैयार करने में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं। ब्राजील का यह कार्निवाल देखने के लिए दुनिया भर से प्रति वर्ष लाखों लोग पहुंचते हैं। इसके लिए महीनों पहले से टिकट और होटल आरक्षित करा लिए जाते हैं।

इसके अलावा, साहित्य, खासकर दक्षिण अमेरिकी साहित्य के क्षेत्र में भी ब्राजील कुछ कम नहीं है, भले ही भारत में या कहा जाए हिंदी में ब्राजील के साहित्य के संबंध में कुछ पढ़ने-सुनने में नहीं आता। पिछले ही महीने ‘ब्राजीलियन साहित्य समारोह’ आयोजित किया गया था, जिसके उद्घाटन के लिए ब्राजील के ब्रिटेन स्थित राजदूत को विशेष रूप से बुलाया गया था। समारोह में उन्होंने दक्षिण अमेरिकी साहित्य की चर्चा करते हुए इस बात पर कुछ ईर्ष्या-सी प्रकट की कि अभी तक ब्राजील के कुछ जाने-माने क्लासिक लेखकों की कृतियों के अंग्रेजी में अनुवाद उपलब्ध नहीं है, मसलन जोकिम मारिया मचाडो डि आसिस (1839-1908) या ग्रेसिलियानो रामोस (1892-1953)। उनकी यह शिकायत वाजिब कही जा सकती है, क्योंकि वहां आने के कुछ ही दिन पहले वे अर्जेंटीना के लंदन स्थित दूतावास में अर्जेंटीना के जाने-माने लेखक जोर्गे लुई बोर्जेस की संपूर्ण कृतियों का अंग्रेजी अनुवाद देख चुके थे। दक्षिण अमेरिकी साहित्य में ब्राजील का अच्छा-खासा स्थान है और यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इस वर्ष के विश्वकप के लिए ब्राजील का चुनाव कराने में वहां अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त लेखक पाउलो कोल्हो (जिनके उपन्यास ‘अल्केमिस्ट’ का दुनिया भर की पचास से अधिक भाषाओं में अनुवाद होकर अब तक एक करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं) की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। ब्राजील के आधुनिक लेखकों में पाउलो कोल्हो का नाम उसी प्रकार लिया जाता है, जिस प्रकार फुटबॉल के क्षेत्र में वहीं के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त खिलाड़ी पेले का।

2007 में इस वर्ष के विश्वकप के लिए ब्राजील का जो प्रतिनिधिमंडल फीफा के जूरिख (स्विट्जरलैंड) स्थित मुख्यालय में ब्राजील का दावा पेश करने गया था, उसमें पाउलो कोल्हो भी शामिल थे। ब्राजील के दावे के प्रमुख प्रस्तावकों के


रूप में उस समय कोल्हो का चित्र फीफा के अध्यक्ष सेप ब्लेटर के साथ लिया गया था। यह भी अपने आप में बहुत बड़े सम्मान की बात थी। उस समय कोल्हो ने कहा था कि उन्होंने 2006 में जर्मनी में विश्वकप के मैच देखे थे और यह भी देखा कि उसके परिणामस्वरूप किस प्रकार पूरा जर्मनी बदल गया। अगर 2014 के विश्वकप के लिए ब्राजील का दावा स्वीकार किया जाता है तो मेरे देश की भी तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। उनके कहने का आशय था कि ब्राजील में जो भी संसाधन उपलब्ध हैं, सभी पूरी तरह विश्वकप की तैयारी में झोंक दिए जाएंगे। और जब ब्राजील का दावा स्वीकार कर लिया गया तो वहां के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा के साथ कोल्हो भी फीफा का आभार प्रकट करने स्विट्जरलैंड गए थे।

उस समय कोल्हो ने ब्राजील के लोगों के फुटबॉल प्रेम के संबंध में जो एक वाक्य कहा था, वह फुटबाल के क्षेत्र में आज भी ब्राजील के प्रेम का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने कहा था- ‘मैंने ब्राजील में लोगों को एक मैच के संबंध में पांच वर्ष तक बहस करते देखा है, पर किसी सेक्स स्कैंडल के संबंध में पांच घंटे भी नहीं, जैसा कि यूरोपीय देशों में आमतौर पर देखा जाता है कि वर्षों तक किसी-किसी इस तरह के मामले पर केवल चर्चा ही नहीं होती, बल्कि उसके संबंध में किताबें भी छपती रहती हैं। लेकिन ब्राजील ही नहीं दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों के लिए कोल्हो की यह घोषणा बम-विस्फोट के ही समान थी कि हालांकि उनके पास विश्वकप के दो टिकट हैं, पर वे कोई भी मैच देखने नहीं जाएंगे। यह बात उन्होंने विश्वकप प्रतियोगिता शुरू होने के कुछ ही दिन पहले अपने नए उपन्यास ‘एडल्टरी’ के विमोचन के मौके पर एक फ्रांसीसी पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार में कही थी।


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