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धोती विवाद: ड्रेस कोड के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका PDF Print E-mail
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Thursday, 17 July 2014 01:09

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चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय ने आज अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह विभिन्न क्लबों का नियमन करने और उनके द्वारा लगाए गए ड्रेस कोड पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका को किसी अन्य पीठ के सामने रखे।

टीएनसीए क्लब में धोती पहने एक न्यायाधीश को प्रवेश नहीं दिए जाने की पृष्ठभूमि में यह याचिका दायर की गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश के. अग्निहोत्री और न्यायमूर्ति एम. एम. सुन्दरेश की पहली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए जब जनहित याचिका आई तो उन्होंने अपनी रजिस्ट्री को आदेश दिया कि इस याचिका को एक ऐसी पीठ के समक्ष रखा जाए जिसमें न्यायमूर्ति सुन्दरेश सदस्य नहीं हैं।

इससे पहले कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने याचिका दायर करने वाले के वकील से सवाल किया था कि यह याचिका किस आधार पर स्वीकार की जाए


और कहा था कि अदालत क्लबों को निर्देश नहीं दे सकती है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कैसे ड्रेस कोड देश के संविधान का उल्लंघन करता है।

वकील ने अपने जवाब में कहा कि 11 जुलाई को हुई इस घटना में अदालत के वर्तमान न्यायाधीश (न्यायमूर्ति डी. हरीपरांथमन) को महज धोती पहने होने के आधार पर पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टीएनसीए क्लब में नहीं जाने दिया गया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह कोई सार्वजनिक समारोह नहीं था और न्यायाधीश वहां आमंत्रण पर गए थे। उन्होंने बाद में कहा कि सांस्कृतिक वस्त्र अलग मामला है।

वकील ने अदालत को बताया कि महज धोती पहने होने के आधार पर प्रवेश नहीं देना गलत है। उन्होंने कहा कि किसी भी आधार पर देश में भेदभाव किया जाना संविधान के विरुद्ध है।

(भाषा)

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