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ख्वाब का खिताब PDF Print E-mail
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Tuesday, 15 July 2014 11:53

जनसत्ता 15 जुलाई, 2014 : लगभग एक महीने तक चली फीफा फुटबॉल विश्वकप प्रतियोगिता के अंतिम मुकाबले में आखिरकार जर्मनी ने बाजी मारी और अर्जेंटीना को हरा कर इस खिताब पर चौबीस साल बाद कब्जा जमाने में कामयाब रहा। लेकिन खेल के लिहाज देखें तो फाइनल में दोनों टीमों ने जोरदार मुकाबला किया, जो इस खेल की एक शोभा के तौर पर स्थापित हो चुका है और यही इसके दर्शकों को दीवाना बनाता है। निर्धारित समय में दोनों टीमों के हमले और जवाबी हमले की शानदार गति के बावजूद कोई गोल नहीं हो पाया और मुकाबला बराबरी का रहा। फैसला अतिरिक्त समय में हो सका। दूसरी ओर, कई बार चैंपियन रहे और अपने जादुई खेल से हमेशा दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को लुभाते आए ब्राजील को फाइनल में उतरने का मौका मिलना तो दूर, वह तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में भी नीदरलैंड से हार गया। उसके लिए सबसे सदमे की बात यह रही कि जर्मनी ने उसे सेमी फाइनल में सात-एक से रौंद दिया। जिन शीर्ष चार टीमों में नीदरलैंड से जो उम्मीद की गई थी, उसे पूरा करने में उसे कुछ हद तक कामयाबी मिली। जो लोग फुटबॉल के मैदान में जर्मनी और अर्जेंटीना की पूर्व क्षमताओं और प्रदर्शन से परिचित रहे हैं, वे फाइनल में इन दोनों टीमों के पहुंचने से हैरान नहीं हुए। पश्चिमी और पूर्वी जर्मनी के एकीकरण के बाद जर्मनी को चौथी बार फुटबॉल विश्वकप का खिताब हासिल करने में करीब ढाई दशक लग गए। यह दिलचस्प है कि इससे पहले जर्मनी ने आखिरी बार जब यह खिताब जीता था, तब भी उसका मुकाबला अर्जेंटीना से ही था।

इस विश्वकप के शुरुआती दौर में कुछ रोचक नतीजे आए। सबसे ज्यादा हैरानी लोगों को इस बात पर हुई कि इटली, स्पेन और इंग्लैंड जैसी विश्वकप जीत चुकीं टीमें पहले ही दौर में बाहर हो गर्इं। इटली, फ्रांस और जापान जैसी दिग्गज मानी जाने वाली टीमों की भी कोई खास उपस्थिति नहीं बनी रह सकी। वहीं कोलंबिया और कोस्टारिका जैसी बेहद कमजोर मानी जाने वाली टीमों ने अपने


बेहतरीन खेल के बूते क्वार्टर फाइनल तक में पहुंच कर मुकाबला किया। गौरतलब है कि अभी तक सिर्फ आठ टीमों की झोली में विश्वकप का खिताब आ सका है। जाहिर है, दावे चाहे जो हों, लेकिन मैदान में एक खास स्तर तक पहुंचा हुआ प्रदर्शन ही किसी टीम को विजेता बना सकता है। फीफा विश्व कप का बुखार भारत में भी कम नहीं रहा, इस दौरान हुए क्रिकेट मैचों की खबरें फीकी पड़ गर्इं। लेकिन फुटबॉल की दुनिया में भारत की क्या जगह है यह इसी से समझा जा सकता है कि उसे विश्वकप प्रतियोगिता में भाग लेने तक का मौका नहीं मिल पाया। कभी हॉकी में अग्रणी रहा भारत अब इसमें भी पिछड़ता गया है। जब भी फुटबॉल या हॉकी जैसे खेल में भारत की दुर्दशा पर सवाल उठाए जाते हैं, तो धन कमी को सबसे बड़ी ढाल के रूप में पेश कर दिया जाता है। जबकि क्रिकेट पर जिस तरह पैसा बहाया जाता है वह किसी से छिपा नहीं है। बहरहाल, फीफा विश्वकप जैसे भव्य और खर्चीले आयोजनों के बरक्स जनसरोकारों के सवाल भी उठते रहे हैं। विश्व कप शुरू होने के ऐन पहले तक ब्राजील में विरोध-प्रदर्शन होते रहे। लेकिन दुनिया के अन्य देशों के साथ खुद ब्राजील के लिए एक खेल के रूप में फुटबॉल का जो महत्त्व है, उसे नजरअंदाज करना शायद मुमकिन नहीं है।


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