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सरकार को पत्र लिख कर नाखुशी जताई थी न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा ने PDF Print E-mail
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Friday, 04 July 2014 10:10

नई दिल्ली। पूर्व सॉलिसीटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम मामले पर केंद्र सरकार के रवैए के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करने से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आरएम लोढ़ा ने केंद्रीय विधि मंत्री को पत्र लिखकर अपनी असहमति जताई थी। दो दिन पहले एक कार्यक्रम में न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा था कि सुब्रह्मण्यम का नाम सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के पैनल में शामिल न करने का सरकार का फैसला एकतरफा था। यह सही नहीं था और अफसोस है कि इस मामले में उनसे राय तक नहीं ली गई। सूत्रों के अनुसार, जिस समय सरकार ने सुब्रह्मण्यम का नाम नामंजूर करने का फैसला किया, न्यायमूर्ति लोढ़ा देश में नहीं थे।


लेकिन इससे पहले न्यायमूर्ति लोढ़ा ने 30 जून को विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद को एक पत्र लिखकर इस प्रकरण पर अपनी असहमति जताई थी। अपने पत्र में प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि भविष्य में सरकार को इस तरह एकतरफा पृथक्करण से बचना चाहिए। एक पन्ने के पत्र में न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा कि मेरी जानकारी और रजामंदी के बिना इस प्रकार नाम अलग किए जाने के प्रस्ताव का मैं समर्थन नहीं करता, भविष्य में कार्यपालिका इस तरह एकतरफा नाम अलग न करे।

उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, प्रसाद के दफ्तर को यह पत्र बुधवार को मिला था और अब उन्हें मंत्री के निर्देशों का इंतजार है।

अपना असंतोष प्रकट  बाकी पेज 8 पर  करते हुए न्यायमूर्ति लोढ़ा ने लिखा कि आपने चार जजों के लिए प्रस्तावित नामों से गोपाल सुब्रह्मण्यम का नाम एकतरफा तौर पर अलग कर दिया, जिन्होंने खुद अपना नाम वापस ले लिया है। उन्होंने नाम वापसी को अपनी मर्जी बताया है। मेरे पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है।

पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जजों के नियुक्ति के लिए चार नामों की सिफारिश की थी। इनमें कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण मिश्रा, ओडिशा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आदर्शकुमार गोयल, वरिष्ठ वकील रोहिंटन नरीमन और सुब्रह्मण्यम का नाम था।    

याद रहे, मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश के बयान के बाद सरकार ने कहा था कि न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए सुब्रह्मण्यम के मामले को इसलिए नहीं आगे बढ़ाया गया कि उन्होंने खुद सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान अपना नाम वापस ले लिया था।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने न्यायाधीशों के तौर पर नियुक्ति के लिए चार नाम भेजे थे। मानक प्रक्रिया के तौर पर सभी चारों मामलों में सत्यापन किया गया। इनमें से तीन मामले सही थे। लेकिन सुब्रह्मण्यम के मामले को पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम को वापस भेज दिया गया। इस बीच उन्होंने खुद अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। उनकी उम्मीदवारी समाप्त होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ा।

इससे पहले न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा था कि कार्यपालिका ने एकपक्षीय तरीके से सुब्रह्मण्यम के नाम को तीन अन्य से अलग किया जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात को समझने में विफल हूं कि उच्च संवैधानिक पद पर नियुक्ति के मामले से कितने लापरवाह तरीके से निपटा गया।’


उन्होंने कहा, मैंने जिस पहली बात पर आपत्ति जताई, वह है सुब्रह्मण्यम के प्रस्ताव को तीन अन्य प्रस्तावों से कार्यपालिका द्वारा मेरी जानकारी और सहमति के बिना  एकतरफा तरीके से अलग किया जाना। यह सही नहीं था।


 इस बीच चेन्नई से मिली खबर के अनुसार, गोपाल सुब्रह्मण्यम का नाम खारिज करने के लिए केंद्र की आलोचना करते हुए द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि ने आश्चर्य जताया कि क्या सोहराबुद्दीन मामले में पूर्व वरिष्ठ विधि अधिकारी की भूमिका उनका नाम खारिज करने के पीछे का कारण थी। करुणानिधि ने कहा, गोपाल सुब्रह्मण्यम सोहराबुद्दीन मामले में न्याय मित्र थे।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के ‘सलाहकार’ अमित शाह को बाद में सीबीआइ ने उस मामले में गिरफ्तार किया था। करुणानिधि ने एक वक्तव्य में कहा, क्या यह गोपाल सुब्रह्मण्यम का नाम खारिज किए जाने के पीछे का कारण है। उन्होंने कहा, जो भी कारण हो तमिलनाडु ने एक अवसर खोया है। तमिलनाडु के एक व्यक्ति के शीर्ष अदालत के न्यायाधीश बनने का अवसर खोने को खेदजनक बताते हुए द्रमुक प्रमुख ने कहा, वे न सिर्फ तमिलनाडु के हैं, बल्कि अनुभवी वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं। उन्होंने आठ साल तक प्रभावी तरीके से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल और बाद में सॉलिसीटर जनरल के तौर पर काम किया।


केरल के गृहमंत्री चेन्निथला ने कहा कि हम सभी अंतरराष्ट्रीय एजंसियों से मदद की अपील कर रहे हैं। केरल भाजपा के प्रमुख वी मुरलीधरन ने भी नर्सों की सुरक्षित वापसी की मांग करते हुए सुषमा स्वराज से मुलाकात की।

सुषमा से मुलाकात के बाद केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने आज कहा कि संकटग्रस्त इराक में आइएसआइएस के नियंत्रण वाले तिकरित में जिन 46 भारतीय नर्सों को उनके अस्पताल से बाहर निकाल लिया गया है, वे सुरक्षित हैं और चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के अधिकारी अपनी तरफ से ईमानदार प्रयास कर रहे हैं। मुलाकात के दौरान चांडी के साथ उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी रमेश चेन्नीथला, केएम मणि और एम अली भी थे। ये सभी अगले दो-तीन दिन तक दिल्ली में ठहरेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्सें तिकरित के अस्पताल से निकल चुकी हैं और हमें कुछ समय बाद विस्तार से उनके बारे में सूचना मिलने की आशा है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे आइएसआइएस के लड़ाकों के कब्जे में हैं या नहीं। चांडी से पूछा गया कि नर्सों को अस्पताल से बाहर निकालने के लिए क्या राज्य सरकार से परामर्श किया गया तो उन्होंने कहा कि हम विस्तार में नहीं जा रहे। कुछ सीमाएं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय दूतावास के अधिकारी रेड क्रीसेंट के अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उस क्षेत्र में उनकी बहुत ही सीमित गतिविधियां हैं। वे (रेड क्रीसेंट) उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने की स्थिति में नहीं हैं।

(ईएनएस)


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