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इराक में सैन्य कार्रवाई को तैयार ओबामा PDF Print E-mail
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Friday, 20 June 2014 08:55

वाशिंगटन/बगदाद। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका इराक में लक्षित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है।

altवाशिंगटन/बगदाद। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका इराक में लक्षित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। इतना ही नहीं अमेरिका वहां बढ़ते चरमपंथी आतंकवादियों के खतरे से लड़ने में मदद भी करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका इराक में कम से कम 300 सैन्य सलाहकार भेजने को तैयार है। ओबामा इराक में अमेरिकी अभियानों पर ताजा स्थिति से अवगत करा रहे थे। 

ओबामा ने कहा कि अमेरिका बगदाद और उत्तरी इराक में संयुक्त अभियान केंद्र का गठन कर रहा है। हालांकि ओबामा ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी युद्धक सेना इराक से वापसी नहीं करेगी। ओबामा का कहना है कि अमेरिका ने बगदाद में आतंकवाद के खतरों की बेहतर समझ के लिए इराक में अपनी खुफिया, सतर्कता और टोही अभियानों में वृद्धि कर दी है।

अमेरिका ने बगदाद में आतंक फैला रहे सुन्नी आतंकवादियों पर हवाई हमले करने के बारे में गुरुवार को विचार विमर्श किया। साथ ही अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने इराक के संकट के लिए प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी पर निशाना साधते हुए उनकी नीतियों को सांप्रदायिक बताया। सुन्नी चरमपंथियों के हमलों की वजह से एक पूरा प्रांत और तीन अन्य प्रांतों के हिस्से सरकार के कब्जे से बाहर हो गए हैं और इससे इराक के वजूद पर ही खतरा पैदा हो सकता है। उधर, इराकी फौजों ने गुरुवार को देश की सबसे बड़ी बेइजी रिफाइनरी को आतंकवादियों के कब्जे से मुक्त करा लिया है।

आतंकवादियों के तेजी से बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है और संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यह संकट इराक के लिए घातक है। पिछले नौ दिन के संघर्ष में हजारों इराकी विस्थापित हो गए हैं और बड़ी संख्या में मारे गए हैं। दर्जनों भारतीयों और तुर्क नागरिकों को अगवा कर लिया गया है। राष्ट्रपति बराक ओबामा इराक में लगातार आगे बढ़ रहे आतंकवादियों पर हवाई हमले करने के बगदाद के अनुरोध पर विचार कर रहे हैं लेकिन साथ ही अमेरिकी अधिकारी मलिकी के प्रति अपनी नाराजगी नहीं छिपा रहे।

वाइट हाउस ने कहा कि अमेरिकी उप राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मलिकी और अन्य इराकी अधिकारियों के साथ फोन पर हुई बातचीत में इराक में व्यापक राजनीतिक समावेश का आग्रह किया। वाइट हाउस के मुताबिक बाइडेन ने मलिकी, इराकी काउंसिल आॅफ रिप्रजेंटेटिव्स के स्पीकर ओसामा अल नुजैफी और इराकी कुर्दिस्तान रीजन के अध्यक्ष मसूद बरजानी से फोन पर हुई बातचीत में सभी इराकी समुदायों से आइएसआइएस के खतरे का जवाब देने के लिए एकजुट हो जाने व राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया।

शीर्ष स्तर के सैन्य अधिकारी जनरल मार्टिन डेंप्सी और पूर्व अमेरिकी कमांडर डेविड पैट्रायस ने भी इराकी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा।

इससे पहले, इराक के विदेश मंत्री होशयार जेबारी ने सऊदी अरब में संवाददाताओं से कहा था कि बगदाद ने वाशिंगटन से आतंकवादी संगठनों के खिलाफ हवाई हमले करने के लिए कहा है। जेबारी ने राजनीतिक समाधान की जरूरत बताई।

उधर, इराक के सरकारी सुरक्षा बलों ने देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे आइएसआइएस के लड़ाकों के साथ कड़े संघर्ष के बाद गुरुवार को फिर से रिफाइनरी पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया। इस आशय की जानकारी इराकी अफसरों ने दी। सुन्नी अरब चरमपंथियों ने बुधवार को बेइजी रिफाइनरी परिसर पर हमला कर वहां विभिन्न


तैयार उत्पादोंं के भंडारण टैंकरों में आग लगा दी थी। रिफाइनरी आतंकवादियों के कब्जे वाले मोसुल शहर के दक्षिण में स्थित है।

प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी के रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल कासिम अता ने टीवी पर कहा कि बेइजी रिफाइनरी पूरी तरह से सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है। रिफाइनरी के एक कर्मचारी और अन्य प्रत्यक्षदर्शियोंं ने बताया कि आतंकवादी पीछे हट गए हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों के जोरदार जवाबी हमले के बाद आतंकवादी परिसर से भाग गए हैं। बेइजी इराक की सबसे बड़ी रिफाइनरी है। यह देश में रिफाइनरी उत्पादों की सबसे ज्यादा आपूर्ति के लिए जिम्मेदार है। देश की कुल रिफाइनरी क्षमता में बेइजी रिफानरी का हिस्सा एक चौथाई से कुछ ज्यादा ही है और यह घरेलू उपभोग के लिए गैसोलीन, खाद्य तेल और बिजली घरों के लिए ईंधन का उत्पादन करती है। बेइजी में ज्यादा दिनों तक संघर्ष चला तो पहले से ही दिक्कतें झेल रहे इराक को बिजली की कमी और गैस की किल्लत से भी जूझना पड़ेगा।

इससे पहले आइएसआइएस ने बुधवार को रिफानरी की निगरानी चौकियोंं पर कब्जा करने के बाद वहां अपने काले झंडे लगा दिए थे। बेइजी रिफानरी के पास से गुजरे इराकी प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि उग्रवादियों ने उसके आसपास हथियारबंद चेकपोस्ट भी बना लिए थे और वहां टैंकरों में से आग की लपटें उठ रही थीं। 

अमेरिका हवाई हमले की योजना पर विचार कर रहा है लेकिन अधिकारियोंं का कहना है कि ऐसी कोई भी कार्रवाई आसन्न नहीं है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि खुफिया एजंसियां जमीन पर अपने निशानों का स्पष्ट तौर से पता नहीं लगा पा रही हैं।

 वाशिंगटन ने खाड़ी देश में एक विमानवाहक पोत को तैनात किया है और बगदाद में अपने दूतावास में सुरक्षा बढ़ाने के लिए सैन्यकर्मियों को भेजा है। अमेरिका ने 2003 में तानाशाह सद्दाम हुसैन को अपदस्थ करने के बाद सुन्नी सेना को भंग करके इराकी सुरक्षा बलों को कई साल तक प्रशिक्षण देने और उन्हें हथियार देने पर अरबों डालर खर्च किए। लेकिन नौ जून को उग्रवादियों के हमले के बाद सुरक्षा बल कमजोर दिखे। उग्रवादियों ने करीब 20 लाख जनसंख्या वाले मोसुल शहर पर तेजी से कब्जा कर लिया और उसके बाद सलाहेद्दीन, किर्कुक और दियाला प्रांतों के हिस्सों पर कब्जा कर लिया।


मलिकी पर गुस्सा

अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने इराक के संकट के लिए प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी पर निशाना साधते हुए उनकी नीतियों को सांप्रदायिक बताया। शीर्ष स्तर के सैन्य अधिकारी जनरल मार्टिन डेंप्सी और पूर्व अमेरिकी कमांडर डेविड पैट्रायस ने भी इराकी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा।


इराक की अपील

सऊदी अरब के दौरे पर गए इराक के विदेश मंत्री होशयार जेबारी ने कहा कि बगदाद ने वाशिंगटन से आतंकवादी संगठनों के खिलाफ हवाई हमले करने के लिए कहा है। जेबारी ने कहा कि हालांकि सैन्य समाधान ही काफी नहीं है। आखिर में कोई राजनीतिक हल खोजना पड़ेगा।


हमले की तैयारी

अमेरिका ने लक्षित व सटीक सैन्य कार्रवाई की अपनी मंशा का एलान कर दिया। साफ तौर पर इसका मतलब हवाई हमले से है। पर अमेरिकी खुफिया एजंसियां अभी तक जमीन पर अपने निशानों का स्पष्ट तौर से पता नहीं लगा पाई हैं। इसके मद्देनजर अमेरिका ने इराक में अपनी खुफिया, सतर्कता और टोही अभियानों में बढ़ोतरी कर दी है।

(एपी)

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