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इराक संकट: अगवा हुए सभी भारतीय सुरक्षित PDF Print E-mail
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Friday, 20 June 2014 08:44


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जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत ने गुरुवार को कहा कि हिंसाग्रस्त इराक के मोसुल शहर में अगवा हुए सभी 40 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और इराकी अधिकारियों ने उनके ठिकानों की पहचान कर ली है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पंजाब के कुछ अगवा भारतीयों के परिवार के सदस्यों से कहा- वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें दो स्थानों पर रखा गया है...एक कपास मिल और एक सरकारी इमारत।

बादल के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश बादल की मौजूदगी में विदेश मंत्री ने अगवा भारतीयों के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। सुषमा ने कहा कि सभी भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हम हर कोशिश कर रहे हैं। हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। वहां स्थिति सामान्य होते ही हम उन्हें वापस लाने की गारंटी देते हैं।

विदेश मंत्री ने इराक में फंसे सभी लोगों को सलाह दी कि वे अपने घरों से बाहर नहीं निकलें। 13 अगवा लोगों के परिवार के 23 सदस्यों के साथ बादल ने आज सुषमा से मुलाकात की जिन्होंने उन्हें सकरार की कोशिशों पर भरोसा रखने को कहा। मंत्री ने आज संकट प्रबंधन समूह की दो बैठकों की अध्यक्षता की और मुश्किल हालात से निपटने के विभिन्न विकल्पों की संभावना तलाशी। 

सरकार ने कहा है कि इराकी अधिकारियों ने अगवा भारतीयों के ठिकानों की पहचान कर ली है लेकिन फिरौती की कोई मांग अभी तक नहीं हुई है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि अपहरण में मोसुल, तिकरित और इराक के कुछ अन्य हिस्सों पर कब्जा करने वाले सुन्नी चरपमंथी संगठन आइएसआइएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) का हाथ है या नहीं। 

केंद्र सरकार ने इन्हें छुड़ाने के हरसंभव प्रयासों का दावा करते हुए कहा कि बगदाद स्थित भारतीय दूतावास इस बारे में लगातार इराकी अधिकारियों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने कहा- इराक के विदेश मंत्रालय ने हमें बताया है कि अपहृत भारतीयों को कुछ अन्य देशों के नागरिकों के साथ जहां बंधक बना कर रखा गया है, उस जगह की पहचान कर ली गई है।

अकबरूद्दीन ने उस जगह के बारे में पूछे जाने पर कोई सूचना साझा करने से इनकार करते हुए कहा- अभी मैं जगह या इराकी अधिकारियों ने हमसे जो सूचना साझा की है, उसके बारे में कुछ नहीं बता सकूंगा। इस सवाल पर कि क्या अपहृत भारतीय सुरक्षित हैं, उन्होंने कहा कि अपहरण में कोई सुरक्षा नहीं होती है। अगवा भारतीयों में से ज्यादातर पंजाब और उत्तरी भारत के अन्य क्षेत्रों से हैं और वे उत्तरी इराक के मोसुल शहर की एक निर्माण परियोजना में कार्य कर रहे थे। इस क्षेत्र पर सुन्नी चरमपंथी समूह आइएसआइएस ने कब्जा कर लिया है।

अकबरूद्दीन के मुताबिक इराकी सरकार ने भी भारतीयों के अपहरण की पुष्टि की है। प्रारंभिक सूचना इराकी रेड क्रीसेंट की जानकारी के आधार पर थी। इन 40 अपहृत भारतीयों के साथ ही चरमपंथियों के कब्जे में आए इराक के अन्य शहर तिकरित में फंसी भारत की 46 नर्सों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। इस बारे में संकट प्रबंधन समूह की दो बार बैठक हो चुकी है। इन बैठकों की अध्यक्षता विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने की। 

अकबरूद्दीन के मुताबिक और खाड़ी क्षेत्र के प्रभारी अनिल वाधवा ने भी इराकी राजदूत अहमद तहसीन अहमद बेरवारी के साथ दो बार बात की है। उन्होंने कहा कि फिरौती की कोई मांग सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों को छुड़ाने के लिए हर रास्ते, हर जरिए को तलाशा जाएगा। अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर अवसर का इस्तेमाल किया जाएगा। अपहृत और वहां फंसे भारतीयों के रिश्तेदारों की इस आशंका पर कि नियोक्ताओं द्वारा पासपोर्ट रख लिए जाने की स्थिति में उनका लौटना मुश्किल होगा, अकबरूद्दीन ने कहा कि दस्तावेज कोई मुद्दा नहीं है और बगदाद स्थित भारतीय मिशन इराक से लौटने वाले भारतीयों की मदद कर रहा है।

इससे पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी कहा कि इराक में अपहृत और फंसे सभी भारतीयों के बचाव के संबंध में हर संभव


प्रयास किए जा रहे हैं। सुषमा ने कहा- सभी प्रयास हो रहे हैं। मैं खुद उन प्रयासों को देख रही हूं। हम उनका लौटना सुनिश्चित करने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं। इस वक्त लगभग 10 हजार भारतीय इराक में हैं। सरकार चरमपंथियों के कब्जे वाले अन्य शहर तिकरित में फंसीं 46 भारतीय नर्सों के भी संपर्क में है। भारतीय दूतावास के आग्रह पर इंटरनेशनल रेड क्रीसेंट ने इन नर्सों से संपर्क किया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हिंसाग्रस्त इराकी क्षेत्रों से फंसे भारतीयों को सड़क परिवहन के जरिए निकालना कठिन है। इस सिलसिले में अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। जमीनी स्थिति का जायजा लेने व स्थानीय अधिकारियों से विचार विमर्श के बाद सर्वोत्तम विकल्प को अपनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इराक के बारे में सूचना उपलब्ध कराने के लिए चौबीसों घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्ष को 130 फोन काल आई हैं जिनमें से 15 इराक से हैं। इस बीच इराक में भारत के पूर्व दूत सुरेश रेड्डी बगदाद पहुंच गए हैं और वे इराकी अधिकारियों के साथ हालात पर चर्चा करेंगे।

सुषमा स्वराज ने बादल के साथ आए चिंतित परिजनों को सभी तरह के समर्थन का आश्वासन दिया और कहा कि सरकार उनकी शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।  सुषमा से मुलाकात के बाद बादल ने कहा कि राज्य सरकार इस संबंध में उनका खर्च वहन करने के अलावा कुछ भी नहीं कर सकती और केंद्र पर दबाव डाला कि वह उनकी सुरक्षित रिहाई के लिए तत्काल कूटनीतिक कदम उठाए। स्वराज के साथ मुलाकात के दौरान बादल के साथ शिरोमणि अकाली दल के सभी सांसद भी थे। 


कोशिशें जारी

अगवा भारतीयों को छुड़ाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अध्यक्षता में संकट प्रबंधन समूह की दो बार बैठक हो चुकी है। खाड़ी क्षेत्र के प्रभारी अनिल वाधवा ने भी इराकी राजदूत अहमद तहसीन अहमद बेरवारी के साथ दो बार बात की है। इराक में भारत के पूर्व दूत सुरेश रेड्डी बगदाद पहुंच गए हैं और वे इराकी अधिकारियों के साथ हालात पर चर्चा करेंगे।


लौटने के विकल्पों की तलाश

फिरौती की कोई मांग सामने नहीं आई है। भारतीय नागरिकों को छुड़ाने के लिए हर रास्ते, हर जरिए को तलाशा जाएगा। अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर अवसर का इस्तेमाल किया जाएगा। हिंसाग्रस्त इराकी क्षेत्रों से फंसे भारतीयों को सड़क परिवहन के जरिए निकालना कठिन है। इस सिलसिले में अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। जमीनी स्थिति का जायजा लेने व स्थानीय अधिकारियों से विचार विमर्श के बाद सर्वोत्तम विकल्प को अपनाया जाएगा।  

- सैयद अकबरूद्दीन, प्रवक्ता विदेश मंत्रालय


पंजाब में 50 परिवारों ने नियंत्रण कक्ष से संपर्क साधा

चंडीगढ़/धर्मशाला(भाषा)। पंजाब के 50 से ज्यादा परिवारों ने इराक में फंसे अपने रिश्तेदारों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए राज्य सरकार की ओर से स्थापित नियंत्रण कक्ष से संपर्क साधा है। इन परिवारों ने वहां फंसे अपने रिश्तेदारों के बारे में पूरा ब्योरा भी दिया है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि इराक के मोसुल शहर में अगवा 40 भारतीयों में से दो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के हैं। कांगड़ा के जिला उपायुक्त सी पुओल रासु ने बताया कि इन दोनों लोगों का ब्योरा दिल्ली में विदेश मंत्रालय को दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि पासु गांव के अमन कुमार और भटैड़ गांव के इंदरजीत इराक के मोसुल में तारिक नूर अलहुदा कंपनी में काम करते हैं। वहां समस्या शुरू होने के बाद से उनका अपने परिजनों से संपर्क नहीं हो पाया है। उधर केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी व तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर अगवा भारतीयों की रिहाई सुनिश्चित करने व तिकरित में फंसी नर्सों की सुरक्षित वापस ले आने की मांग की है।

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