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सुन्नी विद्रोहियों के हमले के कारण इराक की स्थिरता पर खतरा मंडराया PDF Print E-mail
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Friday, 13 June 2014 15:26

बगदाद। इराक में अलकायदा से प्रेरित उग्रवादियों के मोसुल शहर सहित देश के सुन्नी बहुल इलाके पर कब्जा करने और बगदाद की ओर कूच करने के बाद प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी की सरकार के समक्ष संकट गहरा गया है और अब तक वह कोई ठोस जवाबी कार्रवाई करने में विफल रही है । 


    वर्ष 2011 के अंत में अमेरिका की वापसी के बाद इराक के स्थिरता के लिए यह सबसे बड़ा खतरा है। इससे इराक के सुन्नियों, शिया और कुर्द क्षेत्रों में बंटने का भी खतरा मंडराने लगा है । 

    इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और लेवांट के विद्रोहियों ने कल इराक की राजधानी बगदाद की ओर कूच  किया जिनके साथ मार्च में सद्दाम हुसैन के शासन के कई समर्थक और अन्य सुन्नी असंतुष्ट भी हैं ।

     विद्रोहियों ने इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल पर कब्जा करने के बाद वहां शरिया कानून को लागू करने की घोषणा कर डाली । मंगलवार को इन्होंने मोसुल पर कब्जा कर लिया था और अन्य इलाकों की घेराबंदी कर ली थी।

    उत्तरी इराक में कुर्द सुरक्षा बलों ने सत्ता में आए खालीपन का लाभ उठाते हुए किरकुक में वायु ठिकाने और


सेना द्वारा छोड़ दी गयी चौकियों पर अपना आधिपत्य स्थापित करना शुरू कर दिया है।

    अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि बगदाद के उत्तर में स्थित सुन्नी बहुल क्षेत्र स्थित प्रमुख वायु ठिकाने से तीन विमानों से अमेरिकी नागरिकों को हटा लिया गया है जबकि जर्मनी ने भी अपने नागरिकों से जल्द से जल्द बगदाद सहित इराक के कई इलाकों को छोड़ने का आग्रह किया है।

    अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि इराक को उनके देश से अधिक सहायता की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया वे किस तरह से इराक की सहायता करना चाहते हैं। अमेरिका के एक अनाम वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वाशिंगटन इराक पर ड्रोन अभियान चलाने पर विचार कर रहा है।

    इसबीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस संकट पर बैठक की है । उधर अल मलिकी ने संसद को देश में आपातकाल लागू करने को कहा है जिससे उन्हें और उनकी शिया नेतृत्व वाली सरकार को देश को चलाने की शक्तियां मिल सकें । 

(एपी)


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