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इस हत्या के मायने PDF Print E-mail
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Saturday, 07 June 2014 09:19

जनसत्ता 7 जून, 2014 : अट्ठाईस साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर मोहसिन सादिक शेख के जीवन का जिस तरह अंत हुआ, वह स्तब्ध कर देने वाली घटना है। कुछ युवकों ने उसे सरेआम पीट-पीट कर मार डाला। खबर है कि ये युवक हिंदू राष्ट्र सेना नाम के संगठन से जुड़े हुए थे और फेसबुक पर शिवाजी और बाल ठाकरे के चित्र आपत्तिजनक ढंग से पोस्ट किए जाने से नाराज थे। लेकिन इस पोस्ट से मोहसिन का कोई लेना-देना नहीं था। जाहिर है, मोहसिन पर हमला उसकी मुसलिम पहचान के कारण हुआ। यह घटना इस बात को दर्शाती है कि असहिष्णुता किस कदर बढ़ रही है और कैसा खतरनाक रूप ले रही है। पुणे अपनी शांतिप्रियता और विविधता को सहज रूप से स्वीकार करने वाले शहर के रूप में जाना जाता रहा है। मोहसिन की हत्या ने पुणे की इस प्रतिष्ठा पर बट्टा लगाया है। अगर हमला कथित आपत्तिजनक पोस्ट डालने वाले व्यक्ति पर हुआ होता, तब भी वह निंदनीय होता। 

किसी भी व्यक्ति, समूह या संगठन को यह अधिकार नहीं है कि भावनाएं आहत होने का हवाला देकर किसी पर हमला बोल दे। यह किसी सभ्य समाज का लक्षण नहीं है। इस तरह की बर्बरता और तालिबान के सलूक में क्या फर्क है? अगर कोई टिप्पणी या सोशल मीडिया पर डाली कोई पोस्ट आपत्तिजनक मालूम पड़ती है तो इसके खिलाफ पुलिस से शिकायत की जा सकती है। फिर, जुर्म या बेगुनाही तय करने का काम कानून और अदालत का है। क्या हमलावरों को कानून का खौफ नहीं था? अपराध कर चुकने के बाद भी वे सहमे नहीं, बल्कि मोबाइल से संदेश भेजे कि ‘एक और विकेट गिर गया’। क्या वे यह मान कर चल रहे थे कि केंद्र में नई सरकार बनने के बाद, वे जो भी करें, कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता? अगर किन्हीं लोगों में ऐसी धारणा बन रही है तो अभी से इसे निर्मूल कर देना होगा। इस मामले को न्यायसंगत परिणति तक ले जाकर ही ऐसा किया जा सकता है। हिंदू राष्ट्र सेना


के प्रमुख पर पहले से कई आपराधिक मामले चल रहे हैं। उसके सहित पुलिस ने कई आरोपियों की गिरफ्तारी की है। कड़ाई से छानबीन हो तो इस संगठन की और भी करतूतें सामने आ सकती हैं। महाराष्ट्र पुलिस हिंदू राष्ट्र सेना पर पाबंदी लगाने पर विचार कर रही है। मगर शायद केंद्र की मंजूरी के बिना यह नहीं हो सकेगा। फिर, समस्या यह है कि ऐसे गुट किसी और नाम से अपनी कारगुजारियां करने लगते हैं। 

महाराष्ट्र सरकार के साथ-साथ केंद्र को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई अपनी धार्मिक या किसी और पहचान की वजह से असुरक्षित महसूस न करे। प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि यह देश सबका है और सरकार पर सभी का हक है। पर इस बात को एक भरोसे में तब्दील करना होगा। राजनाथ सिंह चुनाव प्रचार के दौरान मुसलिम धर्मगुरुओं से मिले थे और यह साफ किया था कि भाजपा से उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। अब राजनाथ सिंह गृहमंत्री हैं। उन्हें दिखाना चाहिए कि उनकी ओर से दिया गया आश्वासन हवाई नहीं था। उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों हुई बलात्कार की घटनाओं पर राज्य सरकार से जवाब तलब कर उन्होंने जैसा सख्त रवैया अख्तियार किया, वैसा ही उन्हें महाराष्ट्र के इस मामले में भी करना चाहिए। इससे यह संदेश जाएगा कि उनकी सरकार इस तरह के हमलों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।


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