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IPL-7:दौड़ में बने रहने के लिए दिल्ली का जीतना जरूरी PDF Print E-mail
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Saturday, 10 May 2014 09:30

altफ़ज़ल इमाम मल्लिक

नई दिल्ली। अपने घरेलू मैदान पर हार की हैट्रिक लगा चुकी

दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम के लिए आइपीएल में बने रहने के लिए हर मैच जीतना जरूरी है। आठ में से छह मैच गंवा कर अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर रहने वाली दिल्ली डेयरडेविल्स को शनिवार को सनराइर्जस हैदराबाद के खिलाफ फीरोजशाह कोटला मैदान पर खेलना है। जाहिर है कि लगातार तीन हार से उसके खिलाड़ियों का मनोबल भी गिरा होगा। लेकिन टीम को इससे उबर कर अपना बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा ताकि हैदराबाद के खिलाफ जीत दर्ज कर वह आइपीएल में अपने को बनाए रखे। काम कठिन है और चुनौती भरा भी लेकिन नामुमकिन नहीं।


लेकिन दिल्ली की दिक्कत यह है कि टीम अभी तक एकजुट होकर नहीं खेली है। कभी बल्लेबाज चले तो गेंदबाज नहीं है और कभी गेंदबाजी अच्छी हुई तो बल्लेबाज नहीं चल पाए। रही सही कसर क्षेत्ररक्षकों ने पूरी कर दी। छोटे से टोटल को डिफेंड करने में क्षेत्ररक्षकों की भूमिका बढ़ जाती है। लेकिन दिल्ली की टीम इस क्षेत्र में भी पिछड़ती दिखाई दे रही है। इसलिए प्लेऑफ में क्वॉलीफाई करने के लिए जरूरी है कि वह हैदराबाद के खिलाफ जीत की लय हासिल करे और उसे दूसरे मैचों में भी जारी रखे। हालांकि ऐसा करना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा क्योंकि दिल्ली की मौजूदा टीम का फॉर्म और खिलाड़ियों के प्रदर्शन अभी तक बहुत प्रभाव नहीं थोड़ सका है। 

संयुक्त अरब अमीरात चरण में खेले गए पहले पांच मैचों में से दिल्ली ने दो जीत दर्ज कर उम्मीद बढ़ाई थी लेकिन अपने घरेलू मैदान पर लगातार तीन हार से उसकी उम्मीदों को झटका लगा है और वह अंक तालिका में पिछड़ कर किसी चमत्कार का ही इंतजार कर रही है। फीरोजशाह कोटला मैदान पर राजस्थान रॉयल्स की टीम ने उसे सात विकेट से हराया था तो चेन्नई सुपरकिंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स से उसे आठ विकटों से करारी शिकस्त दी थी। जाहिर है कि यह आंकड़े टीम के पक्ष में नहीं जाते हैं और जीत की पटरी पर लौटने के लिए टीम को न सिर्फ एकजुट होकर खेलना होगा बल्कि बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण तीनों ही क्षेत्र में अपना सब कुछ दांव पर लगा देना होगा। 

दिल्ली के बल्लेबाजों ने आइपीएल के सातवें सत्र में अभी तक कोई बड़ा स्कोर नहीं खड़ा किया है। मध्यक्रम में जेपी डुमिनी ही हैं जिन्होंने अब तक एक जैसा प्रदर्शन किया है और उनके बल्ले से रन फूटे हैं। लेकिन मुरली विजय, दिनेश कातिर्क और कप्तान केविन पीटरसन ने अभी तक प्रभावहीन प्रदर्शन किया है। अंगुली की चोट की वजह से पहले तीन मैच नहीं खेलने वाले पीटरसन ने पांच पारियों में अब तक 16, नाबाद 26, 14, शून्य और छह रन बनाए हैं। यानी उनके खाते में महज 62 रन हैं। पीटरसन का यों तो कहना है कि अंगुली की चोट से वे उबर गए हैं लेकिन उनकी बल्लेबाजी से तो ऐसा लगता नहीं


है। फिर दूसरे बल्लेबाजों ने भी मायूस किया है। केदार जाधव जरूर अच्छी लय में दिख रहे हैं लेकिन वे इतना नीचे आते हैं कि उनके पास बहुत कुछ करने को रहता नहीं है। रही सही कसर दिल्ली की गेंदबाजी पूरी कर देती है। न तो मोहम्मद शमी चल पा रहे हैं और न ही शहबाज नदीम अपने अंगुलियों के जादू में बल्लेबाजों को उलझा रहे हैं। जयदेव उनादकट जरूर कुछ अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं। खास कर उन्होंने अपनी रफ्तार में सुधार किया है। दूसरी तरफ वेन पर्नेल व सिद्धार्थ कौल भी बेरंग दिख रहे हैं।

टीम के साथ दक्षिण अफ्रीका के लेग स्पिनर इमरान ताहिर जुड़े हैं। वे अभी फॉर्म में हैं। शनिवार को उनका खेलना तय माना जारहा है। अगर वे अपनी अंगुलियों का चमत्कार दिखा सकें तो दिल्ली को रोहत मिलेगी। गैरी कर्सटन ने भारतीय टीम का कोच रहते हुए टीम को शिखर पर ला खड़ा किया था लेकिन दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ कोचिंग के पहले कार्यकाल में टीम के इस तरह के प्रदर्शन से वे भी मायूस होंगे। उन्हें शायद ही टीम से इस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद रही होगी। दिल्ली हैदराबाद के खिलाफ अपना पहला मैच गंवा बैठी थी, इसका दबाव भी टीम पर रहेगा।

दूसरी तरफ गुरुवार को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ बेहतरीन जीत से हैदराबाद के हौसले बुलंद होंगे। हैदराबाद के गेंदबाजों ने चमत्कारिक प्रदर्शन कर टीम को जीत दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हैदराबाद ने सात मैचों में तीन जीत हासिल की थी और वह अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है। शनिवार को दिल्ली के खिलाफ मैच जीत कर हैदराबाद अंक तालिका में अपनी स्थिति को और बेहतर करना चाहेगा। हालांकि हैदराबाद की बल्लेबाजी इस सत्र में एक जैसी नहीं रही है। ऊपरी क्रम में शिखर धवन अभी तक प्रभावित नहीं कर सके हैं। ताबड़तोड़ करने वाले डेविड वॉर्नर भी अब तक अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके हैं। वे एकाध मैच में ही अपनी चमक बिखेर सके हैं। एरोन फिंच और डैरेन सैमी भी बहुत बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके हैं।

लेकिन ये तोबड़तोड़ करने के लिए जाने जाते हैं और अगर चल गए तो दिल्ली के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। लेकिन हैदराबाद की जीत में गेंदबाजों की भूमिका ज्यादा महत्त्वपूर्ण रही है। डेल स्टेन, भुनेश्वर कुमार, अमित मिर्शा, मोइजेज हेनरिक्स और इरफान पठान ने टूर्नामेंट मे अब तक सधी हुई गेंदबाजी की है। बल्लेबाजों की बनिस्बत गेंदबाजों ने ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया है, और इनकी बदौलत ही हैदराबाद ने मैच जीते हैं। शनिवार के मैच में भी हैदराबाद के गेंदबाजों का दबदबा दिल्ली के खिलाफ रहने की उम्मीद है। मैच शाम चार बजे से शुरू होगा। 


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