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काशी में नरेन्द्र मोदी का बेड़ा पार लगाने का बीड़ा विहिप ने उठाया PDF Print E-mail
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Thursday, 01 May 2014 10:41

altपुण्य प्रसून वाजपेयी

नरेंद्र मोदी के लिए विश्व हिंदू परिषद के प्रवीण तोगड़िया को भले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने खामोश कर दिया हो, लेकिन बनारस का सच यही है कि मोदी के लिए बनारस शहर ही नहीं बल्कि जिले की हर गली में विहिप के कार्यकर्ता ही घूम रहे हैं। और खास बात यह है कि अयोध्या आंदोलन के दौर में परिषद के जिस नेता ने 6 दिसंबर 1992 को लेकर समूची रणनीति बनाई थी, वही काशी में मोदी की जीत का मंत्र भी फूंक रहे है।


विहिप के चंपत राय को अयोध्या आंदोलन की बिसात बिछाने का ‘मास्टरमाइंड’  माना जाता है। अब राय बनारस के हर विधानसभा क्षेत्र में घूम-घूम कर नारा दे रहे हैं- देशवासी अपना पुत्रधर्म निभाएं। यानी बनारस के चुनाव में मोदी की मौजूदगी को राष्ट्रीयता से जोड़कर नायाब राजनीतिक प्रयोग को अंजाम भी दिया जा रहा है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय लगातार विहिप के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पाठ पढ़ा रहे हैं कि जाति और मजहब से इतर कैसे चुनावी जीत साधी जा सकती है। 

 जिस तरह की बिसात विहिप बनारस में बना रही है, उसने पहली बार इसके संकेत दे दिए है कि किसी भी राजनीतिक दल से कई कदम आगे चलते हुए किसी भी सामाजिक संगठन का राजनीतिक प्रयोग कैसे किया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि विहिप के लिए 2014 स्वर्णजयंती का साल है। और जन्माष्ठमी के दिन अपनी स्वर्णजयंती मनाने से पहले विहिप ने राजनीतिक तौर पर जिस तरह की व्यूहरचना समूचे बनारस में की है, उसके बाद मोदी हर-हर या घर-घर पहुंचें या ना पहुंचें, लेकिन हर वोटर के घर विहिप राजनीतिक दस्तक देकर यह अहसास करा रही है कि पहली बार जातीय समीकरण भी टूट रहे हैं। मजहब के नाम पर सियासत भी खत्म हो रही है क्योंकि संघ परिवार का सामाजिक बराबरी का चिंतन लेकर मोदी बनारस से चुनाव जीत कर पीएम बनने जा रहे हैं।

बनारस के लिए विहिप की चुनावी व्यूहरचना प्रखंड से पुरवा तक की है। यानी करीब 30 हजार से ज्यादा विहिप से जुड़े लोग बनारस के सबसे छोटे गांव यानी पुरवा तक पहुंचेंगे, जहां न बिजली पहुंची है और न ही सड़क। यानी विकास की कोई धारा जहां नहीं पहुंची है, वहां मोदी के लिए विहिप वोट के लिए दस्तक दे रही है। दरअसल बनारस लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की पांच सीटें हैं। हर विधानसभा क्षेत्र में विहिप के दस प्रखंड काम कर रहे हैं। कुल 50 प्रखंड। हर प्रखंड के अंदर दस खंड काम करते हैं। पांच सौ खंड और हर खंड में दस न्याय पंचायतें हैं, यानी पांच हजार पंचायतें और हर न्याय पंचायत में दो से पांच ग्रामसभाएं हंै। औसत करीब पंद्रह हजार ग्रामसभा और हर ग्रामसभा में दो से 10 छोटे गांव यानी पुरवा हैं। पचास हजार से ज्यादा छोटे-बड़े गांव तक में विहिप की दस्तक पांच से 10 मई के दौरान हो जाएगी। 

दरअसल संघ का यह नायाब राजनीतिक प्रयोग है जिसे विहिप के कार्यकर्ता मोदी के पीएम पद के उम्मीदवार बनते ही अमली जामा पहनाने में लग गए। बनारस में भाजपा को सिर्फ यही काम सौंपा गया है कि वह ‘एक बूथ, दस यूथ’ के तहत काम करे। हर बूथ पर दस युवा कैसे मौजूद रहेगें, उसके लिए अपनी राजनीतिक इकाई को संघ ने लगा दिया है। संघ के स्वयंसेवक एक पन्ना, एक स्वयंसेवक के तहत काम कर रहे हैं। वोटर लिस्ट के हर एक पन्ने को


हर एक स्वयंसेवक ने संभाला है। इसमें हर वोटर को लेकर समूची जानकारी हासिल करने में स्वयंसेवक लगे हुए है। वहीं विहिप का काम बनारस में सबसे विस्तृत और सबसे जटिल है।

 दिल्ली से बनारस के लिए विशेष रूप से भेजे गए राजीव गुप्ता के मुताबिक, 20 अप्रैल तक विहिप ने पहला लक्ष्य पा लिया। मतलब, 50 प्रखंड और 500 खंड में काम पूरा हो चुका है। पांच हजार न्याय पंचायतों में से तीन हजार पंचायतें भी कवर हो चुकी हंै। आखिरी चरण में पांच मई से 10 मई तक विहिप का कार्यकर्ता हर गांव के हर दरवाजे पर दस्तक दे चुका होगा। बाकी पेज 8 पर 

दरअसल बनारस को संघ परिवार ने अगर विहिप के जरिए चुनावी प्रयोगशाला बनाया है तो विहिप के पचास वर्ष के उत्सव की तैयारी के लिए भी संघ इसी प्रयोगशाला के दायरे में उन्हीं मुद्दों को राजनीतिक तौर पर मथ रहा है, जिसे वाजपेयी सरकार के दौर में हाशिए पर रख दिया गया था। बेहद महीन तरीके से मोदी की चुनावी जीत की बिछती बिसात पर राजनीतिक तौर पर सक्रिय वोटरों के सामने संघ परिवार अयोध्या में राममंदिर निर्माण और धारा 370 के साथ विस्थापित कश्मीरी पंडितों का सवाल भी उछालने में लगा है।

 विहिप के चंपत राय मोदी की जीत के साथ हिंदुस्तान की उस परिकल्पना को विहिप कार्यकर्ताओं के सामने परोस रहे हैं, जिसके आसरे संघ के सामाजिक शुद्धिकरण, राजनीतिक शुद्धिकरण में बदल जाएं। दूसरी ओर काशी प्रांत के संगठन मंत्री मनोज श्रीवास्तव का मंत्र है- अयोध्या में राममंदिर निर्माण और धारा 370 को खत्म कर कश्मीर से भगाए गए पंडितों की वापसी। 

पहली बार संघ परिवार चुनावी मौके को अपने एजंडे में राजनीतिक तौर पर ढालने की तैयारी भी कर रहा है। उसे लगने भी लगा है कि नरेंद्र मोदी के नाम पर सक्रिय हुई राजनीति का लाभ संघ को मिलेगा। इसलिए बनारस के इंग्लिशिया लाइन स्थित विहिप के दफ्तर में मोदी की चुनावी जीत की बिसात पर ये नारे लगने लगे हैं- ‘अयोध्या में राममंदिर सुनिश्चत है। धारा 370 का खात्मा होगा। आतंकवाद और नक्सलवाद अपने चरम पर है। देश की सीमाएं असुरक्षित हंै। सीमा पर हमारे जांबाज जवानों के सिर काट दिए जाते हंै। आए दिन चीन भारत के अंदर कई किलोमीटर तक घुसपैठ करता है । करोड़ो बांग्लादेशी हमारे देश में घुसपैठ करते हैं, पर हमारी केंद्र की लचर सरकार चुपचाप इस प्रकार के सभी अपमान सहती रहती है, इसलिए भारत के नौजवानों ने देश में परिवर्तन लाने के लिए मन बना लिया है। इसलिए जातिवादी और मजहब की राजनीति करने वालों की दुकानें इस लोकसभा चुनाव में बंद हो चुकी है...। ’

तो पहली बार संघ की विचारधारा संघ परिवार की राजनीतिक बिसात पर प्यादा है । और संघ का चुनावी प्रयोग सफल हुआ तो प्यादा बने विचार को वजीर के तौर पर उभरना है। और संघ के लिए यह प्रयोगशाला इसलिए उसकी अपनी है कि विकास पुरुष नरेंद्र मोदी काशी में उमड़े जनसैलाब से ही लबालब है। जहां विकास की कोई धारा पहुंची नहीं उन गलियों में मोदी या भाजपा नहीं, बल्कि विहिप के नौजवान धूल फांक रहे है। संघ की ताकत यही है, जिसके आगे मोदी भी नतमस्तक हैं।


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