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दिल्ली के मैदान में अकेली पड़ीं दीदी, नरेन्द्र मोदी पर जमकर साधा निशाना PDF Print E-mail
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Thursday, 13 March 2014 09:51

जनसत्ता संवाददाता

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे बुधवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी की रैली में नहीं पहुंचे। भ्रष्टाचार के विरोध में मुहिम छेड़ने वाले हजारे की अनुपस्थिति का कोई कारण नहीं बताया गया। रैली में शामिल होने के लिए अण्णा मंगलवार रात यहां पहुंचे थे। लेकिन सूत्रों ने कहा कि वे अस्वस्थ हैं।

 

समझा जा रहा था कि ममता बनर्जी हजारे के साथ मिलकर अपनी राष्ट्रीय महत्त्वाकांक्षा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। लेकिन आज का यह मंच बस तृणमूल कांग्रेस की रैली साबित हुई। हजारे ने मंगलवार को कहा था कि वे रैली में शिरकत करेंगे। वे अपने शिष्य रहे अरविंद केजरीवाल की पार्टी को दरकिनार करते हुए पहले ही तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के प्रति अपना समर्थन जता चुके हैं। यहां अहम बात यह है कि कोलकाता के एक इमाम ने धमकी दी थी कि अगर ममता बनर्जी ने हजारे के साथ मंच साझा किया तो वे ममता के प्रति अपना समर्थन वापस ले लेंगे। बाद में तृणमूल नेता मुकुल राय यहां महाराष्ट्र सदन गए और हजारे से मिले।

रैली में ममता बनर्जी ने कांग्रेस और भाजपा के अलावा अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी वामपंथी पार्टियों को भी निशाना बनाया। रैली में बहुत कम लोग पहुंचे। ममता रैली में लोगों की संख्या कम देखकर काफी निराश दिखीं। बाद में उन्होंने कहा कि वे चाहतीं तो ट्रेनें भरकर लोगों को दिल्ली ला सकती थीं।

ममता ने मोदी का नाम लिए बगैर उनपर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा कहती है कि वह शीर्ष सत्ता पर आएगी। लेकिन वे पूछना चाहती हैं कि वह कैसे सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा कि गुजरात का चेहरा सांप्रदायिक है। गुजरात के लोग ही नहीं बल्कि वहां के नेता भी सांप्रदायिक हैं। भाजपा या कांग्रेस को समर्थन देने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों दल देश को बेचने के लिए सिंडीकेट बनाते हैं। वे साथ आ सकते हैं और माकपा की इन दलों से सांठगांठ है। उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस, भाजपा या माकपा या इन दलों से संबंध रखने वालों का समर्थन नहीं करेंगी।

हजारे की अनुपस्थिति पर ममता ने बाद में पत्रकारों से कहा कि यह राजनीतिक बैठक नहीं थी। यह सामाजिक बैठक थी। उन्हें न्योता दिया गया था। उन्होंने यहां आने का वादा किया था और वे आर्इं। उन्होंने कहा कि वे अपना वादा पूरा करने के लिए रैली में आर्इं। लेकिन उन्हें नहीं


मालूम कि हजारे रैली में क्यों नहीं आए। ममता ने कहा कि यह उनकी (हजारे की) रैली थी। वे उनके अनुरोध पर आई थीं। वे नहीं जानती कि वे क्यों नहीं आए। उन्हें इस बारे में कुछ मालूम नहीं है।

हजारे को लेकर किए जाने वाले सवालों की बौछार पर उन्होंने कहा कि उनके मन में अण्णाजी के प्रति सम्मान है। वे वरिष्ठजन हैं। वे उनकी इच्छा का सम्मान करती हैं। रामलीला मैदान में लोगों की कम उपस्थिति पर तृणमूल प्रमुख ने कहा कि इस मैदान में बाहर से लोग लाए जाते हैंं। हम भी ऐसा कर सकते थे। लेकिन यह चुनाव का समय है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तृणमूल अकेले चुनाव लड़ रही है और वह ऐसा करती रहेगी। पंचायत चुनाव में भी उन्होंनेअकेले चुनाव लड़ा। वे गुजरात, असम, त्रिपुरा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश में भी  (चुनाव) लड़ेंगी।

रैली काफी देर से शुरू हुई। इसमें गुजरे जमाने के फिल्म अभिनेता बिश्वजीत ने भाग लिया। पलामू के सांसद कामेश्वर बैठा औपचारिक रूप से तृणमूल में शामिल हो गए। रैली में ममता ने कहा कि बिश्वजीत लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि मंगलवार को वर्षा हुई थी फिर भी लोग रैली में आए। ये दस लोग ही दस लाख में तब्दील होंगे। ममता ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि शिशु मृत्युदर गुजरात से कम बंगाल में है। राष्ट्रीय शिशु मृत्युदर 44 है, गुजरात में यह 44 और पश्चिम बंगाल में 32 है। उन्होंने यह भी दावा किया कि देश की आर्थिक विकास दर से बंगाल की जीडीपी दर अधिक है। देश की जीडीपी दर 4.9 फीसद है जबकि पश्चिम बंगाल में यह 7.71 है।

पूर्व की केजरीवाल सरकार के फैसलों के बाबत ममता ने किसी का भी नाम लिए बिना कहा कि दिल्ली में बाल्टी गिन कर मुफ्त पानी दिया जाता है जबकि बंगाल में निशुल्क पानी दिया जाता है। दिल्ली में सस्ती बिजली सबसिडी देकर दी जाती है, जबकि उनके प्रदेश में बिना किसी सबसिडी के बिजली सस्ती दी जाती है।

 

 

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