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अमर सिंह व जयाप्रदा ने थामा अब रालोद का दामन PDF Print E-mail
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Tuesday, 11 March 2014 09:39

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। सपा से निष्कासित नेता अमर सिंह और जयाप्रदा सोमवार को अजित सिंह की अगुआई वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) में शामिल हो गए। अमर सिंह को फतेहपुर से लोकसभा चुनाव का टिकट दिए जाने के संकेत हैं जबकि जयाप्रदा बिजनौर से चुनावी मैदान में उतर सकती हैं।

 

रालोद प्रमुख अजित सिंह के घर पर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए अमर सिंह ने कहा कि वे चुनावी राजनीति के कारण रालोद में शामिल नहीं हो रहे हैं। मैंने और जयाप्रदा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1000 किलोमीटर की पदयात्रा की जबकि मेरे दोनों गुर्दे नाकाम हो रहे हैं। मुझे महसूस हुआ कि उत्तर प्रदेश का बंटवारा किए बिना इसका विकास नहीं हो सकता। अजित सिंह ने हरित प्रदेश का हमेशा समर्थन किया है जो बहुत महत्त्वपूर्ण है। अजित सिंह में पूर्वांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश जैसे राज्यों के गठन को लेकर जिस प्रकार की स्पष्टता है, उसका प्रमुख दलों के नेताओं में अभाव है।

फिल्मों से राजनीति में आई जयाप्रदा ने कहा कि अजीत सिंह ने हमेशा उनको और अमर सिंह को सहयोग दिया है और वे पार्टी को मजूबत करने के लिए सब कुछ करेंगे। अमर सिंह से जब पूछा गया कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के पक्ष में लहर होने के बावजूद वे नरेंद्र मोदी विरोधी गठजोड़ में शामिल क्यों हो रहे हैं तो उन्होंने कहा कि हमारी नरेंद्र मोदी या भाजपा से कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। राजनाथ भी मेरे मित्र हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद होते हैं। क्या यह कोई गैंग वार है।

बहरहाल, अमर सिंह ने फौरन यह भी कहा कि भाजपा की राजनीति मेरे डीएनए में नहीं है। रामपुर लोकसभा सीट से सांसद जयाप्रदा कभी अमर सिंह की कोशिशों से ही सपा में आई थीं। अमर सिंह उस समय पार्टी में महासचिव और सपा प्रमुख


मुलायम

सिंह के काफी विश्वस्त थे। अमर सिंह की पार्टी में स्थिति कमजोर होने के बाद जयाप्रदा की पूछ भी घटती गई।

अमर सिंह ने कहा कि उनके रालोद में शामिल होने का मुलायम सिंह बुरा नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा कि यह वही मकान था जहां मुलायम सिंह ने अपनी राजनीति शुरू की थी और चौधरी (चरण सिंह) साहब ने मुलायम सिंह को अपने मानस पुत्र की तरह आगे बढ़ाया था। अमर सिंह ने कहा कि मैं तो जड़ों की तरफ (मुलायम सिंह की) लौटा हूं।

जयाप्रदा और सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां के बीच मतभेद कई दिनों तक सुर्खियों में छाए रहे थे। बहरहाल, खान के कड़े विरोध के बावजूद जयाप्रदा ने रामपुर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी। प्रभावशाली मुसलिम नेता खान ने सपा के कल्याण सिंह से हाथ मिलाने और रामपुर से जयाप्रदा को उतारने के फैसले का मुखर विरोध जताते हुए मई, 2009 में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।

पिछले कुछ महीने से इस बात की अटकलें तेज थीं कि ये दोनों कांगे्रस में शामिल हो सकते हैं। समझा जाता है कि कुछ समय पहले जयाप्रदा ने कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की थी। लगता है कि अमर सिंह को पार्टी में शामिल करने को लेकर कांग्रेस बहुत सहज महसूस नहीं कर रही थी। इसके अलावा जयाप्रदा को कांगे्रस के टिकट पर रामपुर सीट से उतारने में भी दिक्कत थी क्योंकि यह सीट पार्टी की एक प्रमुख नेता बेगम नूर बानो की थी।

 

 

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