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चुनावी घोषणापत्र पर कड़ी नजर रखेगा चुनाव आयोग PDF Print E-mail
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Thursday, 06 March 2014 11:38

जनसत्ता संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली चुनाव आयोग आगामी लोकसभा चुनावों में सभी पार्टियों के घोषणा पत्रों पर नजर रखेगा। सभी पार्टियों को इस बार अपने घोषणा पत्रों को आम लोगों के बीच जारी करने से पहले चुनाव आयोग के पास भेजना होगा और उसमें मतदाताओं के लिए किए गए वादों को पूरा करने के स्पष्टीकरण भी देने होंगे।

इसकी जानकारी दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी विजय देव ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में दी है। उन्होंने बताया कि इस बार मतदान के दिन किसी को भी मतदान केंद्रों में अपने साथ मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत भी नहीं होगी।

 

उन्होंने बताया कि दिल्ली का चुनाव आयोग चुनाव आचार संहिता का पूरी तरह से पालन करवाएगा। उन्होंने बताया कि उम्मीदवारों के खर्चों पर नजर रखने के लिए एक अलग से मानिटरिंग सेल बनाया गया है। ये सेल उम्मीदवारों की ओर से चुनावों पर किए जा रहे खर्चों पर विशेष निगाह रखेगा। उम्मीदवारों को इस बार भी बैंकों में अलग से खाता खुलवाना पड़ेगा। विजय देव ने बताया कि विकलांगों को चुनावों में मतदान में कोई दिक्कत न आए उसके लिए स्वैच्छिक संगठनों की मदद ली जाएगी, ताकि विकलांग सुविधा से वोट डाल सकें। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग सोशल मीडिया पर भी नजर रखेगा। पिछले विधानसभा चुनावों में जो भी एफआइआर दर्ज की गईं हैं, उनकी जानकारी चुनाव आयोग के पास भेज दी गई है। अब इस मामले में फैसला चुनाव आयोग को करना है।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय देव ने कहा कि आयोग ने चुनाव की तैयारियां शुरू  कर


दी हैं और मतदान के सभी पिछले रिकार्ड को तोड़ने के उद्देश्य से काम करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग अधिकतम मतदान चाहता है और 2013 में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों के 65.86 फीसद सर्वाधिक मतदान के रिकार्ड को तोड़ना चाहते हैं। देव ने बताया कि चुनावों की अधिसूचना 15 मार्च को जारी होगी और नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख 22 मार्च होगी। नामांकन पत्रों की छानबीन 24 मार्च को होगी वहीं नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 26 मार्च होगी।

उन्होंने कहा कि 31 जनवरी को प्रकाशित अंतिम सूची के अनुसार 1,20,60,493 मतदाताओं का पंजीकरण कर लिया गया है। 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 1,19,32,069 मतदाताओं का पंजीकरण किया गया था और समीक्षा के बाद 1,28,424 मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया।

2009 के लोकसभा चुनाव में 1,10,96,854 मतदाताओं को मतदान का अधिकार प्राप्त था। देव ने बातया कि चुनाव से पहले मतदाताओं को सूची में अपना नाम जरूर देखना चाहिए।

लोगों को लगता है कि यदि उनके पास मतदाता पहचान पत्र है तो वे मतदान कर सकते हैं। लेकिन केवल ईपीआइसी कार्ड होने से कोई मतदान का अधिकार नहीं रखता। मतदाता सूची में नाम होना जरूरी है। मतदाता पहचान पत्र तो परिचय के लिए होता है। उन्होंने कहा कि वेबसाइट पर भी मतदाता सूची में नाम देखने की सुविधा है।

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