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इराकी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी पर अमेरिकी सांसदों का गुस्सा PDF Print E-mail
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Thursday, 06 February 2014 12:33

वाशिंगटन। इराक में राजनीतिक मेलमिलाप की प्रक्रिया में देरी और ईरान के साथ संबंधों के लिए अमेरिकी सांसदों ने इराकी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि इस वजह से इराक में आत्मघाती बम हमलों का जबर्दस्त दौर शुरू हो गया है।

 

ताजा बम हमलों से बगदाद के दहल जाने और 33 लोगों के मारे जाने के बाद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कल सांसद इराक में अलकायदा और उसके सहयोगी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवांट’ के खतरे का आकलन करने के लिए जुटे।

सदन की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष एड रोएस ने कहा कि इराक में छह सालों से चल रही खूनी हिंसा के दौर में अलकायदा से जुड़े आतंकी अब एक माह में औसतन 40 हमले कर रहे हैं। वर्ष 2011 के बाद अमेरिकी सेनाओं के यहां से चले जाने के बाद हुई हिंसा का यह सबसे खराब रूप है।

इराक में अप्रैल में चुनाव होने हैं। रोएस ने कहा, ‘‘देश के प्रमुख होने के नाते मलिकी को इराक को सांप्रदायिक युग से अलग ले जाना होगा।’’

उन्होंने कहा कि देश की सुन्नी जनसंख्या के शिया बहुल सरकार से ‘अलगाव’ का फायदा आतंकियों को मिल रहा है, जिसके ईरान के शिया नेताओं से भी अच्छे संबंध हंै।

रोएस ने कहा, ‘‘इस सांप्रदायिक


तनाव का फायदा उठाना अलकायदा अच्छी तरह से सीख गया है और मलिकी के सत्ता के लोभ ने उन्हें बहुत युद्ध सामग्री दे रखी है।’’

रिपब्लिकन प्रतिनिधि डाना रोहराबाचर ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों इराक को हेलीकॉप्टर और ड्रोन मुहैया कराने वाला अमेरिका अभी भी उस देश की गतिविधियों में सक्रिय है ?

उन्होंने पूछा, ‘‘आखिर हमें ऐसी क्या मजबूरी लगती है कि हमें ऐसे युद्ध के बीच बने रहना है, जहां लोग एक दूसरे की हत्या कर रहे हैं।

हजारों लोग इस उन्माद में अपनी जिंदगियां खो रहे हैं। अमेरिका को ऐसा क्यों लगता है कि उसे भी इस उन्माद का हिस्सा होना चाहिए ?’’

इराक मामलों के अमेरिकी उप सहायक विदेश मंत्री ब्रेट मैक गुर्क ने कहा, ‘‘लगभग सभी आत्मघाती हमलावर वे विदेशी लड़ाके हैं, जो सीरिया के जरिए इराक में दाखिल हुए हैं।’’

उन्होंने सांसदों को बताया, ‘‘विभिन्न मुद्दों पर उनके मतभेदों के बावजूद सभी इराकी नेताओं को हमारा कड़ा संदेश यही है कि उन्हें इराकी लोगों के लिए खतरा बने संगठन आईएसआईएल से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।’’

(एएफपी)

 

 

 

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