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मुजफ्फरनगर दंगा के दो पीड़ितों से मिले थे लश्कर के संदिग्ध आतंकी PDF Print E-mail
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Wednesday, 08 January 2014 11:29

जनसत्ता संवाददाता

नई दिल्ली/मुजफ्फरनगर। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि लश्कर-ए-तैयबा के दो संदिग्ध आतंकवादी मुजफ्फरनगर के दो लोगों से मिले थे। दिल्ली पुलिस ने यह खुलासा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के इस बयान के तीन महीने बाद किया कि मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों से पाक खुफिया एजंसी आइएसआइ ने संपर्क साधा था।

पुलिस ने यह भी बताया कि मुजफ्फरनगर के ये दोनों बाशिंदे दंगा पीड़ित नहीं हैं। उधर लश्कर के इरादों के खुलासे के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजंसियां सक्रिय हो गई हैं।

 

दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के विशेष आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि लश्कर के संदिग्ध आतंकवादी मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद राशिद को हाल में हरियाणा के मेवात इलाके से गिरफ्तार किया गया। इन दोनों ने एक मस्जिद के निर्माण के लिए धन उगाहने के लिए मुजफ्फरनगर के लियाकत और जमीर से मुलाकात की थी। इनके तीसरे साथी अब्दुल सुभान की तलाश की जा रही है। श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों रात में उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग में काम कर रहे लियाकत के घर रुके। दूसरे दिन सुबह लियाकत उन्हें थाना भवन रेलवे स्टेशन ले गया। यहां  लियाकत ने अपने एक दोस्त को बुलाया और उसे अपने मेहमानों के लिए चाय का इंतजाम करने को कहा। दोस्त की पहचान जमीर के रूप में की गई है। पुलिस ने बताया कि जब वे चाय पी रहे थे, लियाकत वहां से चला गया और जमीर उनसे बातें करता रहा। इसी दौरान एक व्यक्ति ने, जिसकी पहचान पुलिस सार्वजनिक नहीं कर रही, जमीर से कहा कि वह एक मस्जिद बनवाना चाहता है। इसके लिए उसे धन की जरूरत है। उसने जमीर से यह भी कहा कि वे फिरौती के लिए कुछ अपहरण कर सकते हैं जिससे मिले धन का उपयोग मस्जिद निर्माण और अन्य गतिविधियों में किया जा सकता है। उन्होंने जमीर से कुछ लोगों का इंतजाम करने के लिए कहा, जिनसे अपहरण कराया जा सके। जब जमीर को यह एहसास हुआ कि वे इस तरह की चीजें करना चाहते हैं तो वह हट गया और उनके साथ संपर्क खत्म कर दिया।

श्रीवास्तव ने साफ किया कि लियाकत और जमीर मुजफ्फरनगर में रहते हैं लेकिन दंगा पीड़ित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि


पुलिस ने लियाकत और जमीर को अदालत में पेश किया और भारतीय दंड संहिता की धारा 161 व 164 के तहत उनका बयान दर्ज कराया। हम उन्हें गवाह के रूप में पेश करेंगे ताकि उनके खिलाफ हमारा मामला मजबूत बने। विशेष आयुक्त से पूछा गया कि क्या जमीर ने उन्हें बताया कि धन का उपयोग मुजफ्फरनगर दंगों का बदला लेने के लिए किया जाएगा, उन्होंने कहा- यह अभी एकतरफा बयान है। जब हम इसका सत्यापन कराएंगे और मामले में गिरफ्तारियां करेंगे, तभी इस मामले में कोई बयान नहीं देंगे।

उधर लश्कर के इरादों के खुलासे के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजंसियां सक्रिय हो गई हैं। अपराध शाखा और इंटेलीजेंस ब्यूरो (आइबी) की टीम मुजफ्फरनगर और शामली के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल संदिग्ध लोगों की तलाश कर रही है। सूत्रों के अनुसार अपराध शाखा के पास संदिग्ध आतंकवादियों के फोटो व अन्य जानकारियां भी हैं। आइबी यह जानकारी जुटाने में लगा है कि शामली और मुजफ्फरनगर के राहत शिविरों में ये आतंकवादी कितनी बार आए और किस-किस के पास रुके। दंगा राहत शिविरों से जु़ड़े लोगों के बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि राहत पहुंचाने के काम में लगे दो शिविर संचालकों के बैंक खातों में आतंकवादी संगठनों ने धन भेजा था। खुफिया एजंसियां जौला, लोई, मलकपुरा, मुजफ्फरनगर और शामली के कई स्थानों की खाक छान कर सूचनाएं जुटा रही हैं। आइबी की टीम ने चरथावल और कैराना में कुछ बैंकों में कई संदिग्ध लोगों के बैंक खाते भी खंगाल रही है और उनके लेन-देन के बारे में जानकारी जुटा रही है। लेकिन स्थानीय पुलिस केंद्रीय खुफिया एजंसियों की गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रही है। आइजी आशुतोष पांडेय ने जनसत्ता से कहा कि केंद्रीय खुफिया एजंसी व दूसरी सुरक्षा एजंसियों की गतिविधियों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

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