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आरसीए चुनाव का फैसला 17 जनवरी को : सुप्रीम कोर्ट PDF Print E-mail
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Tuesday, 07 January 2014 11:01

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आइपीएल) के पूर्व आयुक्त ललित मोदी के भाग्य पर फैसला 17 जनवरी को आने की उम्मीद है क्योंकि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इसी दिन राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) चुनाव के नतीजे वाला सीलबंद लिफाफा खोलेगा। मोदी ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव लड़ा था।

 

न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस चुनाव में मोदी के जीतने की स्थिति में आरसीए चुनाव के नतीजे की घोषणा से पहले बीसीसीआइ द्वारा मोदी के 19 दिसंबर 2013 चुनाव में लड़ने पर उठाई गई आपत्ति पर भी सुनवाई की सहमति दी है। बीसीसीआइ ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि मोदी को चुनाव में लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी क्योंकि बोर्ड ने उन्हें किसी अन्य क्रिकेट संघ से जुड़ने के लिए आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था।

कोर्ट ने कहा कि बोर्ड की आपत्ति का मुद्दा तभी उठेगा जब मोदी चुनाव जीत जाएंगे और अगर ऐसा होता है तो वह नतीजा घोषित करने से पहले बीसीसीआइ की याचिका की सुनवाई करेगी। बोर्ड ने जोर दिया कि कोर्ट ललित मोदी के खिलाफ उसकी याचिका की सुनवाई करे तो न्यायाधीशों ने कहा, ‘क्या वे (मोदी) इतने शक्तिशाली हैं कि उन्हें निश्चित रू प से चुन लिए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि चुनाव के नतीजे वाला सीलबंद लिफाफा 17 जनवरी को


खोला जाएगा और उसी दिन सारी बहस पर सुनवाई होगी।’

बीसीसीआइ ने राजस्थान खेल अधिनियम 2005 को चुनौती दी थी, जिसके तहत मोदी को आरसीए के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की अनुमति मिली जबकि बोर्ड ने उन्हें आजीवन प्रतिबंधित किया हुआ है। शीर्ष अदालत ने 20 नवंबर 2013 को अपने सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनएम कासलीवाल को इस चुनाव के लिए मुख्य पर्यवेक्षक बनाया था।

बोर्ड ने 28 दिसंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट में यह मामला उठाने का फैसला किया था। बोर्ड ने मोदी के आरसीए में दोबारा प्रवेश करने के संभावित प्रभावों पर चर्चा के लिए हुई आपात कार्यकारी समिति बैठक में इस मामले में हस्तक्षेप करने का फैसला लिया था। मोदी को सुप्रीम कोर्ट के पर्यवक्षेक की निगरानी में 19 दिसंबर को हुए आरसीए अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई थी। बीसीसीआइ ने अपनी अनुशासनात्मक समिति द्वारा मोदी के अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार के आठ आरापों में दोषी पाए जाने के बाद पिछले साल 25 सितंबर को उन्हें आजीवन प्रतिबंधित किया था।

(भाषा)

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