मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
स्टेनिसलास वावरिंका बने चेन्नई ओपन के चैंपियन PDF Print E-mail
User Rating: / 0
PoorBest 
Monday, 06 January 2014 12:33

चेन्नई। स्विट्जरलैंड के शीर्ष वरीयता प्राप्त स्टेनिसलास वावरिंका ने अपनी ख्याति के रू प में प्रदर्शन करते हुए रविवार को यहां फ्रांस के एडुआर्ड रोजर वेसलिन को सीधे सैटों में हराकर एटीपी चेन्नई ओपन टेनिस टूर्नामेंट का सिंगल्स खिताब जीता।

पिछले साल अमेरिकी ओपन के सेमी फाइनल में जगह बनाने वाले वावरिंका ने नंगमबाक्कम टेनिस स्टेडियम में अपना 500वां एटीपी टूर मैच खेलते हुए एक घंटे 35 मिनट तक चले मुकाबले में वेसलिन को 7-5, 6-2 से हराया।

 

वावरिंका का यह करिअर का पांचवां एटीपी खिताब है। यह दूसरा अवसर है जबकि इस स्विस खिलाड़ी ने चेन्नई में परचम लहराया। इससे पहले उन्होंने 2011 में खिताब जीता था। सातवीं वरीयता प्राप्त रोजर वेसलिन ने अपना पहला एटीपी खिताब जीतने के लिए काफी कोशिश की लेकिन पिछले सत्र में शानदार प्रदर्शन करने वाले 28 साल के वावरिंका से पार पाना उनके लिए आसान नहीं रहा। अपने करिअर की सर्वश्रेष्ठ फार्म में चल रहे वावरिंका ने खुद को अव्वल खिलाड़ी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने दमदार रिटर्न और ग्राउंड स्ट्रोक्स के दम पर वेसलिन को उन्नीस साबित किया और रोजर वेसलिन को ज्यादा मौके नहीं दिए।

वावरिंका मैच आगे बढ़ने के साथ हावी होने लगे थे। उनका रोजर वेसलिन के खिलाफ रेकार्ड अब 2-1 हो गया है। रोजर वेसलिन ने वावरिंका को तीन महीने पहले स्विस इंडोर बासेल में हराया था जबकि स्विस खिलाड़ी ने दो साल पहले चेन्नई में अपने इस प्रतिद्वंद्वी पर जीत दर्ज की थी।

वावरिंका ने कहा, ‘यह (पांचवां खिताब) निश्चित तौर पर बहुत अहम है। यह यहां मेरा दूसरा खिताब है और इसलिए मैं इसका पूरा लुत्फ उठा रहा हूं। मैंने यहां अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। मैं 2013 में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ खेला और मैं सुधार के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा हूं। साल का पहला सप्ताह शानदार रहा और मैं अब पहले ग्रैंडस्लैम में


आत्मविश्वास के साथ उतरूं गा। उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट में काफी सुधार हुआ है और मैं यहां फिर से खेलना चाहूंगा।’

रोजर वेसलिन ने विजेता की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘फाइनल में हार दिल टूटने जैसा है। वावरिंका ने बहुत अच्छा खेल दिखाया और वे जीत के हकदार थे। उन्होंने पूरे सप्ताह शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने वास्तव में अच्छा खेल दिखाया। उम्मीद है कि अगली बार मैं टूर्नामेंट जीतने में सफल रहूंगा।’

रोजर वेसलिन फरवरी 2013 में डेलारे बीच ओपन के फाइनल में अर्नेस्ट गुलबिस से हार गए थे। पहले सैट में अच्छा मुकाबला देखने को मिला और दोनों खिलाड़ियों ने पहले दस गेम तक अपनी सर्विस बचाए रखी। वावरिंका को बैकहैंड विनर के जरिए 11वें गेम में पहला बे्रक पाइंट मिला और वेसलिन की गलती से स्विस खिलाड़ी ने बढ़त हासिल कर ली। वावरिंका को इसके बाद अपनी सर्विस बचाए रखकर पहला सैट जीतने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

रोजर वेसलिन ने दूसरे सैट के पहले गेम में शुरू  में बे्रक पाइंट बचाया लेकिन वावरिंका को जब दूसरा मौका मिला तो फ्रांसीसी खिलाड़ी नेट पर आ गया। वावरिंका के फोरहैंड विनर पर वे बैकहैंड नेट पर मार गए जिससे स्विस खिलाड़ी को बढ़त मिल गई। इसके बाद वावरिंका को कोई परेशानी नहीं हुई और उन्होंने जल्द ही 5-1 की बढ़त हासिल करके आठवें गेम में मैच अपने नाम कर दिया।

वावरिंका के लिए यह यादगार टूर्नामेंट रहा। शुक्रवार को उन्होंने अलियाज बेडेन को हराकर अपने करिअर की 300वीं जीत दर्ज की। वे रोजर फेडरर (926 जीत), मार्क रोसेट (433) और जैकब हालसेक (432) के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाले चौथे स्विस खिलाड़ी हैं।

(भाषा)

 

 

 

आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?