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सीबीआई जांच का सामना करें वीरभद्र सिंह : अरुण जेटली PDF Print E-mail
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Monday, 06 January 2014 09:52

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। ताजा प्रहार करते हुए भाजपा ने वीरभद्र सिंह के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोप पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की चुप्पी पर रविवार को सवाल उठाया और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को इन आरोपों की सीबीआई जांच की मंजूरी देने की चुनौती दी जिसे सिंह राजनीति से प्रेरित बताते हैं।

 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग पर कहा-कांग्रेस पार्टी और वीरभद्र सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना बेशर्मी से करने का फैसला कर लिया है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी चुप्पी साध लेंगे।

पलटवार करते हुए सिंह ने कहा कि जेटली और पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता पे्रम कुमार धूमल ने अपनी निहित राजनीतिक मंशा के अनुकूल अपने पत्रकार सम्मेलन में जरूरी तथ्य जानबूझकर दबा दिए। उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों को ‘झूठ, ओछा और मनगढ़ंत’ करार देते हुए कहा-विपक्ष ने चुनिंदा अवसरवादी खुलासे किए और अहम तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर व कई को छिपाकर गुमराह करने की कोशिश की। उन्होंने कहा-आरोप अनर्गल और राजनीति से प्रेरित हैं।

जेटली ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने या भ्रष्टाचार के आरोप साबित करने की चुनौती दी है। 29 दिसंबर को सीबीआइ निदेशक को इस संबंध में उनका पत्र प्राथमिकी रूप में ही है। उन्होंने कहा-इसकी जांच करने के लिए दिल्ली विशेष पुलिस (स्थापना) अधिनियम की धारा-6 के तहत राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है।

जेटली ने कहा-मैं हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार को चुनौती देता हूं कि अपनी मंजूरी दे ताकि इन आरोपों में जांच हो सके। कांगे्रस नेतृत्व पर जेटली का बयान ऐसे समय में आया है जब इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस ने वीरभद्र सिंह का समर्थन करते हुए इस मुद्दे पर मुकाबले का फैसला कर लिया है और आरोपों को विपक्ष की साजिश का हिस्सा करार दिया है।

भाजपा नेता ने कहा कि उनकी समझ से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के खिलाफ पहले ही दो आरोपों की जांच सीबीआइ कर रही है। सिंह के खिलाफ किसी बिजली कंपनी से जुड़ा यह तीसरा आरोप है जिसकी जांच किए जाने की जरूरत है। जेटली ने आरोप लगाया कि सिंह, उनके परिजन और उनकी कंपनी को एक बिजली कंपनी के प्रमोटर


की ओर से ब्याज रहित कर्ज मिला था। इस कंपनी का हिमाचल सरकार से लेन-देन था। आरोप है कि राज्य सरकार ने कंपनी का पक्ष लेते हुए आदेश जारी किए।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रथमदृष्टया तथ्य साबित करते हैं कि कर्ज में लिए गए धन का इस्तेमाल कर्जदाता के समूह की अन्य कंपनियों में शेयर खरीदने में किया गया। सिंह ने कहा कि आप नेता प्रशांत भूषण के दिल्ली हाई कोर्ट में दर्ज जनहित याचिका में भी ये ही आरोप शामिल किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने कुमुद भूषण एजुकेशनल सोसायटी के नाम पर पालमपुर के कांडबारी में प्रशांत भूषण के अवैध रूप से चाय बगान की खरीद का मामला दर्ज किया था। तब भूषण हाई कोर्ट गए थे। दरअसल भूषण चाय बागान की जमीन खरीद नहीं सकते थे, क्योंकि इस पर रोक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी विचित्र बात है कि धूमल परिवार, भूषण और जेटली पुराना राग अलाप रहे हैं जिससे मिलीभगत और साजिश की बू आती है। उन्होंने कहा-प्रशांत भूषण और धूमल परिवार अपनी गलतियों को लेकर जांच का सामना कर रहे हैं। जेटली हिमाचल में धूमल के वकील के रूप में जाने जाते हैं और उन्होंने पहले एचपीसीए मामले में उनका प्रतिनिधित्व किया था।

उन्होंने जेटली से धूमल परिवार की ओर गुगली बाल मारने के प्रयास का कारण जानना चाहा। सिंह ने कहा-धूमल और उनके परिवार में जेटली का क्या विशेष हित है। क्या उनके कहने पर यह ड्रामा आयोजित करने के लिए उन्हें भुगतान किया गया है, क्या यह क्रिक्रेट कंपनी सद्भाव है या उससे भी ज्यादा गहरा और कुछ क्योंकि उन्होंने वे ही मुद्दे उठाए और उन्हीं सूचनाओं का खुलासा किया जो धूमल के बेटे ने शिमला में अपने पांच संवाददाता सम्मेलन में किया। उन्होंने कहा कि जेटली और धूमल शिकायतकर्ता, अभियोजनकर्ता और न्यायाधीश तीनों की तरह आचरण कर रहे हैं।

 

 

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