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दंगा पीड़ितों को सरकारी इमारतों में पनाह मिलेगी PDF Print E-mail
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Saturday, 28 December 2013 09:53

लखनऊ। ठंड से मौत नहीं होने के गृह विभाग के प्रमुख सचिव के बयान पर बवाल के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि वह मुजफ्फरनगर दंगा राहत शिविरों में रह रहे लोगों को खाली पड़ी सरकारी इमारतों में भेजेगी।

मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं को बताया-‘हमने दंगा राहत शिविरों में रह रहे लोगों को खाली पड़ी सरकारी इमारतों में रखने की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि उन्हें छत मिल सके। इसके अलावा उन्हें ठंड से बचाव के लिए कंबल और अलाव जैसे इंतजाम भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिविरों में रह रहे लोगों को जबरन कहीं नहीं भेजा जाएगा, जिनकी मर्जी होगी उन्हें ही दूसरी जगह भेजा जाएगा।

उस्मानी मेरठ और सहारनपुर के मंडलायुक्तों व शामली, मेरठ, बागपत और मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारियों के साथ बैठक में राहत शिविरों की स्थिति की समीक्षा करने के बाद संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस वक्त पांच राहत शिविर बने हैं। उनमें एक श्रेणी उन लोगों की है जो दंगा प्रभावित नौ गांवों के रहने वाले हैं और वे अपने घर नहीं लौटना चाहते। सरकार


ने उन लोगों की चिंताओं का संज्ञान लिया है। मुख्य सचिव ने कहा कि राहत शिविरों में एक श्रेणी ऐसे लोगों की है जिन्होंने सरकार से पांच लाख रुपए ले लिए हैं और अभी यह  नहीं तय कर सकें हैं कि वे कहां जाएं। इसके अलावा ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने पांच लाख रुपए लिए हैं लेकिन इसे लेकर उनके परिवार में मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को कुछ अन्य लोग यह कह कर भ्रमित कर रहे हैं कि वे वहीं रुकें और कुछ दिनों बाद उन्हें उसी स्थान पर रहने की इजाजत मिल जाएगी।

उस्मानी ने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे राहत शिविरों में रह रहे लोगों में भरोसा जगाएं और उनकी आशंकाओं को दूर करें। अधिकारी शरणार्थियों को अपने गांव लौटने के लिए समझाएं, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएं और जरूरत पड़ने पर उनके गांवों में पुलिस तैनात करें।

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