मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
माछिल फर्जी मुठभेड़ में कर्नल और मेजर सहित छह पर कोर्ट मार्शल का आदेश PDF Print E-mail
User Rating: / 0
PoorBest 
Wednesday, 25 December 2013 14:14

जम्मू। माछिल फर्जी मुठभेड़ के तीन साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद सेना ने एक कर्नल और एक मेजर सहित अपने छह कर्मियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल के आदेश दिए हैं।

इन लोगों पर माछिल में तीन युवकों को आतंकवादी करार देकर उनकी गोली मारकर कथित रूप से हत्या कर देने का आरोप है जिससे पूरी कश्मीर घाटी में व्यापक अशांति फैल गई थी।

 

आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को कहा कि जिन लोगों को कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ेगा उनमें कर्नल डीके पठानिया, चार राजपूत रेजिमेंट के कमांडिंग अधिकारी मेजर उपिंदर और चार अन्य कर्मी शामिल हैं। घटना 30 अप्रैल 2010 को प्रकाश में तब आई जब सेना ने तीनों युवकों के शव को आतंकवादियों का शव बताया जो उत्तर कश्मीर के माछिल से घाटी में हथियारों के साथ घुसने का प्रयास कर रहे थे । सेना ने बाद में दावा किया कि वे पाकिस्तानी आतंकवादी हैं।

बहरहाल जम्मू कश्मीर पुलिस ने सत्यापित किया कि बेरोजगार युवक मोहम्मद शफी, शहजाद अहमद और रियाज अहमद बारामूला जिले के नादिहाल के रहने वाले थे और नौकरी देने के बहाने उन्हें भ्रमित किया गया और बाद में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने जुलाई 2010 में नौ लोगों पर आरोपपत्र दायर किया जिनमें सेना के छह कर्मी शामिल थे लेकिन बाद में उसने मामले की विस्तृत जांच का आश्वासन मिलने पर सेना को जांच सौंप दी।

उत्तरी कमान के एक प्रवक्ता ने कहा कि 2010 के कथित माछिल फर्जी मुठभेड़ मामले में सेना ने आरोपी कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू  कर दी। राज्य पुलिस और न्यायिक विभाग के सहयोग से काफी विस्तृत जांच


हुई जिसमें गवाहों को समन किया गया, साक्ष्य रिकार्ड किए गए और आरोपी कर्मियों का दोष साबित हुआ।

उन्होंने कहा-पूरी घटना और संबंधित कर्मियों की गलतियोंं की गहन छानबीन के बाद सेना ने कोर्ट मार्शल की कार्रवाई का आदेश दिया है ताकि कानूनी प्रक्रिया को निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके जो तेजी से इंसाफ तय करने की सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कथित फर्जी मुठभेड़ के बाद पुलिस ने प्रादेशिक सेना के एक जवान और दो अन्य को गिरफ्तार किया था। लेकिन इस घटना के बाद पूरी कश्मीर घाटी में अशांति फैल गई जिसमें 123 लोग मारे गए थे।

सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस ने इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई कि कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया तय अवधि में पूरी की जाएगी और दोषियों को दंडित किया जाएगा। पुलिस के आरोपपत्र में कर्नल पठानिया, मेजर उपिंदर और इकाई के चार अन्य लोगों के अलावा प्रादेशिक सेना के जवान और दो अन्य के खिलाफ कथित रूप से षड्यंत्र रचने और तीनों युवकों को नौकरी देने के बहाने अपहरण करने और फिर आतंकवादी बताकर कुपवाड़ा में उनकी हत्या करने को लेकर नामित किया था। आरोपपत्र सोपोर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर किया गया था। राज्य पुलिस ने तीन कर्मियों प्रादेशिक सेना के अब्बास शाह, बशरत लोन और अब्दुल हामिद भट को मुठभेड़ में कथित रूप में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था ।

(भाषा)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?