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निडर होकर अपने घर लौटें लोग : राहुल गांधी PDF Print E-mail
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Monday, 23 December 2013 09:56

संजीव व एजंसियां

मुजफ्फरनगर। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद राहुल गांधी रविवार को अचानक मुजफ्फरनगर और शामली जनपद में दंगा पीड़ितों से मिलने पहुंच गए। लोगों ने यहां उन्हें काले झंडे दिखाए।

राहुल ने कहा कि राहत शिविरों में बच्चे मर रहे हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यहां के हालात पर ध्यान दें। उन्होंने शिविरों में रह रहे लोगों के साथ चाय की चुस्कियों के साथ नमकीन खाई और कहा कि सभी को न्याय मिलेगा। उन्होंने शिविरों में रह रहे लोगों से अपील की कि वे अपने घरों को लौट जाएं। जो लोग दंगा कराना चाहते हैं उनकी भी यह चाहत है कि शिविरों में रह रहे लोग कभी भी वापस न लौटें। हर समुदाय के लोग दिल से भाईचारा चाहते हैं।

 

गांधी रविवार को दंगा पीड़ितों का दर्द बांटने के लिए मुजफ्फरनगर और शामली पहुंचे। उनके साथ गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह भी मौजूद थे। शामली जिले की कैराना तहसील के मलकपुर गांव स्थित दंगा पीड़ितों के राहत शिविर में अचानक पहुंचकर उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी और आम नागरिकों को चौंका दिया। यहां उन्होंने विस्थापितों से आत्मीयता जताते हुए शिविर में ही उनके साथ चाय पी और नमकीन खाई। यहां से वे खुरगान और बरनावी के शिविर पहुंचे। राहुल के सड़क मार्ग से मलकपुर शिविर पहुंचते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। राहुल गांधी कांधला काकड़ा में लोगों से मिले। कांधला जोगियाखेड़ा में कई जगह लोगों ने राहुल का विरोध किया।

मलकपुर गांव के राहत शिविर में रह रहे लोगों ने राहुल गांधी के सामने ही शामली प्रशासन के रवैए के खिलाफ शिकायत की। विस्थापितों ने ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजाम न होने की शिकायत की। राहुल ने शिविर में हुई बच्चों की मौत के बारे में विस्थापितों से बातचीत की और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। राहुल ने पीड़ितों से कहा कि जो लोग दंगे कराते हैं, वे चाहते हैं कि आप वापस नहीं लौटें। वे आपको आपके गांवों से दूर रखना चाहते हैं, मैं जानता हूं कि यह मुश्किल है और वहां डर भी है, लेकिन हमें इससे परे होकर सोचना चाहिए। यह लंबे समय तक के लिए ठीक नहीं रहेगा। पिछले दिनों मलकपुर शिविर में ही ठंड से 31 बच्चों के मरने की खबर से भी बवाल हुआ था लेकिन इसकी पुष्टि आज तक नहीं हो पाई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी मुजफ्फरनगर और शामली शिविर में सुविधाओं को लेकर निर्देश दिए थे।

राहुल के साथ आए कांग्रेस महासचिव मधुसूदन मिस्त्री ने


आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शिविरों में यहां तक कि पर्याप्त अनाज और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी नहीं सोची। मुजफ्फरनगर के शिविरों में बच्चों की मौत का मामला पिछले हफ्ते संसद में भी उठा था।

भारनाऊ में राहत शिविर के पीड़ितों ने राहुल से अपनी समस्याएं बताने के लिए और समय मांगा। रास्ते में राहुल कई स्थानों पर रुके और स्थानीय लोगों से बात की। उन्होंने लोगों से पूछा कि वे क्यों वापस नहीं जाना चाहते और ऐसा क्या किया जाना चाहिए जिससे कि वे अपने घरों को लौट सकें। राहुल बाद में जाट युवक राजवीर के घर भी गए जो कांकेड़ क्षेत्र में दंगों के दौरान मारा गया था। एक हिंदू लड़की के साथ छेड़छाड़ की घटना को लेकर शुरू  हुए शुरुआती संघर्ष में तीन  युवकों की जान चली गई थी जिसके बाद दंगे भड़के थे।

राहुल ने यहां एक चौपाल में भी शिरकत की और लोगों से कहा कि वे जो महसूस करते हैं, उन्हें वैसा ही करना चाहिए। कुछ स्थानीय लोगों ने राहुल से शिकायत की कि सपा सरकार के आला मंत्री आजम खान ने दंगों के दौरान पुलिस को जल्द कार्रवाई नहीं करने दी। स्थानीय लोगों ने राहुल से कहा कि सपा ने एक समुदाय के प्रति टेढ़ी नजर रखी क्योंकि वह मुसलिम वोट बैंक की इकलौती दावेदार बनना चाहती है और उसके कहने पर यह सब किया गया।

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष खुर्शीद अहमद सैयद ने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होती तो हम काफी कुछ कर सकते थे, केंद्र सरकार बहुत कुछ नहीं कर सकती क्योंकि राज्य में दूसरी पार्टी का शासन है। सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों के राहत शिविरों में 40 से अधिक बच्चों की मौत पर 12 दिसंबर को कड़ा संज्ञान लिया था और  प्रदेश सरकार को ठंड से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए थे। अदालत के आदेश के बाद प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी थी। मुजफ्फरनगर और शामली में पांच राहत शिविरों में अब भी करीब 4,000 लोग रह रहे हैं। अगस्त में भड़के मुजफ्फरनगर दंगों में 60 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

 

 

 

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