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सुधारों पर बदले राहुल गांधी के सुर PDF Print E-mail
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Sunday, 22 December 2013 09:22

नई दिल्ली। एक तरफ शनिवार को पर्यावरण और वन मंत्री के पद से जयंती नटराजन ने इस्तीफा दिया वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पर्यावरण संबंधी मुद्दों समेत कई विषयों पर परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में देरी पर उद्योग जगत की चिंता साझा की।

शनिवार को राहुल गांधी जुदा अंदाज में बोले। लगभग सात महीने पहले अर्थव्यवस्था और सुधारों पर उलझे विचारों के कारण राहुल की काफी आलोचना हुई थी। शायद उसी से सबक लेते हुए उन्होंने भारतीय उद्योग जगत के सामने अपना मजबूत चेहरा पेश करने की कोशिश की।

 

राहुल ने उद्योगपतियों के एक सम्मेलन में कहा कि आप में से कई ने परियोजनाओं को पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिलने में अनावश्यक देरी पर अपनी चिंता जताई है। उन्होंने मुहावरे के अंदाज में कहा- खामियां इतनी बड़ी हैं कि आप इनमें से कुछ में से तो ट्रक निकाल सकते हैं। उन्होंने कहा- पर्यावरण और सामाजिक नुकसान से बचा जाना चाहिए लेकिन फैसले भी पारदर्शी, समय पर और निष्पक्ष होने चाहिए। जयंती नटराजन के अचानक इस्तीफे के संदर्भ में राहुल के


बयान को अहम माना जा रहा है। जयंती के खिलाफ उद्योग जगत से परियोजनाओं को मंजूरी देने में देरी की शिकायतें थीं। लेकिन जयंती ने दावा किया कि उन्होंने आगामी लोकसभा चुनावों के लिहाज से पार्टी का काम करने के लिए पद छोड़ा है और प्रधानमंत्री से इस्तीफा मंजूर करने का अनुरोध किया।

परियोजनाओं को मंजूरी में देरी के बारे में राहुल ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या व्यवस्था के हर स्तर पर पूरी तरह एकपक्षीय अधिकार होना है। हम इसका सामना करते हैं। भारत में कई मनमाने अधिकार हैं। पर्यावरण मंत्री या मुख्यमंत्री जो चाहे फैसला ले सकते हंै। एकपक्षीय अधिकारों की प्रणाली को खत्म करने की जरूरत बताते हुए राहुल ने कहा कि असली मुद्दा इन सब चीजों में है। भूमि अधिग्रहण हो या पर्यावरण, सभी में एकपक्षीय अधिकार हैं। हमें नए प्रतिमान गढ़ने होंगे और इस विचार को त्यागना होगा।

 

(भाषा)

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