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तो क्या ‘भ्रष्टाचार’ नहीं रह जाएगा अधिकार! PDF Print E-mail
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Sunday, 15 December 2013 10:15

अमलेश राजू

नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल के सत्ता संभालने की आहट से ही दिल्ली में बिजली वितरण का जिम्मा संभालने वाली कंपनियों और दिल्ली पुलिस के होश उड़ गए हैं। पुलिस में फैले भ्रष्टाचार को केजरीवाल के अलावा कौन ठीक कर सकता है? भ्रष्टाचार और लेटलतीफी हटाने का यह अभियान शकरपुर में हुई एक युवक की हत्या के बाद शुरू भी हो गया है।

 

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के उन जवानों और अफसरों की हेकड़ी उड़ी हुई है जो अच्छा-खासा सुविधा शुल्क देकर मनमानी तैनाती में विश्वास रखते थे। इस तरह के अधिकारी ज्यादातर थानों में बीट स्तर पर और यातायात विभाग में सड़क पर ड्यूटी चाहते थे। बताया जा रहा है कि थाने में तो एसएचओ की भी शामत आती दिखाई पड़ रही है। कारण, केजरीवाल किसी भी स्तर पर इलाके में फैले भ्रष्टाचार को पनपने नहीं देंगे। यह इरादा तो उन्होंने आम आदमी पार्टी बनाने के बाद ही जता दिया था।

सूत्रों का कहना है कि पुलिस को अपने इलाके में बन रहीं अवैध इमारतों को तोड़ने और बनाने के एवज में लाखों रुपए सुविधा शुल्क मिलते हैं। यह शुल्क ऐसे मिलता है जैसे पुलिस का यह बुनियादी अधिकार है। दिल्ली के किसी भी इलाके में चाहे वह अनधिकृत कालोनियां ही क्यों न हों, अगर किसी इमारत या प्लाट के पास र्इंट, पत्थर और रेत दिखाई दे दिया तो उस इलाके के बीट वाले से लेकर अफसरों की चांदी शुरू हो जाती है। वहां निगम के अधिकारी से पहले पुलिस की जिप्सी और मोटरसाइकिल रुकती है। गाड़ी का रुकना भी किस्तवार होता है। समय के हिसाब से ड्यूटी वाले अफसरों की गाड़ी पहले आती है। फिर उनकी ड्यूटी खत्म हो जाए तो दूसरी गाड़ी रुकती है। इस मामले में निर्माण करने वाले बजट बनाते हैं कि उन्हें प्लाट खरीदने से लेकर भवन निर्माण में लगने वाली सामग्रियों के अलावा निगम और पुलिस वाले को कितना सुविधा शुल्क देना है। यही कारण है कि जब भी गाड़ी रुकती है मकान बनाने वाले फौरन वहां पहुंचकर पहले से तय शुल्क देने में ही भलाई समझते हैं।

सूत्रों का कहना है कि इस बीच जब से दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली चोरी के मामले में तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है, तब से संबंधित पुलिसवाले की कमाई और बढ़ गई है। बिजली कंपनियों को पता होता है कि चोरी के मामले या कटिया लगाकर बिजली जलाने के अगर महीने में एक-दो मामले भी पकड़ में आ जाए तो उसे उस इलाके के पूरे कनेक्शन से ज्यादा पैसे आ सकते हैं। सो, बिजली कंपनियों ने भी नायाब तरीका इस्तेमाल किया है। इसे पकड़ने से लेकर कोर्ट तक ले जाने के दौरान पुलिस की अच्छी-खासी कमाई हो जा रही है। बिजली कंपनियां तो कुछ लोगों को ठेके पर रखकर सिर्फ यही काम देती हैं कि किस-किस इलाके में बिजली चोरी हो रही है, इसकी सूचना भर मुहैया कराई जाए।

सूत्रों का कहना है कि पुलिसवाले का बिजली कंपनी से सीधा संपर्क होता है। संपर्क इस मामले में कि जैसे ही कटिया लगाकर या बिजली चोरी का आभास भर कंपनी को हुआ वे तुरंत अपनी टीम संबंधित ठिकाने


पर भेज देते हैं। वहां कोई अनहोनी न हो इसलिए दिल्ली पुलिस उस टीम के साथ होती है। पहले सीआइएसएफ बिजली कंपनियों के साथ होती थी। लेकिन कुछ इसी तरह के विवाद के कारण सीआइएसएफ ने अपनी सुरक्षा बिजली कंपनियों से हटा ली। बिजली चोरी की शिकायत दर्ज हुई नहीं कि कंपनियों और पुलिस का खेल शुरू हो जाता है। पुलिसवाले प्राथमिकी दर्ज करने के नाम पर उगाही शुरू करते हैं तो कंपनियां लाखों के बिल भेजने के नाम पर उपभोक्ताओं पर दबाव बनाती हैं।

जब बिजली कंपनियों ने कुछ घरों की बिजली काट दी तो केजरीवाल ने बिना कानूनी दांव-पेच में फंसने के यह अभियान चलाया था कि जरूरतमंदों के घर में बिजली जोड़ो। तब दिल्ली के बिजली मंत्री हारून युसूफ की शह पर कंपनियों ने केजरीवाल और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाने की चेतावनी दी थी। लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला और केजरीवाल ने अपने इस अभियान से लोकप्रियता प्राप्त कर ली। इस समय जब आप के 28 विधायक चुनकर आए तो केजरीवाल की हैसियत खुद बढ़ गई। अब बिजली कंपनियों को लगने लगा है कि अगर केजरीवाल सरकार बना लें या फिर विपक्ष में भी बैठें तो बिजली कंपनियों की शामत आने से कोई रोक नहीं सकता। इसलिए जिन लोगों को लाखों रुपए का जुर्माना किया गया और जो सालों से इसे भर नहीं रहे उनसे संपर्क कर सुलह के लिए बुलाया गया है। सुलह इस नाम पर हो रही है कि बिजली बिल के बाद जो जुर्माना है उसे आपस में मिल-बैठकर सुलझा लिया जाए और सरकार बनने से पहले ही इसे अदा कर छुट्टी कर ली जाए।

सूत्रों का कहना है कि बिजली कंपनियों के इस रवैए से दिल्ली पुलिस मुश्किल में फंस गई है। कारण जब कंपनियां प्राथमिकी दर्ज कराती थीं तो पुलिस वाले गिरफ्तारी का भय दिखाकर सुविधा शुल्क वसूलना अपना हक समझते थे। अब कंपनियां जब केजरीवाल के आने की आहट से इतने बड़े फैसले ले रही हैं तो फिर पुलिस को यह भय सताने लगा है कि कहीं दूसरी शामत उनके ऊपर न गिर जाए और विधायक अपने समर्थकों के साथ उन पुलिसवालों का घेराव कर शुल्क वापस करने का अभियान न चला दें जो पहले वे उपभोक्ताओं से वसूल चुके हैं।

शकरपुर में तीन दिन पहले एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हत्या की जानकारी मिलते ही आप के नवनिर्वाचित विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने एसएचओ से संपर्क कर मामले की जानकारी लेनी शुरू कर दी। बिन्नी पीड़ित परिवार के साथ न केवल देर रात तक रहे बल्कि उन्हें यह आश्वासन दिया कि वे अपने स्तर से इस मामले के आरोपी की गिरफ्तारी तक ही नहीं रुकेंगे बल्कि इस मामले में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ आयुक्त तक जाएंगे। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन देकर यह जता दिया कि आप इस तरह के मामले को नजरंदाज नहीं करेगी।

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