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राहुल गांधी ने की लोकपाल विधेयक की पैरवी PDF Print E-mail
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Sunday, 15 December 2013 09:28

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) को दिल्ली में मिली सफलता व तीन राज्यों में पार्टी की करारी हार के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने

लोकपाल विधेयक की जोरदार पैरवी करते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसका समर्थन करने की अपील की है। अब तक यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार और लोकपाल पर चुप्पी साधे रहे राहुल ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष में यह एक ताकतवर हथियार है।

 

 

 

कांग्रेस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में राहुल ने इन सुझावों को खारिज कर दिया कि सरकार दिल्ली के चुनाव में आप के हाथों मिली हार और अण्णा हजारे के अनशन की वजह से इस विधेयक पर खास जोर दे रही है। लोकपाल विधेयक पर सोमवार को राज्यसभा में चर्चा की संभावना के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि हमारा मकसद इस देश को एक मजबूत लोकपाल विधेयक देना है। हम 99 फीसद तक पहुंच चुके हैं। अब हमें राजनीतिक दलों से बाकी एक फीसद सहयोग की जरूरत है।

इस विधेयक पर समाजवादी पार्टी के विरोध का अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख करते हुए राहुल ने कहा कि सभी दलों को मिलकर इस विधेयक को पारित कराना चाहिए। मैं सभी दलों से इस विधेयक को समर्थन देने की अपील करता हूं। यह राष्ट्रीय महत्त्व का विधेयक है। कानून मंत्री कपिल सिब्बल, वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कार्मिक राज्यमंत्री वी नारायणसामी के साथ संवाददाता सम्मेलन में राहुल गांधी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह एक बहुत ही महत्त्व विधेयक है। यह भ्रष्टाचार से निपटने के लिए व्यापक ढांचे का एक हिस्सा है जिसका कि सबसे बड़ा हथियार सूचना का अधिकार कानून है।

यह पूछे जाने पर कि क्या दिल्ली के चुनाव में मिली हार और हजारे के अनशन के कारण सरकार की अचानक इस विधेयक में रुचि बनी है, राहुल ने कहा कि यह जीत और हार का सवाल नहीं है। इस विधेयक की जरूरत है। यह विधेयक हिंदुस्तान को मदद करेगा। यह तर्क सही नहीं कि चुनाव परिणामों के कारण हम ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा- यह विधेयक पारित हो, इसके लिए यूपीए


सरकार संघर्ष कर रही थी। लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी क्योंकि संसद अवरुद्ध है। इस सवाल पर कि क्या हजारे सरकार के प्रयासों से संतुष्ट हैं, कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि हमारा काम भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ढांचा खड़ा करने का है।

प्रवर समिति के विचार करने के बाद लोकपाल विधेयक विचार के लिए एक बार फिर शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया गया। लेकिन सपा सदस्यों के हंगामे के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी। राहुल गांधी ने कहा कि हमें अपने मतभेदों को दरकिनार कर एकजुट होकर इस विधेयक को अंजाम तक पहुंचाना चाहिए।

विधेयक पर सपा के विरोध के बारे में पूछने पर वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा- विधेयक पर कुछ दलों को कुछ आपत्ति हो सकती है। लेकिन कोई दल यह नहीं कह सकता है कि हमें लोकपाल नहीं चाहिए। उन्होंने कहा- हमारी उनसे अपील है कि वे अपनी आपत्तियों को एक किनारे रख दें। हम अंतिम पायदान को पार करना चाहते हैं और इसे कानून का रूप देना चाहते हैं। मैं समझता हूं कि देश को एक लोकपाल की जरूरत है और अगर राजनीतिक दल अपनी आपत्तियां छोड़ दें तो हमारे पास इसी सत्र में लोकपाल होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने लोकपाल विधेयक पर प्रवर समिति की रिपोर्ट में सिर्फ दो-तीन बदलाव किए हैं और कार्मिक राज्यमंत्री ने मूल विधेयक पर सरकारी संशोधन पेश किए हैं। विधेयक में ऐसा कुछ नहीं है जो लोकपाल की शक्ति को कम करता हो। यह एक स्वतंत्र जांच एजंसी को शक्ति प्रदान करता है। साथ ही यह सरकार, सरकार के कर्मचारियों और जांच एजंसियों के हितों को संतुलित करता है।

कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि हमारी मंशा बहुत साफ है। यूपीए सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो कदम उठाए हैं, वैसे किसी ने नहीं उठाए।

 

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