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शीतकालीन सत्र के पहले कामकाजी दिन में नहीं हुआ कोई काम PDF Print E-mail
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Monday, 09 December 2013 15:23

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के आज पहले कामकाजी दिन 2 जी स्पैक्ट्रम आवंटन घोटाले पर जेपीसी रिपोर्ट , मुजफ्फनगर में दंगा पीड़ितों के राहत शिविरों में बच्चों की मौत की खबरों , तेलंगाना तथा कई अन्य मुद्दों को लेकर विभिन्न दलों के सदस्यों द्वारा किए गए हंगामे के कारण दोनों सदनों की बैठक कई बार के स्थगन के बाद दोपहर करीब सवा दो बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

 

लोकसभा और राज्यसभा में आज सुबह कार्यवाही शुरू होते ही तेलुगू देशम पार्टी , वाम दलों और बसपा के सदस्य विभिन्न मांगों को लेकर आसन के समक्ष आ गए।

सदस्यों की नारेबाजी और हंगामे के कारण दोनों सदनों की बैठक सुबह दो बार स्थगित की गई। हंगामा शांत नहीं होने के कारण दोनों सदनों की बैठक दोपहर करीब सवा दो बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

इसी हंगामे के बीच लोकसभा में आज 2 जी स्पैक्ट्रम आवंटन पर संयुक्त संसदीय समिति की विवादास्पद रिपोर्ट पेश की गई।

लोकसभा में तेदेपा सदस्यों ने आंध्र प्रदेश के बंटवारे का विरोध किया और आसन के समक्ष आकर प्लेकार्ड दिखाए जिन पर लिखा था, ‘‘ आंध्र प्रदेश बचाओ’’।

बसपा सदस्यों ने भी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में राहत शिविरों में रह रहे दंगा पीड़ितों की दयनीय हालत को लेकर समाचार पत्रों की कापियां दिखाईं।

वाम दलों के सदस्यों ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत महंगाई के मुद्दे पर चर्चा नहीं कराए जाने के विरोध में हंगामा किया। केरल के कुछ सांसदों ने रबर आयात के खिलाफ प्रदर्शन किया और इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की।

हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष मीरा कुमार ने कार्यवाही पहली बार 12 बजे तक के लिए और दूसरी बार दो बजे तक स्थगित कर दी।

दो बजे भी स्थिति शांत नहीं हुई और उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।

उधर, राज्यसभा में भी बसपा सदस्य मुजफ्फरनगर राहत शिविरों में बच्चों की मौत की खबरों संबंधी समाचारपत्रों की प्रतियां लहराते हुए आसन के समक्ष आ गए और उत्तर प्रदेश की बसपा सरकार को बर्खास्त किए जाने की मांग करने लगे।

सपा


सदस्य भी आसन के समक्ष आकर महंगाई का मुद्दा उठा रहे थे लेकिन हंगामे के कारण उनकी बात नहीं सुनी जा सकी।

दो तेदेपा सदस्य सी एम रमेश और वाई एस चौधरी भी एकीकृत आंध्र प्रदेश के पक्ष में प्लेकार्ड लिए देखे गए।

अध्यक्ष हामिद अंसारी ने सदस्यों को शांत कराने की कोशिश की लेकिन व्यवस्था बनते न देख उन्होंने बैठक 12 बजे तक स्थगित कर दी।

12 बजे सदन की बैठक फिर से शुरू होने पर बसपा के सतीश चन्द मिश्रा मुजफ्फरनगर राहत शिविरों में ठंड के कारण 50 बच्चों की मौत होने के मुद्दे को उठाना चाहते थे लेकिन उपाध्यक्ष पी जे कुरियन ने उनसे बाद में यह मुद्दा उठाने को कहा।

इस पर अग्रिम पंक्तियों में मौजूद बसपा सदस्य सपा सरकार की बर्खास्तगी की मांग करते हुए आसन के समक्ष आ गए।

हंगामे के बीच ही कुरियन ने संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला और मानव संसाधन विकास मंत्री एम पल्लम राजू से उनके बयान एवं आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए।

इसके बाद कुरियन ने संविधान (अनुसूचित जातियां आदेश संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू करवाने के लिए शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री कुमारी शैलजा का नाम लिया। लेकिन हंगामे के कारण चर्चा शुरू नहीं हो सकी।

सदन में हंगामा थमते न देख कुरियन ने बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।

पांच दिसंबर से शुरू शीतकालीन सत्र में पहले दिन छत्तीसगढ़ के सरगुजा से लोकसभा सांसद मुरारी लाल सिंह के निधन और सपा के राज्यसभा सदस्य मोहन सिंह के निधन के कारण दोनों सदनों की बैठक दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई थी।

छह दिसंबर को भी दक्षिण अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला के निधन के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित हो गयी थी।

(भाषा)

 

 

 

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