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राहुल गांधी से हजार गुना ज्यादा समझदार हैं जयराम रमेश : नितिन गडकरी PDF Print E-mail
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Wednesday, 04 December 2013 17:40

नई दिल्ली। कांग्रेस नेतृत्व पर करारा हमला करते हुए भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने आज कहा कि जयराम रमेश राहुल गांधी से हजार गुना ज्यादा समझदार हैं ,लेकिन वह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष नहीं बन सकते।

 

अगला चुनाव कांग्रेस पार्टी के विचारों के आधार पर लड़ने की जयराम रमेश की बात पर यहां ‘एजेंडा आजतक’ कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि व्यक्ति केन्द्रित राजनीति तो कांग्रेस की संस्कृति रही है। सबकुछ सोनिया के इर्द-गिर्द चल रहा है। अगर कांग्रेस विचारों के आधार पर लड़ेगी तो लोकतंत्र में गुणात्मक परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश की समस्या विचार-भिन्नता नहीं, विचार शून्यता है।’’

गडकरी ने हकीकत से अलग अपनी पार्टी की छवि पेश किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कांग्रेस, सपा और राजद जैसी पार्टियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कोई पार्टी जाति और धर्म की राजनीति करके भी धर्मनिरपेक्ष हो जाती है जबकि भाजपा जाति को कितना भी नकार ले लेकिन वह सांप्रदायिक हो जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली में सेकुलरवाद के नाम पर ‘मल्टी कम्युनल क्लब’ बना है और हमें कम्युनल बताया जाता है।’’

कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जब ‘मल्टी कम्युनल’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ‘मल्टी कम्युनल’ सेकुलर हो जाता है तो गडकरी ने एक शेर पढ़ा, ‘‘एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं लोग।’’

आम सहमति के मुद्दे पर गडकरी ने कहा कि लोकतंत्र में खुली बातचीत होनी चाहिए, लेकिन ये बातचीत सार्वजनिक रूप से नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘जब प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री हुआ करते थे तो वह बातचीत किया करते थे। मैं इसकी तारीफ करता हूं।’’

गडकरी ने सत्तारूढ़ संप्रग पर आरोप लगाया कि जब वह तीन साल तक भाजपा के अध्यक्ष रहे तो उनकी पार्टी को कभी भी संवाद के लिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि ये विधेयक के संसद में आने से पहले चर्चा करते हैं उससे पहले संवाद नहीं करते। गडकरी ने कहा कि अगर संवाद नहीं होगा तो विवाद होगा और देश को नुकसान होगा।

राहुल गांधी के लोकतंत्र का दरवाजा गरीबों, कमजोर वर्ग के लिए खोलने की बातों पर कटाक्ष करते हुए गडकरी ने कहा कि इसकी शुरूआत राहुल गांधी खुद से करें। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की एकमात्र योग्यता है कि वे राजीव गांधी के पुत्र हैं।

भाजपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी में आकर कार्यकर्ता पूछते हैं कि उन्हें टिकट क्यों नहीं दिया गया। क्या कांग्रेस में आप सोनिया गांधी के पास जाकर यही सवाल पूछ सकते


हैं। भीतर घुस सकते हैं। गडकरी ने कहा, ‘‘यह कांग्रेस में ही होता है कि प्रधानमंत्री के पेट से प्रधानमंत्री पैदा होता है।’’

गडकरी के इस बयान पर मंच पर ही मौजूद रमेश ने आपत्ति जताई और कहा कि गडकरी आरएसएस के समर्थन से भाजपा अध्यक्ष बने थे। हालांकि, गडकरी ने अपने अध्यक्ष बनने में आरएसएस की भूमिका होने से इंकार किया।

गडकरी ने कहा कि वह पोस्टर चिपकाते थे। उन्होंने किसी को माला नहीं पहनाई। वह कभी किसी की अगवानी करने हवाई अड्डे नहीं गए। उन्होंने कहा कि वह कुर्ता पाजामा नहीं पहनते। कई लोगों ने कहा कि राजनीति नहीं कर पाओगे। लेकिन उनकी बात गलत साबित हुई। वह सबसे युवा नेता बने जो अध्यक्ष की उस कुर्सी पर बैठा जिसपर अटल जी बैठे थे। उन्होंने कहा कि मोदी जी को देखिए। उनकी मां अब भी एक छोटे से घर में रहती हैं।

कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जयराम रमेश राहुल गांधी से हजार गुना समझदार हैं लेकिन वह पार्टी अध्यक्ष नहीं बन सकते।’’ इसपर रमेश ने हंसते हुए कहा, ‘‘आप मुझे बेरोजगार करना चाहते हैं।’’

कार्यपालिका के काम में अदालतों के हस्तक्षेप पर गडकरी ने कहा, ‘‘अदालतों को मर्यादा पार नहीं करनी चाहिए। हमारी कैबिनेट और प्रधानमंत्री सर्वोच्च हैं। चारों अंगों को मर्यादा के भीतर काम करना चाहिए। न्यायपालिका कानून की व्याख्या कर सकती है लेकिन दिल्ली में पार्किंग जैसे मुद्दों पर उच्चतम न्यायालय का फैसला कहां तक जायज है।’’

सीबीआई के कथित ‘कोड़े’ पर गडकरी ने कहा कि खुद सरकार ने ये नौबत पैदा कर दी है। कभी लालू, कभी मुलायम को फटकार लगाई जाती है। इसपर हस्तक्षेप करते हुए रमेश ने कहा कि उसने प्रधानमंत्री को भी नहीं छोड़ा। गडकरी ने कहा कि सभी को अधिकार क्षेत्र में रहना चाहिए।

भाजपा में कई नेता होने जबकि कांग्रेस में सिर्फ राहुल और सोनिया के सामने होने के सवाल पर गडकरी ने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी का उपाध्यक्ष इतना मजबूत है कि सरकार का विधेयक फाड़ देता है। वहां परिवार मजबूत है, सरकार कमजोर।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा में लोकतंत्र है इसलिए कई नेता हैं।’’

इसपर मंच पर मौजूद रमेश ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘आप सब्सिडियरी हैं, होल्डिंग पार्टी तो नागपुर में बैठी है।’’

(भाषा)

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