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सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक तुष्टीकरण का हथियार, संसद में भाजपा करेगी विरोध PDF Print E-mail
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Tuesday, 03 December 2013 17:37

नई दिल्ली। सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा रोकथाम विधेयक को ‘साम्प्रदायिक’ करार देते हुए भाजपा ने आज आरोप लगाया कि कांग्रेस नीत सरकार इस भेदभावपूर्ण विधेयक को लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ला रही है जिसका संसद में वह पुरजोर विरोध करेगी।

भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने यहां प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘‘देश में सौहार्द का माहौल कायम करने और गलत कार्य करने वालों के मन में भय पैदा करने की बजाए यह प्रस्तावित विधेयक समाज को बांटने और साम्प्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण पैदा करने का काम करेगा।’’

उन्होंने कहा कि यह विधेयक कथित साम्प्रदायिक राजनीति करने वाली कांग्रेस का वोटबैंक की राजनीति करने और तुष्टीकरण करने का हथियार है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ कांग्रेस के पास बोलने के लिए कुछ भी नहीं है। एक के बाद एक घोटालों पर उनके पास कोई जवाब नहीं है । इसी को ध्यान में रखते हुए सत्तारूढ़ पार्टी इस तरह के हथकंडे अपना रही है।’’

सीतारमण ने कहा कि यह विधेयक अत्यंत भेदभावपूर्ण है और संसद द्वारा इस तरह का कानून बनाना राज्यों के अधिकारक्षेत्र में हस्तक्षेप करना होगा।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा दो साल पहले सौंपे गये इस विधेयक के मसौदे का भाजपा ने पुरजोर विरोध किया था। इसके बाद


संशोधित मसौदा तैयार किया गया है लेकिन पार्टी को उसे नहीं दिखाया गया।

सीतारमण ने कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इसका मसौदा भेजा गया, इससे जो भी जानकारी प्राप्त हुई है, उसके आधार पर हम कह सकते हैं कि संशोधित प्रारूप में कोई अंतर नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘पार्टी इसे संसद में पेश किये जाने पर पुरजोर विरोध करेगी।’’

उन्होंने कहा कि यह विधेयक अत्यंत भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह जन्म के आधार पर अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के बीच भेदभाव करता है और प्रस्तावित प्राधिकारों को अनियंत्रित अधिकार देता है । मुख्यमंत्रियों ने भी विधेयक का यह कहकर विरोध किया था कि यह संविधान के संघीय ढांचे के खिलाफ होगा।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि लोकसभा चुनावों से पहले सांप्रदायिक आधार पर देश का धु्रवीकरण करने के उद्देश्य से इसे पेश करने की कोशिश की जा रही है जबकि अभी संबद्ध पक्षों से पर्याप्त विचार विमर्श नहीं किया गया है ।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मसौदा विधेयक पर कडा विरोध जताया है।

(भाषा)

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