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बढ़ती ऊर्जा मांग पूरी करने के लिए बाजार आधारित मूल्य व्यवस्था जरूरी : मनमोहन सिंह PDF Print E-mail
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Tuesday, 03 December 2013 15:56

नई दिल्ली। ऊर्जा खपत के मामले में देश के अगले सात वर्ष में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बनने की संभावनाओं के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं बाजार आधारित मूल्य व्यवस्था जरूरी है।

 

8वें एशिया गैस भागीदारी शिखर सम्मेलन के अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह  ने कहा, ‘‘देश को अगले दो दशकों में अपनी ऊर्जा आपूर्ति तीन से चार गुना तक बढ़ाने की आवश्यकता है।’’ ईंधन एवं ऊर्जा उत्पादन के मामले में फिलहाल भारत का दुनिया में सातवां नंबर है।

मनमोहन सिंह ने कहा, ‘‘देश की ऊर्जा खपत में तेल एवं गैस की हिस्सेदारी करीब 41 फीसद है और वर्ष 2020 तक भारत के कुल ऊर्जा खपत के मामले में दुनिया का तीसरा बड़ा देश बन जाने की संभावना है।’’

इस समय भारत ऊर्जा खपत के मामले में अमेरिका, चीन और जापान के बाद चौथा बड़ा उपभोक्ता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा की मांग एवं आपूर्ति के फासले को कम करने के लिए सरकार घरेलू एवं वैश्विक कंपनियों को देश विदेश में में तेल एवं गैस की खोज के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

उन्होंने अमेरिकी शैल गैस का उदाहरण देते हुए कहा प्रौद्योगिकी एवं बाजार आधारित मूल्य निर्धारण नीति पर चलते हुए गैरपरंपरागत गैस संसाधन के दोहन में मदद मिली है और देश इससे ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की स्थिति में पहुंच गया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह (प्रौद्योगिकी एवं बाजार आधारित मूल्य निर्धारण) एक ऐसा गठजोड़ है, जो कि हमारी जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के लिए जरूरत के अनुरूप ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है।’’

उन्होंने कहा कि इसके अलावा देश ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।  दूसरे देशों में संपत्तियों का अधिग्रहण इसमें से एक विकल्प है।

उल्लेखनीय है कि भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकता का करीब 80 प्रतिशत तेल आयात करता है जबकि अपनी कुल आवश्यकता की आधे से अधिक गैस आयात करता है। भारत कच्चे तेल के लिए बाजार आधारित मूल्य निर्धारण प्रणाली अपनाता है, जबकि गैस मूल्य के मामले में अलग अलग व्यवस्थाएं हैं।

एक अप्रैल 2014 से गैस की नई मूल्य निर्धारण प्रणाली की परिकल्पना की गई है, जिसके अनुसार गैस के लिए करीब दोगुनी


दरें तय की गई हैं। यह दर 8.2 से 8.4 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट की दर होगी। हालांकि, यह भी बाजार कीमत से कम है।

सिंह ने कहा, ‘‘मैं ऊर्जा के नए श्रोतों की खोज के लिए स्थिर और अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता के प्रति निवेशकों को आश्वस्त करता हूं।’’

मनमोहन ने कहा कि देश में प्राकृतिक गैस की काफी मांग है लेकिन हमारे जैसे देश पर्याप्त मात्रा में इसका आयात नहीं कर पाते हैं क्योंकि प्राकृतिक गैस के मामले में खरीदार और विक्रेता के बीच मूल्यों को लेकर मतभेद हैं।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक गैस पसंदीदा ईंधन है। यह विद्युत उत्पादन के लिये सक्षम ईंधन और वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन विकल्प उपलब्ध कराती है।

मनमोहन ने कहा ‘‘पिछले कुछ सालों से देश में प्राकृतिक गैस ईंधन स्रोत के तौर पर महत्वपूर्ण बनती जा रही है। प्राकृतिक गैस खपत वृद्धि के मामले में सभी तरह के वाणिज्यिक ऊर्जा स्रोतों में सबसे ऊपर है।’’

उन्होंने कहा कि इसकी कई वजह है। इनमें पर्यावरण को लेकर चिंता भी शामिल है। इसके अलावा ईंधन विविधिकरण, ऊर्जा कीमतें और बाजार में विनियंत्रण जैसी आवश्यकतायें भी इसकी वजह हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक गैस क्षेत्र में हाल के वर्षों में व्यापक बदलाव आए हैं। ‘‘अमेरिका में शेल गैस की तीव्र वृद्धि ने इसी तरह की सफलता की दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी संभावनाए बढ़ा दी हैं।’’

उन्होंने ईंधन क्षेत्र में नये उत्पादक, नए उपभोक्ता और नई व्यापार व्यवस्था होने की उम्मीद जताते हुए कहा ‘‘हमें भी इसकी उम्मीद है कि हम भी देश में शेल गैस के भंडार खोजने में कामयाब होंगे।’’

दुनिया में तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की मांग के मामले में एशिया सबसे आगे रहा है। दुनिया में एलएनजी के कुल व्यापार में 70 प्रतिशत हिस्सा एशिया का है।

मनमोहन ने सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे नेताओं और प्रतिनिधियों से कहा कि भारत में गैस पाइपलाइन विकास, एलएनजी टर्मिनल, पेट्रोकेमिकल्स, गैस व्यापार केन्द्रों और शहरी गैस वितरण क्षेत्र में संयुक्त निवेश के जरिये भागीदारी निभाने के बेहतर अवसर उपलब्ध हैं।

(भाषा)

 

 

 

 

 

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