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‘सीबीआई मामले, कैग की टिप्पणी से पेट्रोलियम मंत्रालय में नीतिगत शिथिलता’ PDF Print E-mail
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Tuesday, 03 December 2013 13:14

नई दिल्ली। डीजीएच के खिलाफ सीबीआई के मामले तथा कैग की प्रतिकूल टिप्पणी से पेट्रोलियम मंत्रालय में नीतिगत शिथिलता आई है।

 

पिछले सप्ताह मुंबई में निवेशकों के समक्ष प्रस्तुती में संयुक्त सचिव (उत्खनन) ए गिरिधर ने यह बात कही। उन्होंने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में फैसले लंबित होने के कारणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्रालय में अधिकारी निर्णय को मंजूरी देते हैं लेकिन औपचारिक आदेश देने से इनकार करते है जिससे तेल एवं गैस के उत्पादन में देरी होती है।

यहां उपलब्ध प्रस्तुती की प्रति के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘कई उत्पादन साझेदारी अनुबंधों (पीएससी) पर कैग की प्रतिकूल टिप्पणी तथा डीजीएच, कर्मचारी तथा मंत्रालय  के कर्मचारियों के खिलाफ सीबीआई मामले के कारण मनोबल प्रभावित हुआ। फैसले के लंबित होने के पीछे यही कारण है।’’

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग)


ने सितंबर 2011 में सरकार तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के बीच हस्ताक्षरित पीएससी के मामले में खराब प्रशासन तथा कंपनियों के खर्चों पर निगरानी नहीं करने को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय को आड़े हाथ लिया था।

वहीं दूसरी तरफ सीबीआई रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के केजी-डी6 ब्लाक से जुड़े मुद्दों के निपटान के मामले में हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) द्वारा कथित अनियमितता तथा पक्षपात को लेकर जांच कर रही है।

पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली तथा पेट्रोलियम सचिव विवेक राय की मौजूदगी  में गिरिधर ने 2009 से लंबित नीतिगत मुद्दों को भी रेखांकित किया।

(भाषा)

 

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