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कांग्रेस ने खारिज की बहस की मांग, कहा- पार्टी का रुख साफ PDF Print E-mail
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Tuesday, 03 December 2013 09:19

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 पर नरेंद्र मोदी की ओर से भाजपा का रुख

नरम किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्य विपक्षी दल ने सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री पद के उसके उम्मीदवार ने इस रुख को और कड़ा किया है। उधर कांग्रेस ने अनुच्छेद 370 पर बहस की गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की मांग को खारिज करते हुए उन्हें इस मुद्दे पर पहले संघ परिवार के साथ विचार-विमर्श करने की सलाह दी। पार्टी ने कहा कि उसका रुख इस मुद्दे पर पहले से ही साफ है।

 

 

गौरतलब है कि मीडिया की खबरों के मुताबिक जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने के रुख में लचीलापन लाते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा था कि इस बात पर बहस की जानी चाहिए कि संविधान के इस प्रावधान से राज्य को कोई फायदा हुआ है या नहीं।

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने यहां साझा प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मोदी ने रविवार को जम्मू की अपनी रैली में जिस लहजे में इस विषय पर अपनी बात कही उसे मीडिया में दूसरे रूप में पेश किया गया। सुषमा के मुताबिक मोदी ने सवाल उठाया कि ‘अनुच्छेद 370 से कोई लाभ हुआ है या नहीं, यह तो बता दो। इस पर तो चर्चा कर लो।’ और इसी का उल्लेख करते हुए अब कहा जा रहा है कि मोदी ने अनुच्छेद 370 पर चर्चा कराने और पार्टी के रुख में नरमी लाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इससे रुख में नरमी नहीं आई बल्कि इससे रुख और कड़ा हुआ है। जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस के अलावा अलग से जारी बयान में भी कहा- किसी का भी यह व्याख्या करना गलत होगा कि इस बारे में भाजपा की ओर से बहस की चुनौती देना, अनुच्छेद 370 पर उसके रुख में नरमी का संकेत है। मोदी ने अपने रविवार के के बयान से उठे विवाद के बाद सोमवार को ट्वीट के जरिए सफाई देते हुए लिखा है कि हमें न केवल अनुच्छेद 370 बल्कि जम्मू कश्मीर में समाज के एक वर्ग समेत दूसरे मुद्दों पर व्यवहारिक और केंद्रित बहस कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इन विचारों के प्रवर्तकों ने जम्मू कश्मीर और शेष भारत के बीच संवैधानिक और राजनीतिक संबंधों को कमजोर किया है। अलग राज्य का सफर अलगाववाद की ओर जाता है, एकजुटता की ओर नहीं। अनुच्छेद 370 पर बहस कराने की भाजपा की मांग को


इस विषय पर रुख में नरमी लाना समझना गलत होगा।

संविधान के अनुच्छेद 370 पर बहस की गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मांग को खारिज करते हुए कांग्रेस ने उन्हें इस मुद्दे पर पहले संघ परिवार के साथ विचार-विमर्श करने की सलाह दी। पार्टी ने कहा कि सत्तारूढ़ दल का रुख इस पर पहले से ही स्पष्ट है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि वे मोदी के बयानों को बहुत गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार एक स्थान से दूसरे स्थान पर अपने बयान बदलते रहते हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री इतिहास से अनभिज्ञ हैं और अनेक मुद्दों पर असत्य बोल रहे हैं। जहां तक मेरी पार्टी का संबंध है, इस मुद्दे (अनुच्छेद 370) पर स्थिति स्पष्ट है। मोदी अगर इस पर बहस करना चाहते हैं तो उन्हें इस पर भाजपा और संघ परिवार के अंदर चर्चा करनी चाहिए। अगर मोदी, भाजपा और संघ परिवार अपने बीच इस पर चर्चा करते हैं तो हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

इस बीच विस्थापित कश्मीरी पंडितों के संगठन पनून कश्मीर ने अनुच्छेद 370 पर बहस कराने के नरेंद्र मोदी के सुझाव का समर्थन किया है। पनून कश्मीर के अध्यक्ष अश्वनी चरूंगू ने सोमवार को यहां कहा- हमारे संगठन के राजनीतिक मामलों की समिति ने अनुच्छेद 370 पर बहस को लेकर मोदी के बयान का स्वागत किया है। हम इसकी कड़ी वकालत करते हैं। यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि अनुच्छेद 370 भारत के संविधान में अस्थायी प्रावधान है जिसे कभी भी स्थायी कानून नहीं बनाया जाना था। भाजपा की राज्य इकाई ने आज जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की आलोचना करते हुए उन्हें अनुच्छेद 370 पर भाजपा के किसी भी नेता के साथ बहस करने की चुनौती दी । उमर ने इस अनुच्छेद पर बहस कराने के नरेंद्र मोदी की टिप्पणी की आलोचना की थी। राज्य भाजपा के अध्यक्ष और विधायक जुगल किशोर शर्मा ने सोमवार को जम्मू में संवाददाताओं से कहा- हम अनुच्छेद 370 पर बहस के लिए उनकी(उमर) चुनौती को स्वीकार करते हैं। किसी भी भाजपा नेता के साथ बहस के लिए वे आगे आ सकते हैं।

उमर ने रविवार को इस मुद्दे पर मोदी की आलोचना करते हुए कहा- मैं उन्हें या उनके किसी भी नेता को चुनौती देता हूं कि अनुच्छेद 370 की धाराओं पर बहस कर लें।

 

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