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‘‘धीमी रफ्तार से कम हुआ कोलकातावासियों का तनाव’’ PDF Print E-mail
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Monday, 02 December 2013 21:40

कोलकाता। सांस्कृतिक विरासतों को सहेजने, धीमा आर्थिक विकास और विस्थापन की धीमी रफ्तार के चलते ही कोलकातावासी मानसिक तनाव से मुकाबला करने में सक्षम हुए हैं और अन्य महानगरों की तुलना में यहां के लोगों में खुदकुशी की दर भी कम हुई है। यह दावा एक विशेषज्ञ ने किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाहकार मनोचिकित्सक लक्ष्मी विजयकुमार ने कहा, ‘‘अन्य महानगरों के विपरीत कोलकाता अर्थव्यवस्था के नजरिये से तेजी से नहीं बढ़ा है। विकास बहुत धीमा रहा है और शहर रातों-रात बदला नहीं है। इससे लोगों को चीजों को सुलझाने में और तनाव से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिली है।’’

अवसाद और आत्महत्या के चलन पर चर्चा करने के लिए लाइफलाइन फाउंडेशन द्वारा आयोजित 16वें नेशनल बीफ्रेंडर्स इंडिया कांफ्रेंस से इतर विचार रखते हुए लक्ष्मी ने कहा कि अन्य महानगरों में शहरी तनाव का स्तर कोलकाता की तुलना में बहुत ज्यादा है।

उन्होंने कहा, ‘‘तनाव शिक्षा से जुड़ा है।


ज्यादा डिग्रियां मतलब महती आकांक्षाएं और नाकाम होने पर निराशा।’’

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़ों के अनुसार कोलकाता में खुदकुशी की दर महज 2.6 प्रति लाख है जबकि चेन्नई इस सूची में 29 प्रति लाख के आंकड़े के साथ सबसे ऊपर है। बेंगलूर दूसरे नंबर पर आता है जहां एक लाख में से 24 लोग खुदकुशी कर लेते हैं। दिल्ली और मुंबई में यह आंकड़ा क्रमश: 9 और 7 है।

भारत में औसतन हर घंटे 15 लोग आत्महत्या कर लेते हैं।

लक्ष्मी ने कहा कि कोलकाता ने जिस तरह परंपराओं का पालन करते हुए और सांस्कृतिक विरासतों को सहेजते हुए अपनी जड़ों से नाता बनाये रखा है, उससे भी लोगों को तनाव से निपटने में मदद मिलती है।

(भाषा)

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