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अनुच्छेद 370 पर नरेन्द्र मोदी के बयान पर बहस शुरू PDF Print E-mail
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Monday, 02 December 2013 20:44

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 पर नरेन्द्र मोदी के बयान पर बहस शुरू हो गई है जहां कांग्रेस तथा जम्मू कश्मीर के दलों ने प्रावधान की किसी तरह की समीक्षा की बात को खारिज कर दिया, वहीं इस मुद्दे पर भाजपा ने रूख नरम किए जाने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

 

राज्य की मुख्यधारा की पाटियों ने मोदी के उस बयान को भी खारिज कर दिया कि लड़कियों के राज्य से बाहर विवाह करने पर उनके स्थायी निवासी का अधिकार समाप्त हो जाता है।

वहीं, मुख्य विपक्षी दल ने आज दावा किया कि वस्तुत: उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने इस रूख और कड़ा किया है।

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी ने कल जम्मू की अपनी रैली में जिस लहजे में इस विषय पर अपनी बात कही, उसे मीडिया में दूसरे रूप में पेश किया गया।

सुषमा के अनुसार, ‘‘मोदी ने सवाल उठाया कि ‘अनुच्छेद 370 से कोई लाभ हुआ है या नहीं, यह तो बता दो। इस पर तो चर्चा कर लो।’ और इसी का उल्लेख करते हुए अब कहा जा रहा है कि मोदी ने अनुच्छेद 370 पर चर्चा कराने और पार्टी ने रूख में नरमी लाने की बात कही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इससे रूख में नरमी नहीं आई बल्कि इससे रूख और कड़ा ही हुआ है।’’

मोदी ने अपने कल के बयान से उठे विवाद के बाद आज ट्वीट के जरिए सफाई देते हुए लिखा है कि उन्होंने तो अनुच्छेद 370 और कश्मीरी पंडितों की पीड़ा समेत अन्य मुद्दों पर व्यवहारिक और केन्द्रित बहस कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें न केवल अनुच्छेद 370 बल्कि जम्मू कश्मीर में समाज के एक वर्ग समेत अन्य मुद्दों पर व्यवहारिक एवं केन्द्रित बहस कराने की जरूरत है।’’ इस मुद्दे को उठाने का श्रेय लेने का प्रयास करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘ मुझे इस बात की खुशी है कि अनुच्छेद 370 पर चर्चा कराने के मेरे आह्वान के बाद इस विषय पर लोगों, टीवी और सोशल मीडिया में काफी चर्चा हो रही है।’’

नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और माकपा समेत मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने विभाजनकारी मुद्दों को उठाने के लिए मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि स्थायी स्वरूप होने के कारण अनुच्छेद 370 में संवैधानिक संशोधन भी नहीं किया जा सकता है।

मोदी की आलोचना करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अनुच्छेद 370 और राज्य सूची के कानून पूरी तरह से अलग है और इन दोनों में भ्रम पैदा करने के लिए मोदी की आलोचना की।

उमर ने कहा, ‘‘ मेरी समस्या कानून के बारे में गलत जानकारी की नहीं है। मेरी समस्या मोदी जैसे लोगों से जुड़ी है जो जानबूझकर या अनजाने में राज्य सूची के कानूनों को अनुच्छेद 370 से जोड़ने का प्रयास करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ कुछ समय पहले


ही वे जम्मू कश्मीर और पंजाब के बीच सीमा पर स्थित मधोपुर आए थे और अनुच्छेद 370 को पूर्ण रूप से समाप्त करने की बात कही थी। वह जम्मू कश्मीर में क्या कहते हैं और देश के अन्य हिस्से में क्या कहते हैं, इस विषय को हमें देखना होगा। मैं इंतजार करूंगा कि भाजपा अपने घोषणापत्र में क्या पेश करती है।’’

उमर ने कहा, ‘‘ अनुच्छेद 370 केंद्र और राज्य के बीच संबंधों को तय करती है। यह सेतु है जो जम्मू कश्मीर से देश के शेष हिस्से को जोड़ता है।’’

लड़कियों के राज्य से बाहर विवाह के बाद स्थायी निवास के जुड़े सवालों पर उमर ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया।’’

पीडीपी नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि मोदी की टिप्पणी राज्य में विभाजन पैदा करती है और राज्य तथा शेष भारत में विश्वास की कमी बढ़ाने का काम करती है।

उन्होंने कहा कि मोदी देश के शीर्ष पद पर आरूढ होना चाहते हैं और अनुच्छेद 370 जैसे संवेदनशील विषय पर उनका रूख परेशान करने वाला संकेत है।

राज्य में महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिलने के मुद्दे पर मुफ्ती ने कहा कि यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है कि महिलाओं को समान अधिकार नहीं है।

जेटली ने संवाददाता सम्मेलन के अलावा अलग से जारी बयान में भी कहा, ‘‘किसी के भी द्वारा (मोदी के बयान की) यह व्याख्या करना गलत होगा कि इस बारे में भाजपा द्वारा बहस की चुनौती देना अनुच्छेद 370 पर उसके रूख में नरमी का संकेत है।’

अरूण जेटली ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि पृथक राज्य संबंधी नेहरूवादी दृष्टि ने जम्मू कश्मीर को 1953 से पूर्व का दर्जा देने, स्वशासन और यहां तक की आजादी की आकांक्षा को जन्म दिया है।

जेटली ने कहा कि इन विचारों के प्रवर्तकों ने जम्मू कश्मीर और शेष भारत के बीच संवैधानिक और राजनीतिक संबंधों को कमजोर किया है। पृथक राज्य का सफर अलगाववाद की ओर जाता है, एकजुटता की ओर नहीं। ‘‘अनुच्छेद 370 पर बहस कराने की भाजपा की मांग को इस विषय पर रूख में नरमी लाना समझना गलत होगा।’’

गौरतलब है कि मीडिया की खबरों के अनुसार, जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने के रूख में लचीलापन लाते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने कल कहा था कि इस बात पर बहस की जानी चाहिए कि संविधान के इस प्रावधान से राज्य को कोई फायदा हुआ है या नहीं।

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘‘संविधान के अनुसार इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि अनुच्छेद 370 समाप्त हो या जारी रहे... कम से कम इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि अनुच्छेद 370 से जम्मू कश्मीर को फायदा हुआ है या नहीं।’’

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