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अर्थव्यवस्था को लेकर वित्त मंत्री आशावान, 5 प्रतिशत वृद्धि दर की उम्मीद PDF Print E-mail
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Monday, 02 December 2013 20:08

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर पेश करते हुए वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने आज कहा कि मौजूदा दबाव के बावजूद चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 5 प्रतिशत रहेगी।

यहां एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘‘हम दबाव के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन उम्मीद अब भी कायम है... हमें उम्मीद हैं कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में चीजें बेहतर होंगी।’’

वित्त मंत्री ने दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर 4.8 प्रतिशत की वृद्धि दर, चालू खाते के घाटे में सुधार और निर्यात में तेजी लौटने सहित विभिन्न कारकों के आधार पर यह उम्मीद जाहिर की।

चिदंबरम ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 5 प्रतिशत रहने की संभावना है।

उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर से संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है और दूसरी तिमाही का निष्पादन अनुमान के मुताबिक रहा।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि विनिर्माण, निर्यात क्षेत्र का बेहतर निष्पादन जैसे कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हाल के सुधार और सरकार द्वारा किए गए उपायों से अर्थव्यवस्था में और सुधार आने की संभावना है।

चिदंबरम ने यह भरोसा भी जताया कि सरकार 40,000 करोड़ रूपए का विनिवेश लक्ष्य हासिल करने में समर्थ रहेगी और साथ ही वह राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.8 प्रतिशत के भीतर रखने में कामयाब रहेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी नजर अब भी लक्ष्य पर है। हम 40,000 करोड़ रूपए का विनिवेश लक्ष्य हासिल करने की दिशा में हैं।’’

चिदंबरम ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में राजकोषीय घाटा ऊंचा रहा। ‘‘किसी भी माह के अंत में राजकोषीय घाटा सही तस्वीर पेश नहीं करता क्योंकि खर्च आमतौर पर अधिक होता है और राजस्व पीछे होता है। हम राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.8 प्रतिशत पर रखेंगे।’’

वर्ष 2013-14 के प्रथम


सात महीनों (अप्रैल-अक्तूबर) में राजकोषीय घाटा पूरे साल के बजट अनुमान के 84.4 प्रतिशत पर पहुंच गया।

चिदंबरम ने कहा कि अक्तूबर अंत में योजनागत व्यय, बजट अनुमान का 48.3 प्रतिशत रहा जो पिछले साल 43.2 प्रतिशत था। अक्तूबर तक शुद्ध कर व गैर कर राजस्व, बजट अनुमान का 43.2 प्रतिशत रहा जो पिछले साल भी इसी स्तर पर था।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘दूसरी छमाही की शुरूआत में कुछ हलचल दिखी है। हम कर संग्रह में तेजी लाएंगे और राजस्व संग्रह में तेजी आते ही हमें उम्मीद है कि हम राजकोषीय घाटे को लक्ष्य के भीतर रखने में सफल रहेंगे।’’

उन्होंने कहा कि सरकार स्पेक्ट्रम की बिक्री से 40,000 करोड़ रूपए के बजट अनुमान से अधिक राशि प्राप्त करेगी।

मुद्रास्फीति के संबंध में पूछे गए सवाल पर चिदंबरम ने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने की प्रधान जिम्मेदारी और सभी उपकरण राज्य सरकारों के पास हैं।

‘‘पिछले कई सालों से राज्य सरकारें बड़ी सहजता से अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ती रही हैं और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराती रही हैं। लेकिन, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि केंद्र सरकार जिम्मेदार नहीं है, लेकिन खाद्य मुद्रास्फीति से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।’’

‘‘उन्हें जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.. उन्हें व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करना चाहिए और आपूर्ति में सुधार के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए।’’

उल्लेखनीय है कि उच्च खाद्य कीमतों के चलते अक्तूबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 10.09 प्रतिशत पर पहुंच गई। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्तूबर में 8 माह के उच्च स्तर 7 प्रतिशत पर रही।

(भाषा)

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