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‘राज्य, केंद्रशासित प्रदेश आपराधिक मामलों में पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग पर जवाब दे’ PDF Print E-mail
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Monday, 02 December 2013 19:07

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आपराधिक मामलों की जांच और सुनवाई के दौरान उनकी पुलिस द्वारा मीडिया ब्रीफिंग के लिए पालन किए जाने जाने वाले तौर तरीके के बारे में जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति ए बोबदे की एक पीठ ने उन्हें नोटिस जारी किया और चार हफ्ते में उनका जवाब मांगा है।

पीठ ने कहा कि न्यायालय उन मुद्दों पर भी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब चाहेगा जो उसने 23 अगस्त के आदेश में उठाए थे। उस दिन पीठ ने केंद्र और सीबीआई से कुछ सवालों का हल करने को कहा था।

राज्य सरकारों से यह बताने को कहा गया है कि कुछ खास लंबित मामलों जैसे कि आतंकवाद या दंगा जैसे मामले जिनमें किसी समुदाय के नाम का खुलासा नहीं किया जाना हो, उस पर बोलने के लिए क्या पुलिस को उनकी इजाजत की जरूरत है।

पीठ ने अधिकारी


के रैंक पर विचार किया जो मीडिया से बात कर सकते हैं क्योंकि पीठ ने कहा, ‘‘हम देखते हैं कि यहां तक हेड कांस्टेबल और उन निरीक्षक भी प्रेस को जांच की प्रगति के बारे बताते हैं।’’

अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल पीपी मल्होत्रा ने दलील दी कि चूंकि केंद्र, सीबीआई, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार न्यायालय के समक्ष है, ऐसे में सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किए जाने की जरूरत है।

इस विषय में न्यूज ब्राडकॉस्टिंग एसोसिएशन भी शामिल है जिसका गठन इलेक्ट्रानिक मीडिया के स्व नियमन के लिए किया गया है।

दरअसल, न्यायालय 2008 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है जो नोएडा में हुए आरूषि और हेमराज दोहरा हत्याकांड के मद्देनजर दायर की गई थी।

(भाषा)

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