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सरकार को कठघरे में लाने की विपक्ष की तैयारी PDF Print E-mail
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Monday, 02 December 2013 09:38

जनसत्ता ब्यूरो

नई  दिल्ली। आगामी पांच दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र पर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों की छाया रहेगी।

जिसमें अलग तेलंगाना राज्य पर महत्वपूर्ण विधेयक रखा जा सकता है। लोकसभा चुनावों में बहुत अधिक समय नहीं बचा है। ऐसे में 8 दिसंबर को घोषित होने वाले विधानसभा चुनाव परिणाम दिखाएंगे कि राजनीतिक हवा किस ओर बह रही है। इनकी छाया संसद सत्र पर भी दिखाई दे सकती है।

 

एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक संसद के पहले दो दिन में बहुत अधिक कामकाज होने की संभावना नहीं है। हर साल छह दिसंबर को गैर-भाजपाई दल 1992 में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस के खिलाफ प्रदर्शन कर संसद की कार्यवाही बाधित करते रहे हैं।  कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जहां भाजपा और प्रधानमंत्री पद के पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर जासूसी कांड को लेकर निशाना साध सकते हैं। वहीं विपक्षी दलों ने महंगाई से लेकर कोयला घोटाले तक अनेक विषयों पर हमले की तैयारी कर रखी है।

इस सत्र में केवल 12 बैठकें होनी हैं और सरकार के प्रबंधकों व विपक्षी रणनीतिकारों को ज्यादा कामकाज की उम्मीद नहीं है। जहां अलग तेलंगाना राज्य को लेकर विधेयक लाने के प्रयास चल रहे हैं। वहीं अन्य किसी महत्वपूर्ण विधेयक के आने की संभावना नहीं है। इस तरह के संकेत हैं कि अगले आम


चुनावों से पहले सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए यह अंतिम सत्र हो सकता है।

सरकार में इस बात को लेकर विचार विमर्श जारी है कि 20 दिसंबर को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सत्रावसान किया जाए या नहीं। अगर सत्रावसान नहीं होता है तो सरकार लेखानुदान को पारित करने के लिए अगले साल बजट सत्र के बजाय शीतकालीन सत्र का दूसरा चरण बुला सकती है। इस तरह की व्यवस्था से ससंद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण की वैधानिक जरूरत से बचा जा सकता है। जिसमें आने वाले साल के लिए सरकार के कार्यक्रमों पर रोशनी डाली जाती है। इससे माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव बहुत दूर नहीं हैं।

उधर, भाजपा के प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि संसद में उठाने के लिए सबसे पहला और अहम मुद्दा महंगाई और आर्थिक विकास में गिरावट है। उन्होंने कहा कि कोयला घोटाले को भी उठाया जाएगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में ताजा हलफनामा मामले को ढकने का एक और प्रयास है। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सत्र की शुरुआत की पूर्वसंध्या पर अनेक राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक बुलाई है।

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