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तरुण तेजपाल से पांच घंटे हुई पूछताछ, हत्या के आरोपियों के साथ बिताई रात PDF Print E-mail
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Monday, 02 December 2013 09:07

पणजी। महिला सहकर्मी के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किए गए

तहलका के संपादक तरुण तेजपाल को रविवार को छह दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

 

इसके बाद अपराध शाखा के अधिकारियों ने उनसे पांच घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद तेजपाल को इस मामले में शनिवार को गिरफ्तार किया गया था।

 

 

न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) शमा जोशी ने अभियोजन पक्ष की अपील पर तेजपाल को पूछताछ के लिए छह दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश जारी किया। अभियोजन पक्ष ने उनकी 14 दिनों की हिरासत की मांग की थी। अपनी हिरासत में लेने के बाद अपराध शाखा के अधिकारी तेजपाल को डोना पावला स्थित अपने मुख्यालय ले गए और उनसे पूछताछ की। पुलिस सूत्रों ने बताया कि तेजपाल के साथ पूछताछ का सिलसिला रात आठ बजे के आस पास खत्म हुआ और उन्हें वापस हवालात में ले जाया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि उनसे सोमवार को भी पूछताछ होगी।

लोक अभियोजक फ्रांसिस टावेरा ने तेजपाल को पुलिस हिरासत में भेजे जाने की मांग करते हुए कहा कि जिस तरह के अपराध में वे शामिल हैं, उसे देखते हुए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है। तेजपाल के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वे अपराध शाखा के साथ सहयोग कर रहे हैं। तहलका पत्रिका के संस्थापक तरुण तेजपाल पर इस महीने के शुरू में गोवा के एक पांच सितारा होटल में अपनी पत्रिका की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपनी एक महिला सहकर्मी का सात और आठ नवंबर को दो बार यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। सहकर्मी के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप का खुलासा होने के करीब दस दिन बाद तेजपाल को शनिवार को गिरफ्तार किया गया।

तेजपाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए (महिला की मर्यादा भंग करना) और धारा 376 (2-के) (अभिरक्षा में बलात्कार) के तहत मामला दर्ज किया गया है। तेजपाल को लेकर गोवा पुलिस की अपराध शाखा रविवार दोपहर अदालत पहुंची। शनिवार को जिला व सत्र न्यायाधीश की अदालत ने तेजपाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद रात


नौ बजे उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

जिला और सत्र न्यायाधीश अनुजा प्रभुदेसाई ने शनिवार को 25 पन्नों के आदेश में कहा था कि पीड़िता के बयान और अन्य दस्तावेजों को यहां पेश करने की जरूरत नहीं है क्योंकि प्रथमदृष्ट्या ऐसा संकेत मिलता है कि जो व्यक्ति मार्गदर्शक और पितातुल्य था, उसने न केवल शील भंग करने का कार्य किया बल्कि अपने पद का भी दुरुपयोग किया और विश्वासघात किया। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी न केवल प्रभावशाली व्यक्ति है बल्कि प्रथमदृष्ट्या रिकार्ड से ऐसा संकेत मिलता है कि उसने पीड़ित के परिवार पर प्रभाव डालने की कोशिश की। इस हालत में उनके साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

तहलका के संपादक ने रात पुलिस के हवालात में तीन लोगों के साथ बिताई जिनमें से दो हत्या के आरोपी हैं। रात 12 बज कर करीब 80 मिनट पर उन्हें जरूरी चिकित्सकीय जांच के लिए यहां स्थित गोवा मेडिकल कालेज भेजा गया। चिकित्सकीय जांच के बाद गोवा मेडिकल कालेज से बाहर निकलते समय 50 साल के तेजपाल ने पत्रकारों से बात करने से मना कर दिया। उनके साथ उनके वकील भी थे। पुलिस मुख्यालय के बाहर तेजपाल के परिजन खड़े थे। बाद में उन्हें हवालात ले जाया गया। उनके परिवार वालों ने उनके लिए एक जोड़ी कपड़े भिजवाए जिसकी अदालत ने इजाजत दे रखी है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद, चिकित्सकीय जांच के दौरान और हिरासत में तेजपाल शांत रहे। उनकी निगरानी के लिए हवालात के बाहर अपराध शाखा ने अपने गार्ड तैनात किए थे। जिस हवालात में तेजपाल को रखा गया है वह पणजी में पुलिस मुख्यालय के अंदर है और वहां सफाई की अच्छी व्यवस्था नहीं है। इसकी चौकसी पुलिस महानिदेशक कार्यालय के जिम्मे है।

(भाषा)

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