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मुस्लिम आबादी में साक्षरता दर काफी कम, उच्च शिक्षा में भी हिस्सेदारी कम PDF Print E-mail
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Sunday, 01 December 2013 11:22

नई दिल्ली। देश की मुस्लिम आबादी में साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है, वहीं उच्च शिक्षा में अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों की सकल नामांकन दर गैर मुस्लिम बच्चों की तुलना में करीब आधी है।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति से जुड़ी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में उच्च शिक्षा में अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों की हिस्सेदारी कम होने पर चिंता व्यक्त की।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि इन सभी विषयों पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति की 23 दिसंबर को होने वाली बैठक में विचार किया जाएगा।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति की इससे पहले 31 अक्तूबर को बैठक तय की गई थी लेकिन तेलंगाना के मुद्दे पर मानव संसाधन विकास मंत्री एम एम पल्लम राजू के प्रधानमंत्री को इस्तीफा भेजने और मंत्रालय की बैठकों में भाग नहीं लेने के कारण यह कार्यक्रम नहीं हो सका। प्रधानमंत्री ने हालांकि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और पंजाब में मुस्लिम साक्षरता दर इन राज्यों की औसत साक्षरता से काफी कम हैं । बिहार की साक्षरता दर 61.80 प्रतिशत की तुलना में वहां मुस्लिम साक्षरता दर 36 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर 67 प्रतिशत की तुलना में मुस्लिम साक्षरता दर 37.28 प्रतिशत है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की साक्षरता दर 81.7 प्रतिशत की तुलना में मुस्लिम साक्षरता दर 66.6 प्रतिशत, असम की साक्षरता दर 72 प्रतिशत की तुलना में मुस्लिम साक्षरता 48.4 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल की साक्षरता दर 69 प्रतिशत की तुलना में मुस्लिम साक्षरता दर 59 प्रतिशत है। इन


राज्यों में देश की करीब 45 प्रतिशत मुस्लिम आबादी रहती है।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षा निगरानी समिति से जुड़ी स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में 2007-08 के अध्ययन का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों की सकल नामांकन दर 8.7 प्रतिशत थी जबकि गैर मुस्लिम छात्रों की सकल नामांकन दर 16.8 प्रतिशत थी।

मदरसों का आधुनिकीकरण एवं उन्नयन एक महत्वपूर्ण विषय है जिसे कई वर्गो ने समय समय पर उठाया है।

मंत्रालय ने कहा है कि मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए क्षेत्र उन्मुख और मदरसा आधुनिकीकरण योजना को दो भागों में बांटा गया है। साथ ही शिक्षकों को बेहतर वेतन देने, कम्प्यूटरीकरण और वित्तीय सहायता जैसी पहल की गई है।

2012-13 के दौरान 9905 मदरसों और 23146 शिक्षकों को सहायता देने के लिए 182.49 करोड़ रूपए की राशि मंजूर की गई है।

ऐसे क्षेत्र जहां उर्दू बोलने वाले लोगों की आबादी 25 प्रतिशत से अधिक हो, वहां के सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।

मंत्रालय ने बताया कि देश के शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े 374 जिलों में एक-एक मॉडल कालेज स्थापित करने का फैसला किया गया है । इन 374 जिलों में से 67 जिले अल्पसंख्यक बहुल हैं।

(भाषा)

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