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तरुण तेजपाल गिरफ्तार, पणजी की अदालत ने खारिज की जमानत अर्जी PDF Print E-mail
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Sunday, 01 December 2013 09:05

पणजी। गोवा पुलिस ने ‘तहलका’ पत्रिका के संस्थापक संपादक तरुण तेजपाल को शनिवार रात गिरफ्तार कर लिया। तेजपाल पर उनकी सहयोगी महिला पत्रकार ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यहां की स्थानीय अदालत ने शनिवार शाम उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

 

जिला व सत्र न्यायाधीश अनुजा प्रभुदेसाई के तेजपाल की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करने के 90 मिनट बाद पुलिस के साथ उनका चूहे-बिल्ली का खेल खत्म हो गया। तेजपाल की अग्रिम जमानत अर्जी पर दो दिनों से बहस जारी थी। अभियोजन पक्ष ने तेजपाल की जमानत अर्जी का पुरजोर विरोध किया।

डोना पाउला में अपराध शाखा के मुख्यालय में 50 साल के तेजपाल को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया। अपराध शाखा के मुख्यालय में तेजपाल अपने परिजनों के साथ अदालत के आदेश का इंतजार कर रहे थे। अदालत ने कहा था कि वह शाम 4:30 बजे तेजपाल की अग्रिम जमानत अर्जी पर फैसला सुनाएगी। तेजपाल की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी, बेटी, भाई और उनके दोस्त संजय रॉय पुलिस चौकी से बाहर आए। तेजपाल को जरूरी चिकित्सा जांच के लिए ले जाया जाएगा।

स्टिंग आॅपरेशनों के जरिए खोजी पत्रकारिता करने के लिए मशहूर तेजपाल गोवा और दिल्ली की पुलिस के हाथ नहीं आ रहे थे। पुलिस ने शुक्रवार तड़के दिल्ली में तेजपाल के आवास पर छापेमारी भी की थी। सत्र न्यायाधीश के अंतरिम संरक्षण दिए जाने के बाद तेजपाल गोवा आए। उन्हें अग्रिम जमानत अर्जी पर अंतिम फैसला आने तक गिरफ्तारी से संरक्षण हासिल था।

यह पूरा मामला 20 नवंबर को उस वक्त सामने आया जब तेजपाल ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने महिला पत्रकार से ‘दुर्व्यवहार’ किया। तेजपाल ने अपने माफीनामे में यह भी कहा कि वे अपने पद से छह महीने के लिए खुद को अलग कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद तेजपाल अपना बयान बदलते रहे। तेजपाल ने बाद में यह दावा भी किया कि महिला पत्रकार के साथ जो कुछ हुआ वह आपसी सहमति से हुआ था। उन्होंने पीड़िता की निष्ठा पर भी सवाल उठाए। पीड़िता का आरोप था कि इस महीने के शुरू में गोवा में आयोजित ‘तहलका’के एक कार्यक्रम के दौरान तेजपाल ने पांच सितारा होटल की लिफ्ट में दो बार उसका यौन उत्पीड़न किया।

न्यायाधीश प्रभुदेसाई ने अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद तेजपाल की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष ने यह कहते हुए तेजपाल की जमानत का विरोध किया कि उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी है क्योंकि प्रथम दृष्टया बलात्कार का मामला बनता है। बहरहाल, न्यायाधीश ने तेजपाल को इस बात की इजाजत दी कि


अगर उन्हें हिरासत में ले लिया जाता है तो पूछताछ के दौरान अगर वे चाहें तो दिन में एक बार कुछ समय के लिए अपने वकील की मदद ले सकते हैं। तेजपाल को घर में बना हुआ खाना खाने की भी इजाजत दी जाएगी।

तेजपाल की वकील गीता लूथरा ने कहा कि वे अभी सत्र अदालत के आदेश को चुनौती नहीं देंगे। अदालत का फैसला आने से पहले ही तेजपाल अपराध शाखा के मुख्यालय में मौजूद थे। न्यायाधीश ने सुबह में शाम 4:30 बजे के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बहरहाल, फैसला आखिरकार रात आठ बजे सुनाया गया।

गोवा पुलिस ने तेजपाल पर बलात्कार, बंधक बनाकर बलात्कार करने और एक महिला पत्रकार के शीलभंग करने का मामला दर्ज किया है। अगर तेजपाल को इस मामले में दोषी करार दिया जाता है तो उन्हें कम से कम दस साल की जेल और ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद की सजा सुनाई जा सकती है।

सरकारी वकील सरेश लोतलिकर ने दलील दी कि तेजपाल को पुलिस हिरासत में भेजा जाना चाहिए ताकि उनसे उचित तरीके से पूछताछ हो सके। सरेश ने कहा कि तेजपाल अपना बयान बार-बार बदलते रहे हैं और अब दावा कर रहे हैं कि उनका पक्ष सुना नहीं गया। उन्होंने जज से कहा-आरोपी अपने अलग-अलग बयानों से किसी गिरगिट की तरह रंग बदल रहे हैं।

इस बीच, अदालत में मौजूदगी के वक्त तेजपाल पर एक शख्स ने काला झंडा फेंका। लेकिन वे कार में दाखिल हो गए जिससे झंडा उन्हें नहीं लगा। सरेश ने कहा कि इस महीने के शुरू में गोवा के जिस होटल में घटना हुई, वहां की सीसीटीवी फुटेज बलात्कार के आरोप की पुष्टि के पर्याप्त संकेत देती है। सरकारी वकील ने यह दलील भी दी कि तेजपाल गोवा पुलिस के सामने पेश नहीं हो रहे थे और वे शुक्रवार को अदालत से अंतरिम राहत मिलने के बाद ही पेश हुए।

उन्होंने आरोप लगाया कि तेजपाल ने पूर्व में शिकायतकर्ता के परिवार पर दबाव बनाने का प्रयास किया था। उन्होंने इस संबंध में दिल्ली में दर्ज कराई गई प्राथमिकी का जिक्र किया। वकील ने कहा कि आरोपी के पहले के आचरण से इस बात को बल मिलता है कि वे जांच में दखल दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीड़िता अपने बयानों पर कायम रही हैं।

 

(ईएनएस व एजंसी)

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