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वसुंधरा राजे की राह आसान पर बाकी दिग्गजों के सामने कड़ी चुनौती PDF Print E-mail
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Friday, 29 November 2013 10:01

राजीव जैन

जयपुर। राजस्थान के कोटा संभाग में भाजपा ने विधानसभा चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। इस संभाग की झालरापाटन सीट से वसुंधरा राजे तो आसान मुकाबले में हैं पर भाजपा के कई दिग्गज नेता कड़े मुकाबले में फंसे हुए हैं। कांग्रेस और भाजपा को आधा दर्जन सीटों पर बागियों की चुनौती के साथ ही भितरघात का भी सामना करना पड़ रहा है।

 

राज्य में कोटा संभाग भाजपा का मजबूत जनाधार वाला इलाका रहा है। भाजपा के इस मजबूत इलाके में कांग्रेस ने पिछले चुनाव में जोरदार घुसपैठ कर ली थी। इस इलाके के झालावाड़ जिले की झालरापाटन से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री की दावेदार वसुंधरा राजे चुनाव मैदान में हैं। वसुंधरा राजे के सामने कांग्रेस ने महिला उम्मीदवार मीनाक्षी चंद्रावत को खड़ा किया है। चंद्रावत पूर्व में जिले की खानपुर से विधायक रह चुकी हैं और इस बार भी वहीं से टिकट मांग रही थी। कांग्रेस ने उन्हें वसुंधरा राजे के मुकाबले टिकट देकर इलाके में स्थानीय महिला उम्मीदवार देकर संघर्ष को धारदार बनाने की कोशिश की है। वसुंधरा राजे इस इलाके से लगातार चुनाव जीतती रही हैं। झालावाड़ से पांच बार सांसद और तीन बार विधायक रहने के साथ ही पूरे इलाके में उनकी जोरदार पकड़ मानी जाती है। उन्होंने परचा दाखिल करने के बाद इलाके में अभी तक प्रचार नहीं किया है। उनके प्रचार की कमान उनके सांसद बेटे दुष्यंत सिंह ने संभाल रखी है। कांग्रेस की चंद्रावत गांव-गांव घूम कर लोगों से बदलाव की अपील कर प्रचार में लगी हैं।

कोटा संभाग के कोटा, बारां, झालावाड़ और बूंदी जिलों की 17 सीटों में से आधा दर्जन पर तिकोना मुकाबला हो रहा है। कांग्रेस और भाजपा के अलावा आधा दर्जन सीटों पर निर्दलीय सांसद किरोड़ी लाल मीणा की पार्टी राजपा के उम्मीदवारों ने मुख्य मुकाबले में जगह बनाकर कांग्रेस और भाजपा को परेशानी में डाल दिया है। इन जिलों में दोनों दलों में टिकट बंटवारे के बाद भारी उथल पुथल मच गई थी। दोनों बडेÞ दलों के नाराज नेताओं की नाराजगी चुनाव में गुल खिला सकती है। इससे ही दोनों दलों में बडे पैमाने पर भितरघात की आशंका के चलते नतीजों में उलटफेर के आसार बन गए हैं। वसुंधरा राजे के


गृह जिले झालावाड़ की तीन सीटों पर भाजपा के विधायकों ने बगावत का झंडा थाम पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है। झालावाड़ जिले की खानपुर सीट के मौजूदा विधायक अनिल जैन ने टिकट कटने पर राजपा का दामन थाम लिया और मैदान में कूद गए। इसी तरह से डग सीट पर पूर्व विधायक स्नेहलता भी नाराज होकर राजपा से मैदान में हैं। मनोहरथाना सीट पर पूर्व विधायक जगन्नाथ वर्मा भी टिकट कटने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में डटे हुए हैं। इन तीनों सीटों पर पार्टी के दमदार नेताओं की बगावत भाजपा को भारी पड़ रही है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वसुंधरा राजे ने बारां जिले की अंता और कोटा उत्तर सीट को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। अंता से कांग्रेस के उम्मीदवार प्रमोद जैन भाया को पटकनी देने के लिए वसुंधरा राजे ने इस सीट पर जातीय कार्ड खेलकर टोंक जिले के नेता प्रभुलाल सैनी को लाकर खड़ा कर दिया। इस इलाके में सैनी को मजबूती देने के लिए नरेंद्रमोदी की सभा तक कराई गई है। प्रमोद जैन का इलाके में खासा दबदबा है। उनकी पत्नी उर्मिला जैन झालावाड़ से लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं जिसमें उन्होंने वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह को कड़ी टक्कर दी थी। अंता में माली समाज की बहुलता के कारण ही इस वर्ग के प्रभुलाल सैनी को जैन के सामने मैदान में उतारा गया है।

इसी तरह से कोटा उत्तर सीट पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल को भाजपा के प्रहलाद गुंजल से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। गुंजल को भी धारीवाल के सामने उतारकर उनकी रफ्तार रोकने की कोशिश की गई है। कोटा संभाग की बूंदी सीट पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा को भाजपा के अशोक डोगरा से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। कोटा संभाग की पाटन, पीपल्दा और छबड़ा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के साथ राजपा के उम्मीदवार भी मुख्य मुकाबले में हैं। इससे इन सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के समीकरण गड़बड़ा गए हैं।

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