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दिल्ली के चुनाव में उतरे स्टार प्रचारक PDF Print E-mail
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Friday, 29 November 2013 09:34

मनोज मिश्र

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में सभी दलों ने चुनाव प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। स्टार प्रचारकों की लाइन लगी हुई है। भाजपा का चुनाव प्रचार ज्यादा व्यवस्थित है और उसके हर बड़े नेता कई-कई सभाएं कर रहे हैं। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की दो सभाएं हो चुकी है और 30 नवंबर को तीन और एक दिसंबर को एक सभाएं होने वाली है।

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, पार्टी महासचिव जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व अध्यक्ष और दिल्ली चुनाव के प्रभारी नितिन गडकरी, वेंकेया नायडू, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उप मुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, बिहार प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय, झारखंड के पूर्व अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी समेत भोजपुरी गायक मनोज तिवारी, स्मृति ईरानी, सांसद नवजोत सिंह सिद्धू से लेकर देश के अनेक हिस्सों से आए नेता गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले छोटी बड़ी सभाएं कर रहे हैं।

 

कांग्रेस में तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सभा होने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सभा का सभी को इंतजार है। पहले चर्चा थी कि राहुल गांधी रोड शो करेंगे लेकिन अब उसे टाल दिया गया। इसका एक कारण दक्षिणी दिल्ली में हुई उनकी सभा में कम भीड़ का आना भी माना जा रहा है। कांग्रेस के चुनाव प्रचार की पूरी कमान मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के हाथों में है। वे रोज छह से सात सभाएं कर रही हैं।

कांग्रेस, भाजपा के अलावा जनता दल (एकी) अध्यक्ष शरद यादव, बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, पार्टी नेता केसी त्यागी की सभा होने वाली है। बिहार के मूल निवासी और दिल्ली प्रदेश जद (एकी) अध्यक्ष साबिर अली और पूर्व अध्यक्ष एसएल खाड़िया पूरी करह से चुनाव में लगे हुए हैं। खाड़िया का दावा है कि इस बार उनकी पार्टी कई सीटें जीतने वाली है। पिछले कई चुनावों से दिल्ली में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली बसपा के स्थानीय नेता तो चुनाव प्रचार कर रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती की सभा करने की भी चर्चा है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के जेल में होने के चलते उनकी पार्टी राजद चुनाव में सक्रिय नहीं है। पिछली बार ओखला से उनकी पार्टी के उम्मीदवार आसिफ मोहम्मद खान चुनाव जीते थे। लोजपा नेता राम विलास पासवान और उनके पुत्र चिराग पासवान की सभाएं भी हो रही है। सपा ने भी काफी उम्मीदवार खड़े किए हैं। वाम दलों के उम्मीदवोरों के समर्थन में कई सभा हो चुकी है। नई पार्टी आम आदमी पार्टी से लेकर सोशलिस्ट पार्टी का चुनाव अभियान भी खूब चल रहा है।

‘आप’ तो कांग्रेस और भाजपा की तरह चुनाव में हर हथियार आजमा रही है। वैसे इस बार तो चुनाव प्रचार की शुरुआत ही ‘आप’ से हुई है। वे तो पार्टी के वजूद में आने के साथ ही चुनाव प्रचार में लग गए। अब बड़े दलों के चुनाव प्रचार में उफान आने के बाद उनका प्रचार कम दिखने लगा है। पोस्टर, बैनर के बाद एफएम और एसएमएस के जरिए, आॅडियो-वीडियो के जरिए पूरा चुनाव अभियान हाईटेक बना हुआ है। सोशल मीडिया का जितना इस चुनाव में उपयोग किया गया है वह शायद पहले नहीं किया


गया होगा। चुनाव प्रचार का नया साधन चुनाव सर्वेक्षणों को बना दिया गया है। टिकट बांटने से लेकर मुद्दे तय करने के लिए तो सर्वे का सहारा लिया गया ही, अपने को जीता हुआ दिखाने के लिए अपने नेता को बाकि से आगे दिखाने के लिए सर्वे का इस बार भरपूर इस्तेमाल किया गया।

चुनाव आयोग की सख्ती से पोस्टर-बैनर तो कम दिखे लेकिन चुनाव पहले से ज्यादा महंगा होता जा रहा है। अब चुनाव प्रचार केवल और केवल पैसों के बूते हो रहा है। चुनाव में पैसों के अलावा शराब, बाहुबल का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है। कहने के लिए चुनाव से जुड़े काम पार्टी कार्यकर्ता करते हैं लेकिन वास्तव में हर कुछ पैसे से हो रहा है।

चुनाव आयोग मतदाताओं को पर्ची देता है लेकिन वास्तव में उम्मीदवार खुद पर्ची पहुंचवाते हैं। चुनाव आयोग की तमाम पाबंदियों के बावजूद ‘पेड न्यूज’ इस बार भी छप रहे हैं। इस बार थोड़ा तरीका बदल गया है अन्यथा एक ही नेता का एक ही तरह का प्रचार कई अखबारों में नहीं दिखता है। ज्यादातर मजबूत उम्मीदवारों ने चुनाव प्रचार के लिए पेशेवर लोगों को ठेका दिया है। यहां तक कि सभा में भीड़ जुटाने से लेकर मंच तैयार करने और उसकी सूचना आम लोगों तक पहुंचाने का काम निजी एजंसियां कर रही है। माना जा रहा है कि केवल प्रचार पर इस चुनाव में सौ करोड़ से ज्यादा खर्च होगा। चुनाव आयोग के खर्च करने की सीमा से ज्यादा तो सभी महत्त्वपूर्ण दल के उम्मीदवार कर रहे हैं। एक मोटा अनुमान है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। करीब दो सौ करोड़ रुपए तो आखिरी दो दिन में खर्च होने का अनुमान है।

चुनाव प्रचार ज्यादा तो घर-घर जा कर हो रहा है लेकिन नुक्कड़ सभाएं भी चुनाव प्रचार में प्रभावी हो रही है। भले ही कांग्रेस और भाजपा ने पूर्वांचल के प्रवासियों को टिकट देने में कोताही की लेकिन भाजपा में सबसे ज्यादा मांग भोजपुरी गायक मनोज तिवारी की है। कांग्रेस ने तो केवल एक दिकट पूर्वांचल के उम्मीदवार को दिया है इसलिए कांग्रेस में इस बार ज्यादा नाराजगी है। भाजपा के राष्ट्रीय नेता छोटी-छोटी सभाओं में जाने से कोताही नहीं बरत रहे हैं। वैसे इस बार भाजपा का चुनाव अभियान पहले चुनावों के मुकाबले कमजोर है लेकिन कांग्रेस के मुकाबले तो काफी बेहतर है। कांग्रेस में तो सोनिया-राहुल गांधी के अलावा किसी और नेता के चुनावी सभा की कोई चर्चा ही नहीं है।

दिल्ली के नेता, सांसद और मंत्री अपने-अपने इलाकों में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पहले की तरह हर विधानसभा क्षेत्र में जा रही हैं। इस बार इस मायने में अनोखा चुनाव है कि सभी विधायक (एक की पत्नी और दो के पुत्र) चुनाव मैदान में हैं। इतना ही नहीं हर विधायक मुख्य मुकाबले में है। चुनाव प्रचार आने वाले दो-तीन दिन में शीर्ष पर पहुंचने वाला है। चार दिसंबर को होने वाले मतदान के लिए दो दिसंबर तक चुनाव प्रचार होगा।

 

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